भारत ने ओमान तट पर हमलों पर अमेरिकी राजनयिक को दूसरी बार बुलाया
तीन भारतीय नाविकों की मौत और लगातार हमलों के बाद भारत ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को बुलाकर कड़ा विरोध जताया, और तत्काल रोक की मांग की।

भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी उप-प्रमुख राजनयिक जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय बुलाकर ओमान तट पर वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सैन्य हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह 48 घंटे में दूसरी बार था जब भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। मीक्स को पहली बार बुधवार को बुलाया गया था, जब पलाऊ-ध्वज वाले तेल टैंकर सेट्टेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे। बृहस्पतिवार को एक और जहाज, एमटी जलवीर, पर हमला हुआ, जिसमें 20 भारतीय चालक दल सवार थे, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।\n\nये हमले ओमान की खाड़ी में अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) की कार्रवाइयों का हिस्सा बताए जा रहे हैं, जो ईरान से जुड़े संदिग्ध जहाजों को निशाना बना रही है। हालांकि, भारत का कहना है कि ये हमले नागरिक जहाजों पर किए गए, जिनमें भारतीय नागरिक सवार थे। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे 'अस्वीकार्य' बताते हुए कहा कि घातक बल का इस्तेमाल समुद्री वाणिज्य की सुरक्षा को कमजोर करता है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कजाकिस्तान में होने के कारण उप-प्रमुख मीक्स ने कार्यवाहक राजदूत (चार्ज डी अफेयर्स) के रूप में यह जिम्मेदारी निभाई।\n\nइस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा। रूसी अखबार वेदोमोस्ती ने भारत के विरोध और अमेरिकी हमलों के बीच बढ़ते तनाव को रेखांकित किया। फारसी समाचार वेबसाइट खबर ऑनलाइन ने इसे 'बेसाबेका' (अभूतपूर्व) बताया, जबकि इंडोनेशियाई न्यूज एजेंसी अंतरा ने तीन भारतीय नाविकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। ब्राजील के वालोर इकोनॉमिको ने भी इस घटना को कवर करते हुए अमेरिकी कार्रवाइयों पर सवाल उठाए। विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि यह मुद्दा केवल भारत-अमेरिका तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा से जुड़ा है।\n\nभारत ने अमेरिकी दूतावास से तत्काल हमले रोकने और इस तरह की घटनाओं की जांच की मांग की है। भारतीय नौवहन मंत्री ने कहा कि अब तक तीन भारतीय तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा चुका है। नई दिल्ली खाड़ी क्षेत्र में अपने हजारों नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है, जो दुनिया के सबसे अस्थिर समुद्री गलियारों में से एक में काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव आ सकता है, हालांकि दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं। आने वाले दिनों में भारत संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भी यह मुद्दा उठा सकता है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
India has taken an unusually strong diplomatic stance, summoning the US charge d'affaires for the second time in three days to protest deadly attacks on Indian-crewed vessels. The government describes the US military strikes as 'unacceptable' and warns that they undermine maritime safety. New Delhi's repeated summons signals growing frustration and a determination to protect its citizens in the region.
Iranian media highlight India's unprecedented protest against US attacks on commercial vessels, framing it as a sign of Washington's reckless conduct in the region. The coverage emphasizes that three Indian sailors have been killed, and that New Delhi's ire is directed squarely at US aggression. This narrative aligns with Iran's own condemnation of US military actions and positions India as a victim of American overreach.
India summoned the US deputy chief of mission for the second time in three days to protest US military strikes on commercial vessels off Oman. The latest protest follows an attack that killed three Indian sailors. The report notes that New Delhi has expressed its displeasure over the strikes, but does not editorialize further.
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