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युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इज़राइली ध्वंस, नियंत्रण मानचित्र जारी; फ्रांसीसी सैनिक की मौत

दस दिन की संघर्ष विराम के बाद भी इज़राइल ‘पूर्ण बल’ से लेबनानी गांवों को गिरा रहा है; एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत ने तनाव बढ़ाया, जबकि लेबनानी संप्रभुता का संकट गहराता जा रहा है।

भूराजनीति6 स्रोत3 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 08:07

दक्षिण लेबनान में युद्धविराम केवल कागज़ों पर है। रविवार को इज़राइली सेना ने पहली बार अपनी नई तैनाती रेखा का नक्शा प्रकाशित किया, जिससे पूर्व से पश्चिम तक दसियों गांव उसके कब्ज़े में आ गए और सीमा से 5-10 किलोमीटर भीतर तक नियंत्रण स्थापित हो गया। इसी दौरान, रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ के आदेश के तहत ‘पूर्ण बल’ का प्रयोग करते हुए इज़राइली सेना ने सीमावर्ती गांवों में घरों और ढांचों को व्यवस्थित ढंग से ढहाना जारी रखा। सरकारी मीडिया ने बताया कि दिब्बीने और स्रिफ़ा जैसे गांवों में लौटे निवासी अपने मलबे में तब्दील घरों को निहारते रहे, उम्मीद और भय के बीच झूलते हुए।

दस दिन पुराना यह विराम 18 अप्रैल को उस समय परीक्षा के कठघरे में आ गया जब दक्षिणी लेबनान में एक घात लगाकर किए गए हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक और एक आरक्षित इज़राइली सैनिक की मौत हो गई – एक इंजीनियरिंग वाहन हिज़्बुल्लाह द्वारा बिछाए गए बम से टकरा गया। विश्लेषकों ने इसे ईरान समर्थित समूह की ‘मानव ढाल’ रणनीति का ताज़ा सबूत बताया, जिसमें लड़ाके बुनियादी ढांचे और नागरिकों के बीच छुपकर लड़ते हैं। वहीं दहियेह के हय अल-सिल्लोम से आई आवाज़ों ने बताया कि बमबारी के बाद खुदाई मशीनें भी उलझी तारों में फंस जाती थीं – तबाही इतनी गहरी थी।

लेकिन लेबनानी धरातल पर यह महज़ एक सैन्य अभियान नहीं है। स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार यह 45 दिन की लड़ाई 2006 के 33-दिवसीय युद्ध की स्वाभाविक निरंतरता है, अंतर यह कि जो तब पूरा न हो सका, उसे इज़राइल आज बलपूर्वक साध रहा है। वह युद्धविराम की आड़ में गांवों को ढहाकर, सड़कों को ध्वस्त करके भौगोलिकता दोबारा रच रहा है। लेबनानी सेना चुप खड़ी है, जिससे संप्रभुता का मूल प्रश्न और तीखा हो उठा है – कौन देश की बाहरी ख़तरों से रक्षा करेगा? इज़राइली ड्रोन अब आसमान से लगातार निगरानी रखते हैं, यह बिना पैदल सैनिकों का कब्ज़ा है, जिसे ‘अवैध सैन्य पोस्टों’ से संचालित किया जा रहा है जो ब्लू लाइन के लेबनानी तरफ बना लिए गए हैं।

राजनीतिक स्तर पर यह तबाही व्यापक अमेरिका-ईरान वार्ता के साए में हो रही है। इज़राइल और लेबनान के बीच 14 अप्रैल को पहली सीधी बातचीत के बाद जो युद्धविराम हुआ, वह उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। अब लेबनान संघर्ष विराम को 10-20 दिन और बढ़ाकर एक माह करना चाहता है, ताकि वार्ता दल गठित कर अमेरिका में बातचीत की तैयारी की जा सके। अमेरिकी राजदूत बेरूत में राष्ट्रपतियों से मिल रहे हैं, जबकि इज़राइल का ‘गाजा मॉडल’ यहाँ लागू करने का आभास गहराता जा रहा है।

अंततः, यह क्षण केवल ध्वस्त इमारतों और मानचित्रों का नहीं, बल्कि एक ऐसे चक्र का है जिसमें बफ़र ज़ोन से परे जाकर इज़राइल दक्षिणी लेबनान की अस्मिता को फिर से परिभाषित कर रहा है। युद्ध विराम की अस्थिरता, ड्रोनों की गूंज और कूटनीतिक हलचल यह बताती है कि जब तक सुरक्षा की इज़राइली चिंताओं और लेबनान की संप्रभुता के बीच कोई साझा राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, यह संघर्ष नए रूपों में जारी रहेगा।

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Sky News Arabia
Al-Monitor Iran Pulse
Le Devoir
Fox News
Al-Modon
The Public Source