हॉर्मुज की सैन्य नाकेबंदी, परमाणु डील पर गतिरोध: अमेरिका-ईरान जंग के बीच नई वार्ता की उम्मीद
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाज़त न देने की लाल रेखा दोहराई, जबकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के पहले ही दिन चीनी टैंकर ने रुकावट पार कर ली।

ईरान के साथ इस्लामाबाद में 21 घंटे चली शांति वार्ता के नाकाम होने के बाद अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सैन्य नाकेबंदी लागू कर दी है, और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन ईरान को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देगा। [A1] वेंस ने फॉक्स न्यूज से कहा कि ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपना होगा और सत्यापन की सख्त शर्तें माननी होंगी। [A1][A14] यह नाकेबंदी सोमवार से प्रभावी है, जिसके तहत अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोक रही है। [A2][A4]
दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम ही सबसे बड़ी बाधा बना रहा। अमेरिका ने 20 वर्षीय यूरेनियम संवर्धन स्थगन की मांग रखी, जबकि ईरान ने अधिकतम पांच वर्ष का प्रस्ताव दिया—जिसे ट्रंप प्रशासन ने ठुकरा दिया। [A14][A28] विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज की नाकेबंदी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा; ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गईं, फिर नई वार्ता की उम्मीद से नीचे आईं। [A24][A31] खाद्य संकट की चेतावनी भी सामने आई है, क्योंकि सामान्य दिनों में यहां से प्रतिदिन 100-120 जहाज गुजरते हैं, जो अब घटकर मात्र तीन-चार रह गए हैं। [A5][A31]
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि ब्रिटेन नाकेबंदी का समर्थन नहीं करेगा और 40 देशों को साथ लेकर इसे खुलवाने के लिए दबाव बनाएगा। [A7] वहीं चीन ने कड़ी चेतावनी दी कि वह ईरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा करारों का सम्मान करेगा और अमेरिका को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। [A22] नाकेबंदी के बावजूद एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर ‘रिच स्टार्री’ हॉर्मुज पार करने में सफल रहा, जिसे अमेरिकी दबाव को चुनौती के रूप में देखा गया। [A4][A12][A23] चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से मुलाकात में मध्य पूर्व शांति के लिए चार सूत्रीय योजना पेश की। [A29][A38]
राजनीतिक मोर्चे पर, पाकिस्तान तेज़ी से नए दौर की वार्ता कराने में जुटा है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच इसी सप्ताह, संभवतः बृहस्पतिवार को, फिर से आमने-सामने बैठक हो सकती है। [A15][A16] हालाँकि, ट्रंप और पोप लियो चौदहवें के बीच ईरान नीति और आव्रजन को लेकर तीखी बयानबाजी ने माहौल को और जटिल बना दिया है। [A6] विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की नाकेबंदी रणनीति सहयोगियों को जंग में घसीटने का दबाव भी हो सकती है, जबकि चीन की सक्रियता बीजिंग को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश कर रही है। [A9][A35]
संकट के दीर्घकालिक प्रभाव पहले ही दिखने लगे हैं: चीन के मार्च निर्यात में भारी गिरावट और आयात में 27.8% की उछाल ने आपूर्ति शृंखला की नाज़ुकता को उजागर किया है। [A30][A39] हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को भी निशाना बनाए जाने की आशंका से वैकल्पिक मार्गों पर भी खतरा मंडरा रहा है। [A37] फिलहाल, सभी की निगाहें संभावित इस्लामाबाद दूसरे दौर पर हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि नाकेबंदी जारी है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनों को तेज़ किए हुए है।
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