हंगरी में ओर्बान का पतन और यूरोप में लोकलुभावनवाद का भविष्य
हंगरी के संसदीय चुनावों में पीटर मग्यार ने विक्टर ओर्बान को शिकस्त देकर 16 साल के शासन का अंत किया, जिससे यूरोप में दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद को गहरा झटका लगा है।

हंगरी के संसदीय चुनावों में रविवार को पूर्व सहयोगी पीटर मग्यार के नेतृत्व वाली तिस्ज़ा पार्टी ने विक्टर ओर्बान की फ़िदेस पार्टी को करारी शिकस्त दी। लगभग 54 प्रतिशत मतों के साथ मग्यार को दो-तिहाई बहुमत मिला, जबकि ओर्बान को 38 प्रतिशत वोट मिले और उन्होंने तुरंत हार स्वीकार कर ली। 16 वर्षों के लगातार शासन के बाद यह परिणाम न केवल हंगरी बल्कि पूरे यूरोप में लोकलुभावनवाद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
इतालवी और स्पेनी मीडिया इस घटनाक्रम को दक्षिणपंथी संप्रभुतावादी (सोवरेनिस्ट) आंदोलन के पतन के रूप में देख रहे हैं। ला स्टाम्पा ने लिखा कि ओर्बान की हार और ट्रंप द्वारा पोप के प्रति आक्रामकता का संयोग प्रतीकात्मक है, जो दिखाता है कि "ईश्वर, देश और परिवार" के नारे पर चलने वाली मागा संस्कृति अपना असली चेहरा दिखा रही है। वहीं स्पेन के एल पाइस और एल मुंडो ने बताया कि इस हार से वोक्स पार्टी को तिहरा झटका लगा है—वित्तीय, रणनीतिक और भविष्य का—क्योंकि ओर्बान उसके वैचारिक और आर्थिक संरक्षक थे। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की बहन एरियाना मेलोनी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हंगरी में स्वतंत्र चुनाव हुए और राष्ट्रपति ने हार मान ली, जिससे वामपंथियों का "तानाशाही" का आख्यान गलत साबित हुआ।
जर्मन और अंग्रेजी मीडिया ने लोकतंत्र और यूरोपीय संघ के संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया। एनजेडजेड ने टिप्पणी की कि ओर्बान का तुरंत झुक जाना इस बात का सबूत है कि लोकतंत्र उतना मृत नहीं है जितना पश्चिमी आलोचक दावा करते थे। वहीं बीबीसी और टाइम पत्रिका ने मग्यार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। मग्यार ने कहा कि अगर पुतिन फोन करते हैं तो वह बात करेंगे और युद्ध रोकने को कहेंगे, लेकिन खुद फोन नहीं लगाएंगे। इल फातो कोटिडियानो ने चेतावनी दी कि मग्यार का रूसी तेल और गैस पर रुख ओर्बान जैसा ही है और यूक्रेन के प्रति कोई भी खुलापन यूरोपीय संघ के खर्चे पर होगा। हालांकि, टाइम ने जलवायु कार्रवाई के लिए नई उम्मीद जताई, क्योंकि ओर्बान ने यूरोपीय संघ के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को "यूटोपियन कल्पना" कहा था।
हंगरी के भीतर मग्यार के सामने भ्रष्टाचार खत्म करने, कानून का राज स्थापित करने और ओर्बान की 'राष्ट्रीय सहयोग प्रणाली' (एनईआर) को ध्वस्त करने की चुनौती है। ला वानगार्दिया के अनुसार, मग्यार ने 5 मई तक पदभार ग्रहण करने का लक्ष्य रखा है और राज्य की गंदगी साफ करने का वादा किया है। बीबीसी और इंडिया टुडे ने उन्हें ओर्बान का पूर्व सहयोगी बताया, जिसने भ्रष्टाचार, आर्थिक तनाव और रूस-समर्थक झुकाव के प्रति जनता के गुस्से को भुनाया। एनजेडजेड पॉडकास्ट ने चेताया कि चुनाव जीतना आसान है, पर ओर्बान की गहरी जड़ें जमाए प्रणाली को खत्म करना कहीं अधिक कठिन होगा। आने वाले महीने बताएंगे कि क्या मग्यार सचमुच एक नए युग की शुरुआत कर पाते हैं या यूरोपीय संघ के उत्साह को झटका लगता है।
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