ईरान युद्ध से बंद हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य: कपड़े और कंडोम दोनों के दाम बढ़े
तेल आपूर्ति में व्यवधान से पॉलिएस्टर-रबर उद्योग संकट में; भारत से रूस तक उपभोक्ताओं पर असर, ज़ारा-एचएंडएम के कपड़े और ड्यूरेक्स कंडोम महंगे होने की आशंका।

पश्चिम एशिया में युद्ध और उसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक साथ कई मोर्चों पर झटका दिया है। रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही ठप होने से पॉलिएस्टर और सिंथेटिक रबर जैसे तेल-व्युत्पन्न कच्चे माल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। चीनी आपूर्तिकर्ताओं ने पहले ही दाम बढ़ा दिए हैं, जिसका असर भारत और बांग्लादेश की परिधान इकाइयों से लेकर मलेशिया के कंडोम कारखानों तक दिख रहा है।
फास्ट फैशन की दिग्गज कंपनियां ज़ारा और एचएंडएम जल्द ही इसकी चपेट में आ सकती हैं। पॉलिएस्टर दुनिया के कुल फाइबर उत्पादन का 59 प्रतिशत हिस्सा है और ड्रेस से लेकर एथलीजर वियर तक में इस्तेमाल होता है। होर्मुज बंद होने के बाद चीनी स्रोतों से आपूर्ति महँगी होने से भारतीय पॉलिएस्टर यार्न उत्पादक पेट्रोलियम डेरिवेटिव के लिए लगभग 30 प्रतिशत अधिक कीमत चुका रहे हैं। इससे पूरी कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है और खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका प्रबल हो गई है।
दूसरी ओर, मलेशिया में रबर उद्योग भी संकट में है। दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनी कारेक्स, जो ट्रोजन और ड्यूरेक्स जैसे ब्रांडों की आपूर्ति करती है, ने उत्पादन और परिवहन लागत में 25-30 प्रतिशत की वृद्धि की बात कहते हुए कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं। वहीं, सिंथेटिक रबर के दस्ताने बनाने वाली शीर्ष वैश्विक कंपनी टॉप ग्लव के अनुसार मुख्य कच्चे माल की लागत दोगुनी हो चुकी है। दोनों ही मामलों में निर्भरता पेट्रोलियम से बने कच्चे माल पर है, जिसकी आपूर्ति ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद किए जाने के बाद बुरी तरह बाधित हुई है।
रूस में इसका सीधा असर उपभोक्ता की जेब पर पड़ रहा है। वर्ष की पहली तिमाही में रूसी दवा दुकानों में कंडोम के प्रति पैक की औसत कीमत सालाना आधार पर 13.2 प्रतिशत बढ़कर 477 रूबल हो गई, जबकि गैर-विशिष्ट खुदरा में अप्रैल के मध्य तक यह 450 से उछलकर 530 रूबल तक पहुँच गई। ड्यूरेक्स रूसी बाजार में मूल्य के हिसाब से 39.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, कॉन्टेक्स 38.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर। कारेक्स के सीईओ गो मिया कियाट ने साफ कहा कि आने वाले महीनों में बढ़ी हुई लागत का बोझ पूरी तरह उपभोक्ताओं पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
यह पूरा प्रकरण दर्शाता है कि एक भू-राजनीतिक केंद्र बिंदु कितनी तेजी से फैशन और गर्भनिरोधक जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को एक साथ प्रभावित कर सकता है। आपूर्ति का संकट जारी रहने पर एशियाई और यूरोपीय उपभोक्ताओं को लंबी अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा। रूस में तो कंडोम की वास्तविक बिक्री पहले ही स्थिर हो चुकी है—2025 में महज 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई—जिससे संकेत मिलता है कि कीमतों के प्रति संवेदनशील बाजार में मांग दब सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जलडमरूमध्य खुलता नहीं, कच्चे माल की यह महँगाई वैश्विक महँगाई में एक नया मोड़ जोड़ती रहेगी।
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