अमेरिकी नौसेना ने ईरानी 'शैडो फ्लीट' के जहाज को अरब सागर में रोका, बंदरगाहों की नाकेबंदी तेज
सेन्टकॉम ने ईरानी तेल-गैस निर्यात पर लगी पाबंदियों को लागू करते हुए एम/वी सेवान को वापस ईरान भेजा; अब तक 37 जहाजों को रोका जा चुका है।

अमेरिकी केन्द्रीय कमान (CENTCOM) ने शनिवार को पुष्टि की कि उसकी नौसेना ने ईरान के 'शैडो फ्लीट' का एक और व्यावसायिक जहाज अरब सागर में रोक लिया। मिसाइल विध्वंसक यूएसएस पिंकनी से उड़े हेलीकॉप्टर ने एम/वी सेवान को घेर लिया, जिसे अमेरिकी सैन्य निर्देश पर अब एस्कॉर्ट के साथ ईरान वापस भेजा जा रहा है। यह कार्रवाई उन 19 जहाजों पर केन्द्रित थी जिन पर अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने एक दिन पहले प्रतिबंध लगाए थे। वॉयस ऑफ अमेरिका फारसी के अनुसार, सेवान इन्हीं में से एक था, जो अरबों डॉलर के ऊर्जा उत्पादों—प्रोपेन और ब्यूटेन समेत—का परिवहन कर रहा था। [A1]
अमेरिकी मीडिया के अनुसार यह रोक 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' का हिस्सा है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन तेहरान पर शांति समझौते के लिए आर्थिक दबाव बना रहा है। न्यूज़वीक ने बताया कि बंदरगाहों की नाकेबंदी को और कड़ा किया जा रहा है, और अमेरिकी बल पूरी तरह पाबंदियों का अनुपालन सुनिश्चित कर रहे हैं। [A3] रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स ने इस मामले को व्यापक संदर्भ देते हुए खुलासा किया कि नाकेबंदी की शुरुआत से अब तक अमेरिकी नौसेना ईरान से जुड़े 37 व्यावसायिक जहाजों को रोक चुकी है, और उन्हें वापस मोड़ा जा चुका है। [A2] यह आँकड़ा किसी अन्य स्रोत में उपलब्ध नहीं था, जो रूसी परिप्रेक्ष्य की विशिष्टता को दर्शाता है।
अरबी भाषा के मीडिया ने इस घटना को ईरान के 'असतूल अल-ज़िल' (शैडो फ्लीट) पर सीधे प्रहार के रूप में देखा। सीएनएन अरबी ने सेन्टकॉम के बयान के हवाले से बताया कि सेवान पर पहले से प्रतिबंध थे और यह विदेशी बाज़ारों में ईरानी तेल-गैस पहुँचाने की गतिविधियों में लिप्त था। [A4] लेबनान के अन-नहर अख़बार ने भी इसी बात पर ज़ोर दिया कि यह जहाज उन्नीस में से एक था और अमेरिकी खज़ाने ने इसे अरबों डॉलर के ग़ैरकानूनी निर्यात के लिए चिह्नित किया था। [A5] दोनों अरबी स्रोतों ने एक ही ट्वीट को उद्धृत किया, जो क्षेत्रीय मीडिया में इस ऑपरेशन की एक समान समझ को दर्शाता है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिकी नाकेबंदी अब केवल घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि हर गुज़रते सप्ताह के साथ सख्त हो रही है। ईरान का शैडो फ्लीट—जो प्रतिबंधों को दरकिनार करने का प्राथमिक ज़रिया रहा है—तेज़ी से निशाने पर है। अगर यही रफ़्तार जारी रही, तो तेहरान के तेल निर्यात राजस्व में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे परमाणु वार्ता के लिए दबाव और बढ़ेगा। साथ ही, रूसी और अरबी मीडिया का अलग-अलग ज़ोर यह रेखांकित करता है कि इस समुद्री टकराव को वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा के चश्मे से भी देखा जा रहा है।
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