आर्टेमिस-2 अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्र अभियान के बाद साझा किए अविश्वसनीय अनुभव, कनाडाई गर्व सहित
दस दिन के चंद्र चक्कर के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी-कनाडाई दल ने पुनः प्रवेश की आग की लपटों, गगनचुंबी इमारत से कूदने जैसी अनुभूति और एक-दूसरे से आजीवन बंधन का वर्णन किया।

करीब एक सप्ताह पहले प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक उतरने वाले आर्टेमिस-2 मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों ने गुरुवार को ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने अनुभव साझा किए। सबसे आकर्षक वर्णन पुनः प्रवेश के क्षणों का रहा। पायलट विक्टर ग्लोवर ने बताया कि उन्हें लगा जैसे वे किसी गगनचुंबी इमारत से पीछे की ओर कूद रहे हों — यह पाँच सेकंड तक चला और ‘यह बेहद शानदार था।’ उन्होंने यह भी स्वीकार किया, ‘मुझे स्पष्ट था कि हम एक आग के गोले के भीतर थे।’ पूरे दल ने ओरायन अंतरिक्षयान की ऊष्मा ढाल के प्रदर्शन की जमकर सराहना की, जिससे भविष्य के चंद्र अवतरण के लिए नासा की महत्त्वाकांक्षाओं को मजबूती मिली।
इस मिशन ने कनाडाई गौरव की लहर भी दौड़ा दी। मिशन विशेषज्ञ जेरेमी हैन्सन, जो चंद्रमा की निचली कक्षा में जाने वाले पहले गैर-अमरीकी बने, ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि कनाडा ‘बड़े काम’ कर सकता है। उन्होंने अपनी यात्रा को संभव बनाने वाले अतीत और वर्तमान के ‘दूरदर्शियों’ को श्रेय देते हुए जोर देकर कहा, ‘यह इस बात पर रोशनी डालनी चाहिए कि हम एक देश के रूप में क्या करने में सक्षम हैं।’ रेडियो-कनाडा से बात करते हुए कमांडर रीड वाइजमैन ने चालक दल के बीच बने गहरे रिश्ते को रेखांकित किया: ‘हम मिशन की शुरुआत में दोस्त थे और अंत में सबसे अच्छे दोस्त बन गए।’ उन्होंने कहा कि अब ये चारों ‘जीवन भर के लिए बँध’ चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं में विविधता रही। जर्मन प्रेस ने उतरने के संवेदनात्मक पहलू को प्रमुखता दी, जबकि ऑस्ट्रेलियाई प्रसारक ने सैन डिएगो तट पर समुद्री बचाव टीम द्वारा हैच खोले जाने और ‘हम आपको पा गए’ जैसे जयघोष के नए फुटेज को केंद्र में रखा। अमेरिकी मीडिया ने तकनीकी सफलता और चंद्रमा के सुदूर भाग पर देखे गए ‘सबसे अनोखे दृश्य’ पर ध्यान केंद्रित किया — ग्लोवर ने सीबीएस को बताया कि उनका पसंदीदा क्षण दिन और रात के बीच की विभाजक रेखा ‘टर्मिनेटर’ को देखना था। इस दौरान ऑनलाइन चर्चा का विषय ऊष्मा ढाल की कुछ तस्वीरें भी रहीं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए, हालाँकि आधिकारिक बयानों में इसके शानदार प्रदर्शन की बात दोहराई गई।
पचास से अधिक वर्षों में पहली बार मनुष्यों को चंद्रमा के इतने करीब ले जाने वाला यह दस-दिवसीय अभियान पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी का रिकॉर्ड बनाकर लौटा। चालक दल ने विश्वास जताया कि इससे दो वर्षों के भीतर मानवयुक्त चंद्र अवतरण और अंततः एक चंद्र कॉलोनी की नींव रखने की योजना को बल मिलेगा। यह मिशन सहयोग और आकांक्षा की ऐसी मिसाल बन गया है जिसमें तकनीकी उपलब्धि के साथ राष्ट्रीय अस्मिता और वैश्विक प्रेरणा एक साथ झलकती है।
यह समाचार इन पर प्रकाशित हुआ
7 स्रोत · 3 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की