रूस ने यूरोपीय ड्रोन कारखानों को सैन्य लक्ष्य घोषित किया, युद्ध विस्तार का ख़तरा
दिमित्री मेदवेदेव ने यूक्रेन को ड्रोन सप्लाई करने वाली यूरोपीय कंपनियों को “वैध सैन्य लक्ष्य” बताया। मास्को ने 21 पतों की सूची जारी कर सीधी धमकी दी है।

रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने 15 अप्रैल को यूरोप में उन सभी स्थानों को रूसी सेना का “संभावित वैध लक्ष्य” करार दिया, जहाँ यूक्रेन के लिए ड्रोन और पुर्जे बनाए जा रहे हैं। यह बयान रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा ऐसे ठिकानों के पतों की सार्वजनिक सूची जारी करने के तुरंत बाद आया, जिसे मेदवेदेव ने “संभावित लक्ष्यों का रजिस्टर” कहा। उन्होंने अपने अंग्रेज़ी एक्स अकाउंट पर लिखा कि हमला कब वास्तविकता बनेगा, यह “हालात के विकास” पर निर्भर करेगा।
रक्षा मंत्रालय की सूची में ब्रिटेन, जर्मनी, डेनमार्क, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, पोलैंड, चेक गणराज्य, इटली, स्पेन, इज़राइल और तुर्की की लगभग 21 कंपनियों के पते शामिल हैं। स्पेन की यूएवी नेविगेशन (ग्रुपो ओएसिया) की मैड्रिड स्थित इकाई, इटली की कम से कम चार फ़ैक्ट्रियाँ—जिनमें वेनिस की एक यूनिट भी शामिल है—और जर्मनी के म्यूनिख का एक आवासीय पता इस सूची में आने से यूरोपीय मीडिया में हड़कंप मच गया। रूसी पक्ष ने इसे यूरोपीय नेतृत्व द्वारा यूक्रेन को ड्रोन आपूर्ति बढ़ाने की “जानबूझकर की गई वृद्धि” बताया, जो महाद्वीप को युद्ध में खींच रही है।
यूरोपीय प्रतिक्रियाओं में चिंता और सतर्कता दोनों झलकी। नॉर्वे के दक्षिण-पूर्वी विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ग्लेन डायसन ने मेदवेदेव की चेतावनी को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि पश्चिम मास्को को उकसाने में अधिक प्रयास कर रहा है। फ़्रांसीसी अख़बार ल ताँ ने इस क़दम को “धमकी या सुनियोजित चेतावनी” का सवाल बताया। इधर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कोई नई बात कहने से इनकार करते हुए केवल रक्षा मंत्रालय के बयान की ओर इशारा किया, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि यूरोपीय संघ की सीधी संलिप्तता बढ़ रही है।
यह घटनाक्रम यूक्रेन युद्ध में एक नए ख़तरनाक मोड़ का संकेत है। मास्को ने पहली बार इतने खुलेआम यूरोपीय ठिकानों को संभावित हमलों की सूची में डाला है, जिससे छद्म युद्ध और प्रत्यक्ष टकराव के बीच की रेखा धुँधली होती जा रही है। पश्चिमी देश यूक्रेन के ड्रोन कार्यक्रम को मज़बूत करने की कवायद तेज़ कर रहे हैं, वहीं रूस इसे अपने क्षेत्र पर हमलों का सीधा विस्तार मान रहा है। आने वाले हफ़्तों में यूरोपीय सरकारों की प्रतिक्रिया और संभावित सैन्य तैयारी इस बात का संकेत देंगी कि यह धमकी केवल शब्दों तक सीमित रहेगी या हक़ीक़त में बदलेगी।
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