ईरान समझौता: ट्रंप का 'युद्ध खत्म' का दावा, लेकिन शर्तों पर गहरा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु हथियार न रखने की शर्त पर सहमति का एलान किया, जबकि तेहरान ने कहा कोई अंतिम फैसला नहीं; होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों पर मतभेद बरकरार।

परस्पर विरोधी संकेतों के बीच, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौता कभी करीब और कभी दूर नज़र आ रहा है। गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान पर नियोजित हमले रद्द कर यह घोषणा की कि "हमने आज ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया" और एक "महान समझौता" हो गया है [A20]। उन्होंने दावा किया कि इस सप्ताहांत यूरोप में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं [A12]। हालांकि, तेहरान ने सावधानी बरती – "कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ" और दस्तावेज़ का मसौदा अभी स्वीकृति के स्तर पर है [A20]।
व्हाइट हाउस के अनुसार, समझौते की शर्तों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करना, संवर्धित यूरेनियम का भंडार नष्ट करना और बिना किसी शुल्क के होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना शामिल है [A28]। इसके बदले 60 दिन का युद्धविराम होगा, जिसके दौरान विस्तृत परमाणु वार्ता होगी; प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने वादों का पालन करेगा [A12]। ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि "ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं रखेगा" और यह समझौता 95 प्रतिशत उद्देश्य पूरा करता है [A20]।
लेकिन ईरानी मीडिया ने इसके ठीक विपरीत एक 14-सूत्रीय प्रस्ताव का खुलासा किया, जिसमें यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बरकरार रखने, होर्मुज पर नियंत्रण और 24 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति जारी करने की बात कही गई [A18]। इस पर ट्रंप बिफर पड़े – "ईरान ने जो लीक किया, उसका सच्चाई से कोई संबंध नहीं... बहुत बेईमान लोग" [A7]। खुद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने 'इस्लामाबाद एमओयू' को "कभी इतना करीब नहीं" बताया, लेकिन साथ ही मीडिया को अटकलों से बचने की हिदायत दी [A2]।
पाकिस्तान, यूएई और कतर की मध्यस्थता ने इस पहल को आकार दिया; सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी सेना प्रमुख और अमीरी नेताओं ने ट्रंप को हमले रोकने के लिए राजी किया [A6]। तीन महीने के इस युद्ध में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं, होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू रही थीं [A24]। जिनेवा को हस्ताक्षर स्थल के रूप में देखा जा रहा है, संभवतः G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर [A23]।
यह समझौता बेहद नाजुक है: विश्वास की भारी कमी के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी 'लाल रेखाओं' पर अड़े हैं [A24]। 60 दिन का युद्धविराम परमाणु सौदे पर विस्तृत बातचीत की खिड़की तो देता है, लेकिन होर्मुज और प्रतिबंधों पर गहरे मतभेद बने हुए हैं [A12]। अगले कुछ दिन तय करेंगे कि ट्रंप का "युद्ध खत्म" का दावा सच साबित होता है या फिर यह केवल एक और समय से पहले की घोषणा है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Trump angrily dismisses Iranian leaks as fake news, accusing Tehran of bad faith. He warns Iran to get its act together, casting doubt on the deal's prospects. The US stance is portrayed as victim of Iranian dishonesty, with urgency and mistrust dominating coverage.
Coverage details the potential deal's specifics: reopening Hormuz, nuclear restrictions, and sanction relief. It presents Trump's announcement as a possible breakthrough but notes Iranian denials and unresolved details. The tone is analytical, weighing optimism against remaining obstacles.
Gulf press notes Trump's claims but highlights Tehran's denial that a final decision has been made. It focuses on the cautious Iranian response and the lack of confirmation. The framing underscores uncertainty, with progress touted by Washington but no commitment from Iran.
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