होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: अमेरिकी-ईरानी टकराव से कच्चे तेल में उथल-पुथल
शुक्रवार को खुलने के बाद हफ्ते भर में होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद हुआ। अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और ईरान के वार्ता से इनकार से कच्चा तेल 7% उछला। मंगलवार की युद्धविराम समयसीमा पर अनिश्चितता बनी है।

वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों ने सप्ताहांत में ऐतिहासिक उलटफेर देखा। शुक्रवार 17 अप्रैल को ईरान के विदेश मंत्री ने घोषणा की कि लेबनान युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य सभी वाणिज्यिक जहाज़ों के लिए खुला रहेगा। इस ख़बर से ब्रेंट क्रूड 9% से अधिक लुढ़क गया और वॉल स्ट्रीट ने रिकॉर्ड ऊँचाई छुई। लेकिन शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, जिसके बाद ईरान ने दो भारत-ध्वज वाले जहाज़ों पर गोलीबारी की और जलडमरूमध्य फिर बंद कर दिया। अगले ही दिन अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी पोत को जब्त कर लिया, जिससे ट्रंप का वह दावा ध्वस्त हो गया कि ईरान ने जलडमरूमध्य कभी बंद न करने का वादा किया था।
सोमवार सुबह एशियाई बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमतों ने तेज़ी पकड़ी। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 7.6% उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचा, और ब्रेंट 6.5% चढ़कर 96.30 डॉलर पर पहुँच गया। यूरोपीय गैस कीमतों में भी 11% तक की उछाल आई। यह वृद्धि केवल सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि राजनयिक गतिरोध से भी उपजी। ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अमेरिकी नाकाबंदी बनी रहेगी, वह युद्धविराम वार्ता में शामिल नहीं होगा, जबकि वर्तमान युद्धविराम समझौता मंगलवार को समाप्त हो रहा है। इससे आपूर्ति में लंबी बाधा की आशंका गहरा गई है।
क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भिन्नता साफ दिखी। जहाँ वैश्विक बेंचमार्क तेज़ी पर थे, वहीं संयुक्त अरब अमीरात का मर्बन क्रूड 9.8% गिरकर 91.70 डॉलर पर आ गया—यह विचलन बाज़ार के खंडित होने का संकेत है। रूसी विशेषज्ञों ने चेताया कि जहाज़ मालिक होर्मुज मार्ग पर लौटने में अत्यधिक सावधानी बरतेंगे, जिससे रसद जोखिम बना रहेगा। अमेरिकी और इज़राइली हमलों के बाद फरवरी के अंत से ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई की है, और यह ताज़ा घटनाक्रम उसी शृंखला का हिस्सा है।
बाज़ार पर नज़र रखने वालों को अब मंगलवार की समयसीमा से पहले किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं है। ट्रंप ने भले ही वार्ता फिर शुरू होने की बात कही हो, लेकिन ईरान के इनकार ने निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया है। जलडमरूमध्य से गुज़रने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति के पाँचवें हिस्से के अटक जाने से ऊर्जा बाज़ार लंबी अस्थिरता की चपेट में आ सकते हैं, विशेषकर तब जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हों।
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