मार्क कार्नी को संसदीय बहुमत, उपचुनावों की हैट्रिक से सरकार के लिए आसान होगा कानून पारित करना
लिबरल पार्टी ने सोमवार को हुए तीन संघीय उपचुनावों में जीत हासिल कर बहुमत सुनिश्चित कर लिया है, जिससे प्रधानमंत्री अब विपक्ष के सहयोग के बिना विधेयक पारित करा सकेंगे।

सोमवार की रात जैसे ही टोरंटो के दो राइडिंग्स—यूनिवर्सिटी-रोज़डेल और स्कारबरो-साउथवेस्ट—के नतीजे आए, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल सरकार सात वर्षों के अल्पमत के दौर को पीछे छोड़ते हुए बहुमत के पायदान पर पहुँच गई। यूनिवर्सिटी-रोज़डेल में डॉ. डेनियल मार्टिन ने लगभग 65 प्रतिशत मतों से जीत दर्ज की, जो एनडीपी की सेराना पर्डी के 20 प्रतिशत से कहीं आगे रही। इस जीत के साथ, और पिछले सप्ताह कंज़र्वेटिव सांसद मर्लिन ग्लाडु के लिबरल पाले में आने से, हाउस ऑफ़ कॉमन्स में पार्टी के सदस्यों की संख्या 174 हो गई—जो बहुमत के लिए ज़रूरी 172 के आँकड़े से दो अधिक है।
पिछले सात साल अल्पमत की राजनीति की जकड़न में बीते हैं। 2019 और 2021 में जस्टिन ट्रूडो को न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के साथ आपूर्ति-और-विश्वास समझौता करना पड़ा था, जिसके बदले एनडीपी नेता जगमीत सिंह ने बाल-देखभाल, दंत-चिकित्सा और फ़ार्माकेयर जैसी नीतियों पर भारी रियायतें लीं। लेकिन कार्नी का अल्पमत उस ढर्रे से अलग रहा—शुरू से ही उन्होंने ऐसे शासन किया जैसे बहुमत पहले ही मिल गया हो, और अब यह सांख्यिकीय वास्तविकता बन चुकी है।
कनाडा के अंग्रेज़ी और फ़्रेंच मीडिया ने इस राजनीतिक बदलाव को अलग-अलग लेकिन पूरक नज़रिए से देखा। रेडियो-कनाडा ने इसे “उदारवादियों की हैट्रिक” कहा और बताया कि विपक्षी दलों के कुल 169 सदस्यों के मुकाबले अब सरकार का पलड़ा भारी है। नेशनल पोस्ट ने सवाल उठाया, “अब आगे क्या?” और इस बात पर ज़ोर दिया कि कार्नी जल्द ही अपने बहुमत का इस्तेमाल एक स्पष्ट विधायी योजना को अमल में लाने के लिए करेंगे। वहीं ब्रिटेन की द गार्डियन ने इस घटनाक्रम को “बँटी हुई भू-राजनीतिक दुनिया” के संदर्भ में रखा, यह रेखांकित करते हुए कि कार्नी के लिए यह बहुमत वैश्विक मोर्चे पर मज़बूती से बात करने का ज़रिया बनेगा। क्यूबेक की टेरबोन सीट पर हुई उपचुनावी जीत से यह बहुमत और भी सुदृढ़ हो सकता है, जहाँ ब्लॉक क्यूबेकॉइस से कड़ी टक्कर के बावजूद लिबरल उम्मीदवार आगे चल रहे थे।
कार्नी के लिए यह संख्या केवल प्रतीकात्मक नहीं है। 2029 तक संभावित कार्यकाल और स्वतंत्र रूप से क़ानून पारित करने की क्षमता से अब वे अपने चुनावी वादों—पर्यावरणीय नियमों से लेकर कर सुधारों तक—को बिना किसी राजनीतिक सौदेबाज़ी के आगे बढ़ा सकते हैं। फिर भी, पतले बहुमत का मतलब है कि किसी भी आकस्मिक अनुपस्थिति या आंतरिक मतभेद से सरकार की योजनाएँ पटरी से उतर सकती हैं। नेशनल पोस्ट के विश्लेषण की मानें तो लिबरल पार्टी के लिए यह अगले कुछ सप्ताह नीतिगत बारीकियाँ तय करने और विपक्ष के हमलों से बचने की सधी हुई रणनीति के होंगे।
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