हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक तनाव चरम पर, अमेरिका-ईरान युद्ध का नया दौर
असफल शांति वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी शुरू की, चीन ने हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी, ब्रिटेन ने समर्थन से इनकार किया और तेल की कीमतों में उथल-पुथल मची हुई है।

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली मैराथन वार्ता बिना समझौते के टूटने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी का आदेश दिया। [A9][A21] अमेरिकी नौसेना ने तुरंत सभी आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लगा दी, और ट्रंप ने धमकी दी कि कोई भी ईरानी हमलावर नौका पास आई तो उसे "तुरंत खत्म" कर दिया जाएगा। [A11][A16] यह कदम ऐसे समय उठा जब ईरान पहले ही अधिकांश विदेशी यातायात के लिए इस जलमार्ग को बंद कर चुका था, जिससे प्रतिदिन जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 100-120 से घटकर मात्र 3-4 रह गई थी। [A15][A21]
यूरोप की ओर से ब्रिटेन ने सबसे स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी नाकाबंदी का समर्थन करने से इनकार करते हुए 40 राष्ट्रों का गठबंधन बनाकर जलमार्ग को पुनः खोलने की पहल की। [A4] विशेषज्ञों के अनुसार यह नाकाबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून के नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकती है, जबकि ट्रंप द्वारा तटस्थ जहाजों को भी निशाना बनाने की धमकी ने अमेरिका को "समुद्री डाकू राष्ट्र" बनाने का जोखिम पैदा कर दिया है। [A7][A18]
एशियाई शक्तियों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। चीन के रक्षा मंत्री ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी कि वह चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे और कहा कि चीन ईरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा समझौतों का सम्मान करता रहेगा। [A13] भारत में तेल कीमतें गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, क्योंकि नई वार्ता की संभावना बनी हुई है। [A14] वहीं, पाकिस्तान ने युद्धविराम की समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्षों को पुनः वार्ता की मेज पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज़ कर दिए हैं। [A9]
ईरान ने इस नाकाबंदी को "समुद्री डकैती" करार दिया और चेतावनी दी कि उसकी तेज़ हमलावर नौकाएं अभी भी चुनौती पेश कर सकती हैं। [A8][A17] इसी बीच, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य ("आंसुओं का द्वार") को भी बंद करने की आशंका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए दोहरा संकट खड़ा कर दिया है। [A20] विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज जितना अधिक समय बंद रहेगा, अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक-राजनीतिक दबाव उतना बढ़ेगा, जिससे ईरान की सौदेबाज़ी की स्थिति मज़बूत होगी। [A2] वैश्विक अर्थव्यवस्था अब हॉर्मुज की नाकाबंदी पर टिकी हुई है, और एक गलत कदम दुनिया को गहरे संकट में धकेल सकता है। [A15]
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