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होर्मुज़ नाकाबंदी: तेल 100 डॉलर के पार, ईरान-अमेरिका वार्ता विफल

वार्ता टूटने के बाद ट्रम्प ने सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी का ऐलान किया, जिससे तेल 104 डॉलर तक पहुंच गया और वैश्विक बाजार लुढ़क गए।

अर्थव्यवस्था30 स्रोत5 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 10:23

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे की मैराथन वार्ता के बाद भी अमेरिका और ईरान परमाणु मुद्दे पर सहमति नहीं बना सके, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दे दिया। हालांकि ट्रम्प ने शुरू में पूरे होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने की धमकी दी थी, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि केवल ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाज रोके जाएंगे, जबकि गैर-ईरानी मार्गों का पारगमन जारी रहेगा। ईरान के सशस्त्र बलों ने इसे “समुद्री डकैती का कृत्य” बताया और चेतावनी दी कि कोई भी सैन्य जहाज जलडमरूमध्य के पास आया तो उसे “गंभीर अंजाम” भुगतने होंगे। लॉयड्स लिस्ट के अनुसार, घोषणा के तुरंत बाद होर्मुज़ में जहाजों का आवागमन पूरी तरह रुक गया।

इस घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा बाजार हिल गए। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 104 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया—दोनों में करीब 7-9% की उछाल दर्ज हुई। यूरोपीय गैस की कीमतें 18% तक चढ़ गईं। जर्मनी का डैक्स 1.35% गिरकर 23,533 पर आ गया, जबकि मिलान का एफटीएसई एमआईबी 0.79% टूटा। एशियाई बाजार भी लाल निशान में रहे। विश्लेषकों ने चेताया कि यह संकट सिर्फ कीमतों का झटका नहीं, बल्कि संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के लिए खतरा है—राजनीतिक वैज्ञानिक रॉबर्ट पेप ने आगाह किया कि 10 दिनों के भीतर “महत्वपूर्ण वस्तुओं” की कमी शुरू हो सकती है। मलेशिया जैसे देश, जिनके छह टैंकर 60 लाख बैरल तेल लेकर रास्ते में हैं, ऊर्जा आपातकाल की ओर बढ़ रहे हैं।

कूटनीतिक मोर्चे पर, अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों के बीच मतभेद उभरे। ब्रिटेन ने हालांकि माइनस्वीपर भेजने की पेशकश की, लेकिन पूर्ण नाकाबंदी से खुद को अलग रखा। पेरिस में होर्मुज़ की सुरक्षा पर एक शिखर बैठक बुलाई गई है, जिसमें समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के उपायों पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, ट्रम्प ने चीन को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बीजिंग ने ईरान को हथियार भेजे तो 50% का आयात शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज़ की पूर्ण नाकाबंदी चीन को सीधे संघर्ष में घसीट सकती है, क्योंकि उसका लगभग आधा तेल इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

इस बीच, हंगरी में विपक्षी नेता पीटर मग्यार की भारी जीत से फोरिंट चार साल के शिखर पर पहुंच गया, जिसने यूरोपीय राजनीतिक परिदृश्य में राहत पहुंचाई। लेकिन वैश्विक ध्यान होर्मुज़ पर टिका है। ट्रम्प ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “हम जलडमरूमध्य को साफ करेंगे” और ईरान को फिर से परमाणु बम बनाने का मौका नहीं देंगे। विशेषज्ञों का आकलन है कि यह नाकाबंदी दबाव की रणनीति है, लेकिन ईरान अपनी हूती सहयोगियों के जरिए बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को भी बाधित कर सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार के लिए दोहरा खतरा पैदा हो जाएगा। अभी दो सप्ताह का युद्धविराम लागू है, पर यह नाज़ुक है—ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान बातचीत में नहीं लौटा तो “सब ठीक है”, जबकि इजरायली टैंकों ने लेबनान में इतालवी शांति सैनिकों के वाहन को टक्कर मारी। ऐसे में यह संकट गहराने की पूरी संभावना है।

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