होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी: अमेरिका-ईरान वार्ता टूटी, तेल आपूर्ति पर वैश्विक संकट
पाकिस्तान में 21 घंटे की मैराथन वार्ता के नाकाम होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी लागू की, जिससे पहले से अवरुद्ध तेल मार्ग पर दोहरा दबाव बना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हड़कंप मच गया।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच सप्ताहांत में चली 21 घंटे की गहन बातचीत [A9] बिना किसी समझौते के टूट गई। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर दी [A1]। यह क़दम ऐसे समय उठा जब ईरान पहले ही लगभग छह सप्ताह से इस रणनीतिक जलमार्ग को विदेशी यातायात के लिए बंद कर चुका था [A21]। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि नाकेबंदी के दायरे में आने वाले किसी भी ईरानी जहाज़ को “तत्काल समाप्त” कर दिया जाएगा [A16], हालांकि अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल ईरानी बंदरगाहों तक सीमित रहेगा और अन्य जहाज़ों की आवाजाही बाधित नहीं होगी [A7]। इसके बावजूद जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या औसतन 100-120 से गिरकर मात्र 3-4 प्रतिदिन रह गई [A15], जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर दबाव बढ़ गया।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की प्रतिक्रियाओं ने इस क़दम के व्यापक भू-राजनीतिक निहितार्थ उजागर कर दिए। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने नाकेबंदी का समर्थन करने से इनकार कर दिया और 40 देशों का एक गठबंधन बनाकर जलडमरूमध्य को पुनः खोलने की मांग की [A4]। चीन ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि वह अपने ईरानी संबंधों और व्यापार प्रतिबद्धताओं में हस्तक्षेप न करे; रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि चीनी पोत क्षेत्र में आवाजाही जारी रखेंगे [A13][A19]। भारत सहित अन्य एशियाई देशों ने भी इस क़दम को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया [A5]। अंतरराष्ट्रीय क़ानून के विशेषज्ञों ने इस नाकेबंदी की वैधता पर गंभीर प्रश्न उठाए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता एक आधारभूत सिद्धांत है [A7]। ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” बताया और अपनी तेज़ हमलावर नौकाओं की क्षमता पर ज़ोर देते हुए संकेत दिया कि उसकी पराजित बताई जा रही सेना अभी भी चुनौती पेश कर सकती है [A8]।
आर्थिक मोर्चे पर, ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें पिछले सत्र में 4% उछलकर $100 के पार पहुँचने के बाद नई वार्ता की उम्मीदों के बीच मंगलवार को $97.50 पर आ गईं [A14]। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था होर्मुज पर टिकी है’ और नाकेबंदी से उत्पन्न दोहरा अवरोध—ईरान का नियंत्रण और अमेरिकी नाकेबंदी—वैश्विक व्यापार का गला घोंट सकता है [A15][A18]। साथ ही, यमन में ईरान-समर्थित हौथी विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को भी प्रभावित करने की आशंका पैदा हो गई है, जो होर्मुज के बंद रहने की स्थिति में एकमात्र वैकल्पिक रास्ता है [A20]।
कूटनीतिक मोर्चे पर, पाकिस्तान जल्द ही नई वार्ता कराने का प्रयास कर रहा है ताकि इस सप्ताह के भीतर दूसरा दौर आयोजित किया जा सके, शायद इस्लामाबाद या जिनेवा में [A9]। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ‘हर कीमत पर’ समझौता चाहता है [A12], जबकि ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी ‘उकसावे’ की निंदा जारी रखी [A17]। यदि कूटनीति विफल रही, तो चीन और अमेरिका के बीच सीधे संघर्ष का ख़तरा बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिका ने ईरान को ‘शुल्क’ देने वाले तटस्थ जहाज़ों को रोकने की धमकी दी है, जिससे समुद्री मार्ग पर संयुक्त रूप से गला घोंटने का एक अनायास गठबंधन बन गया है [A18]।
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