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ट्रंप ने ईरान की पेशकश ठुकराई, नाकाबंदी बरकरार रखने की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की पेशकश खारिज करते हुए नाकाबंदी जारी रखने का ऐलान किया, बोले- 'भरवां सूअर की तरह दम घुट रहा है।'

भूराजनीति6 स्रोत3 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 07:31

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी गतिरोध को और कड़ा करते हुए कहा कि जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस समझौता नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। एक साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान की उस पेशकश को खारिज कर दिया, जिसमें पहले नाकाबंदी हटाने और जलडमरूमध्य खोलने, फिर बाद में परमाणु वार्ता की बात कही गई थी। ट्रंप ने तीखी भाषा में कहा, "नाकाबंदी बमबारी से कुछ अधिक प्रभावी है। वे भरवां सूअर की तरह दम घुटते हुए हैं। और उनके लिए हालात और बदतर होंगे। वे परमाणु हथियार नहीं रख सकते।"

इस दो महीने से चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी रणनीति स्पष्ट हो गई है कि आर्थिक दबाव को सैन्य हमले से अधिक कारगर माना जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि नाकाबंदी के चलते ईरान का तेल भंडारण और पाइपलाइनें "लगभग फटने की कगार पर" हैं, क्योंकि देश कच्चा तेल निर्यात कर पाने में असमर्थ है। व्हाइट हाउस का कहना है कि इस नाकेबंदी ने अमेरिका को तेहरान के खिलाफ "अधिकतम प्रभाव" दिलाया है। ईरान द्वारा वार्ता के लिए की गई पहल को यह कहकर ठुकरा देना कि पहले परमाणु मुद्दे का समाधान जरूरी है, इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन बिना शर्त कोई रियायत देने को तैयार नहीं है।

अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की मीडिया ने इस खबर को अपने-अपने नजरिए से प्रस्तुत किया। भारतीय मीडिया, विशेषकर मिंट और इंडिया टुडे, ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है। दूसरी ओर, स्पैनिश भाषी पत्रकारिता, जैसे एल फिनानसिएरो और ला गैसेटा, ने "अधिकतम दबाव" की नीति और ईरानी अर्थव्यवस्था के "दम घुटने" वाली भाषा को रेखांकित किया, जो मानवीय और आर्थिक विपत्ति की ओर भी इशारा करती है। इन विविध दृष्टिकोणों से यह स्पष्ट होता है कि संघर्ष का क्षेत्रीय आकलन इस बात पर निर्भर करता है कि देश ऊर्जा आयातक है या भू-राजनीतिक शक्ति के तौर पर इसे देखता है।

आगे का रास्ता धुंधला दिख रहा है। ट्रंप का रुख ऐसा है कि जब तक ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं से पीछे नहीं हटता, नाकाबंदी और अधिक सख्त हो सकती है, जिससे तेहरान के सामने आंतरिक दबाव बढ़ेगा। दूसरी तरफ, होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन करीब दो करोड़ बैरल तेल गुजरता है, और लंबे समय तक नाकाबंदी से वैश्विक महंगाई और ऊर्जा की कमी का खतरा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में कोई मध्यस्थता का प्रयास हो सकता है, लेकिन अभी वाशिंगटन 'सैन्य से अधिक कारगर' नाकाबंदी के हथियार पर ही भरोसा कर रहा है।

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