व्यायाम की विविधता और सही समय जीवन बढ़ा सकते हैं: नए शोध
केवल कितना व्यायाम करें नहीं, बल्कि कैसे और कब करें—यह भी दीर्घायु तय करता है। कई अध्ययन बता रहे हैं कि व्यायाम की विविधता, नियमितता और जैविक घड़ी से तालमेल मृत्यु जोखिम को 19% तक घटा सकता है।

सिर्फ़ चलते रहना ही काफ़ी नहीं—अगर आपका व्यायाम एक ही तरह का बना रहे, तो आप लंबी उम्र के बड़े फ़ायदों से चूक सकते हैं। बीएमजे मेडिसिन में प्रकाशित एक ताज़ा अध्ययन के अनुसार, जो लोग पैदल चलने, शक्ति प्रशिक्षण, तैराकी, योग और रैकेट खेलों जैसी कई गतिविधियाँ करते हैं, उनमें सभी कारणों से मृत्यु का ख़तरा लगभग 19 से 20 प्रतिशत तक कम पाया गया। 30 साल तक 1.7 लाख से अधिक लोगों पर नज़र रखने वाली इस ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर साबित किया कि व्यायाम की विविधता का अपना अलग प्रभाव होता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के ऑर्थोपीडिक सर्जन डॉ. जेम्स वूस, जो इस अध्ययन से नहीं जुड़े थे, इसे “बेहद महत्वपूर्ण” मानते हैं और कहते हैं कि इतने बड़े आँकड़े आदतों पर दोबारा सोचने को मजबूर करते हैं।
इस बीच ब्रिटेन और पाकिस्तान के शोधकर्ताओं ने ओपन हार्ट जर्नल में एक और अहम पहलू सामने रखा: अपनी जैविक घड़ी यानी क्रोनोटाइप के अनुसार व्यायाम का समय तय करना हृदय रोग के जोखिम को काफ़ी हद तक कम कर सकता है। 40 से 60 साल के 150 प्रतिभागियों पर किए गए इस परीक्षण में पाया गया कि जिन लोगों का व्यायाम समय उनकी प्राकृतिक सक्रियता की प्रवृत्ति (चाहे वे सुबह जल्दी उठने वाले ‘मॉर्निंग पर्सन’ हों या देर रात तक जागने वाले ‘नाइट आउल’) से मेल खाता था, उनके स्वास्थ्य संकेतकों में दूसरों की तुलना में अधिक सुधार हुआ। यह शोध इस धारणा को तोड़ता है कि हर किसी के लिए एक जैसा वर्कआउट शेड्यूल कारगर होगा।
व्यायाम को लेकर जड़ जमा चुकी एक बड़ी मिथ्या भी अब टूट रही है। दशकों से “10,000 क़दम” का नारा बुलंद रहा, लेकिन एक अन्य अध्ययन बताता है कि बड़ी उम्र की महिलाएँ हफ़्ते में सिर्फ़ एक-दो बार 4,000 क़दम चलकर भी अकाल मृत्यु के जोखिम को एक चौथाई तक घटा सकती हैं। असल मायने क़दमों की कुल मात्रा रखती है, उनकी आवृत्ति नहीं। इसी तरह फ़्रांसीसी अख़बार ल ताँ ने विशेषज्ञों के हवाले से ज़ोर दिया कि “बेहतर बुढ़ापे के लिए कोई आदर्श व्यायाम नहीं है, महत्वपूर्ण है नियमितता।” 2,000 साल पहले हिप्पोक्रेट्स का कहा गया “चलना सबसे अच्छी दवा है” आज भी उतना ही सच है, क्योंकि व्यायाम मृत्यु दर का सबसे शक्तिशाली भविष्यवक्ता बना हुआ है और मांसपेशियों की क्षति, हृदय-श्वसन गिरावट तथा ऑस्टियोपोरोसिस से लड़ने का सर्वोत्तम उपाय है।
इन सब नतीज़ों को एक साथ रखें तो तस्वीर स्पष्ट होती है: दीर्घायु के लिए व्यायाम का ‘कितना’ से कहीं ज़्यादा मायने रखता है ‘कैसे’ और ‘कब’। विविधता, व्यक्तिगत जैविक लय का सम्मान, और नियमितता—ये तीनों मिलकर उस पारंपरिक सलाह को बदल रहे हैं जो केवल समय या कैलोरी खर्च पर केंद्रित थी।
भविष्य की राह अब वैयक्तिकृत एक्सरसाइज़ प्रिस्क्रिप्शन की ओर जाती दिखती है। जहाँ पहनने योग्य उपकरण और जीनोमिक प्रोफ़ाइलिंग स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बन रहे हैं, वहाँ व्यायाम योजनाएँ भी व्यक्ति की जैविक घड़ी, आयु, क्षमता और पसंद के अनुसार ढल सकती हैं। इस बदलाव का सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा—दुनिया भर में डॉक्टर अब केवल “ज़्यादा चलो” न कहकर “अलग-अलग तरह से, अपने टाइम पर और लगातार चलो” का सुझाव देने लगेंगे।
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