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ईरान युद्ध में अमेरिकी बचाव मिशन की सच्चाई: परमाणु स्थल के पास मलबा और 240 मिलियन डॉलर के ड्रोन का नुकसान

उपग्रह तस्वीरों से खुलासा: एफ-15ई लड़ाकू विमान को मार गिराने के बाद चले बचाव अभियान का मलबा ईरान के परमाणु केंद्र के पास मिला; वहीं अमेरिकी नौसेना ने खाड़ी में 240 मिलियन डॉलर के ट्राइटन ड्रोन के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि की।

भूराजनीति3 स्रोत2 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 09:29

ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी सेना की एक रहस्यमयी बचाव कार्रवाई की सच्चाई उपग्रह चित्रों से उजागर हुई है। हाल ही में जारी तस्वीरों में इस्फ़हान प्रांत के शहरेज़ा स्थित एक परित्यक्त हवाई पट्टी के पास कई अमेरिकी विमानों का मलबा नज़र आया है, जो ईरान के प्रमुख परमाणु परिसर के निकट है [A1]। यह मलबा उस समय का बताया जा रहा है जब तेहरान ने एक अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को मार गिराया था और उसके दो पायलटों को बचाने के लिए अमेरिका ने 155 विमानों का बेड़ा भेजा था [A1]। इस अभियान के पैमाने और परमाणु ठिकाने से निकटता ने इसकी वास्तविक मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिससे यह संदेह गहराता है कि मकसद सिर्फ दो वायुसैनिकों को निकालना भर नहीं था।

इसी बीच, अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की है कि ईरान युद्ध के दौरान उसका अब तक का सबसे महंगा हवाई नुकसान हुआ है—एक 240 मिलियन डॉलर का एमक्यू-4सी ट्राइटन खुफिया ड्रोन 9 अप्रैल को फ़ारस की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया [A2][A3]। नौसेना सुरक्षा कमान की दुर्घटना रिपोर्ट में ऑपरेशनल सुरक्षा का हवाला देते हुए स्थान और कारण नहीं बताए गए, लेकिन उड़ान-निगरानी वेबसाइटों से मिली जानकारी के अनुसार ड्रोन ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अचानक तेज़ी से ऊंचाई खोई और एक आपातकालीन “कोड 7700” संकेत भेजने के बाद रडार से गायब हो गया [A2][A5]। भारतीय मीडिया ने इस नुकसान की ओर इशारा करते हुए अनुमान लगाया कि ईरान ने संभवतः एक और अमेरिकी हवाई संपत्ति को निशाना बनाया है [A2]।

रूसी स्रोतों के अनुसार, इस क्षति के तुरंत बाद अमेरिका ने इटली के सिगोनेला एयरबेस पर एक और एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन तैनात कर दिया है ताकि खाड़ी क्षेत्र में अपनी दूरगामी टोही क्षमता बरकरार रखी जा सके [A4]। इस कदम से स्पष्ट है कि वॉशिंगटन इस रणनीतिक निगरानी अंतर को जल्द भरना चाहता है, जो इन ड्रोनों के सैन्य महत्व और ईरान के साथ तनाव के बीच खुफिया जानकारी की अहमियत को रेखांकित करता है।

ये घटनाक्रम एक व्यापक तस्वीर पेश करते हैं जिसमें अमेरिकी अभियानों की कमज़ोरियाँ और बढ़ती कीमत सामने आ रही है। एक ओर जहाँ 155 लड़ाकू विमानों का बचाव बेड़ा परमाणु स्थल के समीप मलबा छोड़ जाता है, वहीं 240 मिलियन डॉलर का बेहद उन्नत ड्रोन रहस्यमय ढंग से गिरता है। इससे न केवल अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह भी संभावना प्रबल होती है कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली उम्मीद से अधिक प्रभावी साबित हो रही है। आने वाले दिनों में, बचाव मिशन के पीछे की असल वजह की जाँच और ड्रोन हानि की विस्तृत समीक्षा इस जंग के अगले मोड़ को तय कर सकती है।

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