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236 ड्रोनों का हमला, अमेरिकी यू-टर्न और युद्ध का बदलता चेहरा

रूस ने यूक्रेन पर 236 ड्रोन से हमला कर चेर्नीगोव में किशोर की जान ली; यूक्रेन ने तुआप्से और टैगानरोग में जवाबी हमला किया। अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध स्थगित कर दिए, ज़ेलेंस्की ने इसकी आलोचना की। महिला पायलटों की नई ड्रोन इकाई युद्ध की तस्वीर बदल रही है।

भूराजनीति4 स्रोत3 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 08:07

19 अप्रैल की रात यूक्रेन पर रूस के 236 ड्रोनों की बौछार हुई, जिनमें से 203 को यूक्रेनी वायु सेना ने बेअसर कर दिया। इसके बावजूद 32 ड्रोन 18 स्थानों पर हिट हुए, और 8 स्थानों पर मलबा गिरा [A1]। चेर्नीगोव में एक 16 वर्षीय किशोर की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए, स्कूल-लिसेयुम और एक चिकित्सा संस्थान को भारी नुकसान पहुँचा [A1]। उधर, रूसी क्षेत्र पर भी यूक्रेन ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। क्रास्नोदार क्षेत्र के तुआप्से बंदरगाह पर हमले में एक व्यक्ति की मौत, एक घायल, और गैस पाइप के साथ स्कूल-चर्च की इमारतों को क्षति हुई [A2]। रोस्तोव के टैगानरोग में मिसाइल हमले ने ड्रोन निर्माता कंपनी “एटलांट एयरो” के गोदामों में आग लगा दी, जहाँ “मोलनिया” और “ओरियन” जैसे यूएवी का डिज़ाइन और उत्पादन होता था; तीन लोग ज़ख़्मी हुए [A3]।

इस दोहरे ड्रोन युद्ध के बीच, अमेरिका ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए रूसी तेल पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को अनिश्चितकाल तक स्थगित कर दिया। ज़ेलेंस्की ने इस फ़ैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस को करीब 14 अरब डॉलर की अतिरिक्त तेल बिक्री का लाभ मिलेगा, जिससे युद्ध अभियानों को ही ईंधन मिलेगा [A5]। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतिगत उथल-पुथल यूक्रेन के लिए नया झटका है।

दूसरी तरफ़, युद्ध का स्वरूप गहरे सामाजिक बदलाव की भी इबारत लिख रहा है। ड्रोन प्रौद्योगिकी ने पारंपरिक शारीरिक क्षमता के अंतर को मिटाते हुए महिला सैनिकों के लिए मोर्चे के दरवाज़े खोल दिए हैं। यूक्रेन ने “हार्पीज़” नामक एक अखिल-महिला ड्रोन इकाई बनाई है, जिसकी पायलटें गुलाबी रंग के हमलावर “वैम्पायर” ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं [A6]। 24 वर्षीय ओसोका, जिन्होंने मित्रों को युद्ध में खोने के बाद सेना ज्वाइन की, कहती हैं कि ड्रोन उड़ाने में लिंग का कोई अंतर नहीं पड़ता—उनकी गेमिंग की आदत इसमें मददगार साबित हो रही है [A4]। मनोविज्ञान की पढ़ाई छोड़ सेना में आईं 24 वर्षीय माफ़्का ने बिना माता-पिता को बताए भर्ती ली, उनका कहना है कि “मेरी ज़िंदगी का फ़ैसला मैं ख़ुद करती हूँ” [A6]।

ये घटनाक्रम दिखाते हैं कि इस संघर्ष में आम नागरिकों की पीड़ा बढ़ती जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति अवसरवादिता का शिकार हो रही है। ड्रोन ने एक ओर हमलों की सटीकता बढ़ाई है, तो दूसरी ओर सेना में सामाजिक-लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ा है। अमेरिकी नीति की अनिश्चितता और निरंतर जारी हमलों के बीच, यूक्रेन की लड़ाई अपने चौथे वर्ष में किसी स्पष्ट समाधान की ओर नहीं बढ़ती दिखती।

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The Sydney Morning Herald
The Mainichi Shimbun
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