नेतन्याहू का ट्रंप के साथ पूर्ण सहमति का दावा: ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने देंगे
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा, “जब तक मैं पद पर हूं, ईरान के पास परमाणु बम नहीं होगा”; अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच ईरानी संपत्तियों पर रोक को लेकर इजरायली दबाव जारी।

इजरायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी “पूर्ण सहमति” है। एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा, “जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।” दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत के बाद जारी इस वक्तव्य में नेतन्याहू ने पिछले तीस वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अपनी भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि ईरान यहूदी राज्य को नष्ट करना चाहता है।
हालांकि, यह एकजुटता ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम और तनाव कम करने को लेकर संवेदनशील बातचीत चल रही है। इजरायली सूत्रों के अनुसार, ट्रंप का यह दावा कि जल्द ही समझौता हो जाएगा, ने नेतन्याहू और उनकी सुरक्षा टीम को चौंका दिया। इसके बाद इजरायल ने वाशिंगटन पर यह दबाव डाला कि किसी भी समझौते में ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी न किया जाए। इजरायल की मांग है कि अंतिम समझौते में संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकालना, संवर्धन केंद्रों को तोड़ना और ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर रोक लगाना शामिल हो।
नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया कि ट्रंप ने इन शर्तों पर प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल के हफ्तों में केवल यूरेनियम हटाने की बात कही और मिसाइलों या क्षेत्रीय सहयोगियों का जिक्र नहीं किया। यह विसंगति अमेरिकी कूटनीति की सतर्क रणनीति को दर्शाती है, जो तेहरान के साथ तत्काल समझौता चाहती है, जबकि इजरायल दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी पर जोर दे रहा है।
ईरानी पक्ष की प्राथमिकताएं इसके उलट हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान के प्रस्ताव में सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी संघर्षविराम, समुद्री नाकाबंदी हटाना और अमेरिका द्वारा ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने की स्पष्ट गारंटी शामिल है। ये मांगें इजरायल की शर्तों से सीधे टकराती हैं, जिससे आगे तनाव गहराने की संभावना है।
नेतन्याहू का “पूर्ण सहमति” का दावा भले ही वाशिंगटन के साथ सामरिक तालमेल दिखाता हो, लेकिन वार्ता की बारीकियों पर मतभेद स्पष्ट हैं। जैसे-जैसे बातचीत नाजुक मोड़ पर पहुंची है, इजरायल की सक्रिय लॉबिंग से यह तय होगा कि अंतिम समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर कितना अंकुश लगा पाता है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह अब सिर्फ दो नेताओं की सहमति का नहीं, बल्कि जटिल सुरक्षा ब्यौरों की लड़ाई का मामला बन गया है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Netanyahu declares that as long as he is prime minister, Iran will never have nuclear weapons, emphasizing his long-term personal struggle against the Iranian nuclear program. He frames the issue as an existential threat to Israel and claims full backing from President Trump. The tone is one of determined leadership and vigilance.
The coverage conveys Netanyahu’s stated support for the US-Iran talks but highlights his demand that Israel should not be harmed by any agreement. The focus is on Israel’s attempt to safeguard its own interests and the suspicion that any deal with Iran could come at Israel’s expense. The report includes a Palestinian perspective, questioning the fairness of the arrangement.
The articles report on Israel pressuring the US to prevent the release of frozen Iranian assets and demanding strict conditions like removal of enriched uranium and dismantling of Iran's nuclear program. The narrative is pragmatic, detailing the negotiations and Israel's security concerns without overt judgment. The emphasis is on the technical aspects of the potential deal and Israel's leverage.
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