अग्नाशय कैंसर की नई दवा से उम्मीद: एक गोली ने मरीजों का जीवनकाल दोगुना बढ़ाया
प्रायोगिक दवा डाराक्सोनरासिब ने मेटास्टैटिक अग्नाशय कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के मुकाबले जीवित रहने की अवधि दोगुनी कर दी, जिसे मेडिकल जगत एक बड़ी सफलता मान रहा है।

अग्नाशय कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए अमेरिकी कंपनी रेवोल्यूशन मेडिसिंस ने एक प्रायोगिक गोली के तीसरे चरण के परीक्षण के उत्साहजनक नतीजे घोषित किए हैं। वैश्विक स्तर पर हुए RASolute 302 अध्ययन में पाया गया कि डाराक्सोनरासिब नामक यह दवा, जो रास-इनहिबिटर नामक नई श्रेणी की पहली दवा है, ने पहले से उपचार ले चुके मेटास्टैटिक एडीनोकार्सिनोमा डक्टल पैंक्रियाटिक (PDAC) के मरीजों में जीवित रहने की अवधि कीमोथेरेपी की तुलना में दोगुनी कर दी। [A1][A2] मरीजों को दिन में एक बार मुँह से दी जाने वाली इस गोली ने सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण और चिकित्सकीय रूप से सार्थक सुधार दर्ज कराए, जिससे अग्नाशय कैंसर के इलाज में दशकों की निराशा के बाद उम्मीद की एक नई लौ जगी है।
इतालवी समाचार पत्र ‘इल फातो क्वोटिडियानो’ के विभिन्न संस्करणों में एक ही चिकित्सा बुलेटिन के माध्यम से यह जानकारी प्रमुखता से प्रकाशित हुई। हालांकि इस अंक में अंतरराष्ट्रीय राजनीति, खेल और मनोरंजन की अलग-अलग सुर्खियाँ थीं, लेकिन मेडिकल पेज पर यही एक खबर साझा थी। [A3][A4][A5][A6][A7] कैलिफोर्निया स्थित कंपनी ने बताया कि यह अध्ययन रास निर्भर नियोप्लाज्म के खिलाफ विकसित की जा रही कई दवाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। डाराक्सोनरासिब सीधे उस जीन म्यूटेशन को लक्ष्य करता है जो अग्नाशय कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे यह पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में कहीं अधिक सटीक और कम विषाक्त इलाज साबित हो सकता है।
वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में अग्नाशय कैंसर सबसे घातक ट्यूमर में से एक है, जिसका पाँच साल तक जीवित रहने का अनुपात बहुत कम है। मेटास्टैटिक अवस्था में तो उपचार के विकल्प बेहद सीमित हो जाते हैं। ऐसे में रास-इनहिबिटर की यह सफलता केवल अग्नाशय ही नहीं, बल्कि फेफड़े और बृहदान्त्र जैसे अन्य रास-निर्भर कैंसरों के लिए भी एक मॉडल स्थापित कर सकती है। [A8][A9] हालाँकि अभी दवा की कीमत, व्यापक उपलब्धता और दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर विस्तृत डेटा का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक नतीजों ने विशेषज्ञों को इस दिशा में तेजी से काम करने के लिए प्रेरित किया है।
आने वाले महीनों में नियामक मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है, और यदि सब कुछ ठीक रहा, तो दुनिया भर के मरीजों को एक सुविधाजनक मौखिक उपचार मिल सकता है जो जीवन को न केवल लंबा बल्कि बेहतर बनाए। [A10] हर साल अग्नाशय कैंसर के लाखों नए मामले सामने आते हैं, लिहाजा यह वैज्ञानिक उपलब्धि कैंसर देखभाल के मानचित्र पर एक स्थायी छाप छोड़ सकती है। हालाँकि विशेषज्ञ सावधान आशावाद की सलाह देते हैं, मगर इस खोज ने यह जरूर साबित कर दिया है कि परिशुद्ध चिकित्सा के जरिये सबसे चुनौतीपूर्ण कैंसर को भी मात देने का सपना अब हकीकत के बहुत करीब है।
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