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हंगरी में ओरबान का अंत, माग्यार की जीत से पूरे यूरोप में हलचल

16 साल के बाद विक्टर ओरबान चुनाव हार गए, पूर्व सहयोगी पीटर माग्यार ने दो-तिहाई बहुमत से जीत दर्ज की। यूरोपीय संघ खुश, लेकिन नई सरकार की नीतियों पर सवाल।

भूराजनीति15 स्रोत4 भाषाएँ2 मिनट पढ़नाअपडेट 10:09

हंगरी के मतदाताओं ने एक युग का अंत कर दिया। 16 वर्षों तक लगातार सत्ता में रहने वाले विक्टर ओरबान की पार्टी फ़िदेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि उनके ही पूर्व सहयोगी पीटर माग्यार की तिसा पार्टी ने संसद की 199 में से करीब 138 सीटों पर कब्ज़ा कर लिया [A3][A10]। हैरान करने वाली बात यह रही कि मतगणना शुरू होने के ढाई घंटे के भीतर ही ओरबान ने हार स्वीकार ली और माग्यार को बधाई दे दी – इस कदम ने उन तमाम पश्चिमी आलोचकों को चुप करा दिया जो उन्हें तानाशाह कहते थे [A11]।

हंगरी में बदलाव की भूख साफ झलकी। माग्यार ने भ्रष्टाचार, आर्थिक तंगी और रूस समर्थक झुकाव को मुद्दा बनाकर जनता का गुस्सा वोटों में बदला [A4]। उन्होंने कहा, “अगर व्लादिमीर पुतिन का फ़ोन आया तो मैं उठाऊंगा, लेकिन मैं उनसे कहूंगा कि कृपया चार साल बाद हत्याएं रोकें और यह युद्ध ख़त्म करें।” [A7] साथ ही उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ाव, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और ‘राष्ट्रीय सहयोग प्रणाली’ को ख़त्म करने का वादा किया [A10][A12]। हालांकि, रूसी तेल-गैस पर निर्भरता बनाए रखने के संकेतों ने ब्रसेल्स की खुशी पर पानी फेर दिया है [A9]।

यूरोपीय प्रेस में इस जीत को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। इटली के ला स्टैम्पा ने इसे ‘संप्रभुतावाद का पतन’ और ट्रम्प की आक्रामकता का प्रतीक बताया [A1]। स्पेन के एल पाइस और एल मुंडो ने स्पष्ट किया कि ओरबान की हार से वोक्स पार्टी का वैचारिक, वित्तीय और सामरिक सहारा छिन गया है [A5][A15]। वहीं जर्मनी के एनज़ेडज़ेड ने माग्यार की जीत को लोकतंत्र की जीवटता का सबूत बताया, लेकिन आगाह किया कि ओरबान का सिस्टम अभी भी गहरी जड़ें जमाए बैठा है [A11][A16]।

आगे की राह चुनौतीपूर्ण है। माग्यार ने 5 मई तक सत्ता संभालने की इच्छा जताई है और राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की मांग की है, जिन्हें वे ओरबान का ‘कठपुतली’ मानते हैं [A12][A14]। हंगरी के लोकतंत्र की बहाली, भ्रष्टाचार उन्मूलन और यूक्रेन को सहायता का रास्ता साफ करना उनकी प्राथमिकता होगी [A8]। लेकिन क्या वे ओरबान द्वारा बुनी गई मीडिया, न्यायपालिका और कारोबारी हितों की जाल को तोड़ पाएंगे? यह सवाल पूरे यूरोप में गूंज रहा है, खासकर तब जब माग्यार की कुछ नीतियां पुरानी सरकार जैसी ही लगती हैं [A9][A16]। फिलहाल, हंगरी ने जो संदेश दिया है, वह स्पष्ट है: इलिबरल लोकतंत्र का सबसे मजबूत गढ़ ढह चुका है, और इसके दूरगामी नतीजे पूरे महाद्वीप पर दिखेंगे [A6][A10]।

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La Stampa
Il Fatto Quotidiano
La Vanguardia
Crikey
El País
Time
The New York Times
National Post