Edition of 16:00 CETSaturday, 13 June 2026
287 स्रोत · 16 भाषाएँआज 0 ब्रीफिंग
Tuesday, 9 June 2026 · Edition of 06:00 CET

रूस ने AZAL विमान पर मिसाइल प्रहार स्वीकारा, अज़रबैजान को मुआवज़ा देने पर सहमति

16 महीने की देरी के बाद रूस ने अनजाने में हुई पीवीओ कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराते हुए हर्जाने का समझौता किया, जिससे राजनयिक संकट का समाधान निकला।

भूराजनीति6 स्रोत2 भाषाएँ2 मिनट पढ़नाअपडेट 09:29

रूस और अज़रबैजान ने लगभग 16 महीने पुराने एज़ाल (AZAL) विमान हादसे के परिणामों को सुलझाने की औपचारिक घोषणा कर दी है। बुधवार को दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि मॉस्को पीड़ितों को मुआवज़ा देने पर राज़ी हो गया है। दिसंबर 2024 में बाकू से ग्रोज़नी जा रहा अज़रबैजान एयरलाइंस का एम्ब्रेयर-190 विमान पश्चिमी कज़ाकिस्तान में अक्ताऊ शहर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 62 में से 38 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस दुखद घटना ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच गहरा राजनयिक तनाव पैदा कर दिया था।

शुरूआती जाँच और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों ने संकेत दिया था कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली (पीवीओ) ने यूक्रेनी ड्रोन हमलों का मुकाबला करते वक़्त ग़लती से इस नागरिक विमान को निशाना बना लिया। हालांकि, क्रेमलिन ने काफ़ी समय तक किसी भी ज़िम्मेदारी से इनकार किया। स्वतंत्र रूसी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया, जैसे बीबीसी रूसी सेवा और मॉस्को टाइम्स, ने इस लंबी चुप्पी और बाद में आए स्वीकारोक्ति को व्यापक कवरेज़ दी। मेदुज़ा और कोमर्सांट जैसे आउटलेट्स ने बताया कि अब जाकर संयुक्त बयान में साफ़ तौर पर “रूसी संघ के हवाई क्षेत्र में पीवीओ प्रणाली की अनजाने में हुई कार्रवाई” का ज़िक्र किया गया है, जिसने विमान को क्षतिग्रस्त किया।

रूसी सरकारी और व्यावसायिक मीडिया, जैसे वेदोमोस्ती और फ़ोर्ब्स रूस, ने इस समझौते को “सहयोगी संबंधों को आगे बढ़ाने की आपसी इच्छा” के सबूत के रूप में पेश किया। राष्ट्रपति पेसकोव ने इस बयान को “विस्तृत” बताते हुए आगे किसी टिप्पणी से इनकार कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा मुख्य रूप से राजनयिक क्षति को सीमित करने और दक्षिण कॉकेशस में मास्को के प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश है, ख़ासकर तब जब अज़रबैजान एक सैन्य और कूटनीतिक रूप से मज़बूत खिलाड़ी के रूप में उभरा है। बाकू ने अपनी शर्तों पर ज़ोर देते हुए न केवल मुआवज़े, बल्कि घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी की भी माँग की थी।

मुआवज़े की रक़म का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन समझौते से भविष्य में सहयोग का रास्ता साफ़ होता दिख रहा है। हालाँकि, इंतज़ार की लंबी अवधि और सीमित स्वीकारोक्ति से यह सवाल उठता है कि क्या इस तरह की ग़लतियों को रोकने के लिए सैन्य प्रोटोकॉल में बदलाव होंगे। फ़िलहाल, दोनों देशों ने इस कड़वे अध्याय को बंद करने को प्राथमिकता दी है, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए न्याय का सफ़र शायद अभी बाकी हो।

यह समाचार इन पर प्रकाशित हुआ

6 स्रोत · 2 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की

Vedomosti
Forbes Russia
BBC News Russian
Meduza
Kommersant
Moscow Times