जेफ बेजोस की ‘न्यू ग्लेन’ ने पहली बार इस्तेमालशुदा बूस्टर से उड़ान भरी, पर उपग्रह गलत कक्षा में पहुंचा
ब्लू ओरिजिन के भारी भरकम रॉकेट ने पुनः प्रयोज्यता का कीर्तिमान रचा, किंतु एएसटी स्पेसमोबाइल का संचार उपग्रह तय कक्षा से नीचे स्थापित हुआ; जांच जारी।

ब्लू ओरिजिन के तीसरे प्रक्षेपण में एक ओर तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन हुआ, दूसरी ओर एक बड़ी चूक ने मिशन पर सवाल खड़े कर दिए। रविवार को केप कैनावेरल से लगभग 100 मीटर ऊंची ‘न्यू ग्लेन’ पहली बार किसी पहले इस्तेमाल किए जा चुके बूस्टर के साथ रवाना हुई, जो प्रक्षेपण के बाद सफलतापूर्वक अटलांटिक महासागर में एक प्लेटफॉर्म पर उतरा। यह ब्लू ओरिजिन के लिए पुनः प्रयोज्यता की दौड़ में एक अहम छलांग थी, जिस पर स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने भी बधाई दी। मगर उड़ान का आनंद तब फीका पड़ गया जब ऊपरी चरण ने एएसटी स्पेसमोबाइल के ‘ब्लू बर्ड 7’ संचार उपग्रह को निर्धारित कक्षा के बजाय निचली कक्षा में छोड़ दिया, जिससे वह खो गया। कंपनी ने कहा कि गड़बड़ी की वजह स्पष्ट नहीं है और जांच की जा रही है।
इस मिले-जुले नतीजे को वैश्विक मीडिया ने अपने-अपने नजरिए से रेखांकित किया। जर्मन अखबारों ने सैटेलाइट के नुकसान और जांच को प्रमुखता दी, जबकि फ्रांसीसी-कनाडाई स्रोत ने पुनः प्रयोज्यता की सफलता और स्पेसएक्स से प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया। अरबी भाषा के मीडिया में भी विभाजन दिखा: लेबनान के अखबार ‘अन-नहर’ ने अपनी सुर्खी में पुनः उपयोग की उपलब्धि को रेखांकित किया और लागत घटाने की संभावना पर फोकस किया, जबकि स्काई न्यूज अरेबिया ने संतुलित विवरण देते हुए एएसटी स्पेसमोबाइल के उस बयान को उद्धृत किया जिसमें कहा गया कि उपग्रह अपेक्षित कक्षा से नीचे स्थापित हुआ। यह अंतर बताता है कि तकनीकी घटनाओं की कवरेज क्षेत्रीय संपादकीय प्राथमिकताओं से कैसे प्रभावित होती है — कोई केवल सफलता पर रोशनी डालता है तो कोई नाकामी के पहलुओं को उघाड़ता है।
ब्लू ओरिजिन के लिए यह मिशन कई मायनों में अहम था। ‘न्यू ग्लेन’ की यह तीसरी उड़ान थी; जनवरी 2025 में पहली बार अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद करीब दस महीने बाद इसने नासा के दो यान कक्षा में पहुंचाए थे। अब पुराने बूस्टर का सफल प्रक्षेपण और लैंडिंग कंपनी के लिए नियमित लॉन्च की राह खोल सकता है, लेकिन ऊपरी चरण की खराबी इस रफ्तार को प्रभावित करेगी। जांच के दायरे में यह देखा जाएगा कि बूस्टर के पुनः प्रयोग और इस चूक के बीच कोई तकनीकी संबंध तो नहीं।
आगे का रास्ता अब इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच कितनी जल्दी पूरी होती है। एलन मस्क की स्पेसएक्स फॉल्कन रॉकेटों की तरह ब्लू ओरिजिन भी तीव्र प्रक्षेपण चक्र और लागत में कटौती का लक्ष्य रखती है। यदि गड़बड़ी सामान्य हुई तो पुनः प्रयोज्यता का प्रदर्शन भविष्य के वाणिज्यिक अनुबंधों के लिए आधार बन सकता है। यह मिशन बताता है कि आधुनिक अंतरिक्ष दौड़ में प्रगति और असफलता का ऐसा मेल अब नियमित होता जा रहा है।
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