पेरू चुनाव: सांचेज़ और फुजीमोरी के बीच कांटे की टक्कर, प्रवासी वोट होंगे निर्णायक
रॉबर्टो सांचेज़ को केइको फुजीमोरी पर 20,000 से भी कम वोटों की बढ़त, 95% से अधिक मतगणना के बाद भी अनिश्चितता; विदेशी और विवादित मतपत्र भविष्य तय करेंगे।

पेरू के राष्ट्रपति चुनाव की दूसरी दौर की मतगणना ने देश को सांसत में डाल दिया है – वामपंथी उम्मीदवार रॉबर्टो सांचेज़ और दक्षिणपंथी केइको फुजीमोरी के बीच मुकाबला इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक बन गया है। 95.68% से 95.96% तक मतपत्रों की गिनती के बाद [A5][A11], सांचेज़ को लगभग 19,000 से 26,000 वोटों की मामूली बढ़त हासिल है [A2][A10]। हालांकि, अभी भी विदेशों में रहने वाले पेरूवियों के लगभग 10 लाख पंजीकृत मतदाताओं के वोटों की गिनती बाकी है, जो कुल मतदाताओं का 4.4% हैं [A13]। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती रुझानों में फुजीमोरी ने शहरी क्षेत्रों से बढ़त बनाई थी, लेकिन ग्रामीण इलाकों और अंदरूनी प्रांतों की गिनती ने सांचेज़ को आगे कर दिया [A9]।
विभिन्न क्षेत्रीय स्रोतों के अनुसार, यह मुकाबला अब दो खास वोट बैंकों पर टिका है: प्रवासी मतदाता और विवादित मतपत्र। लैटिन अमेरिकी मीडिया [A1][A15] और स्पेनिश समाचार पत्रों [A12] ने बताया कि अमेरिका (मुख्यतः मियामी) और स्पेन (मैड्रिड) में बड़ी संख्या में पंजीकृत पेरूवियन मतदाता फुजीमोरी के पक्ष में झुक सकते हैं, जो चुनाव का रुख पलट सकता है। साथ ही, 1,500 से अधिक मतपत्रिकाएं (एक्टास) ऐसी हैं जिन पर औपचारिक आपत्तियां हैं और जिनका फैसला चुनावी अदालतों द्वारा होना बाकी है [A6][A5]। इनमें करीब 450,000 वोट दर्ज हैं [A14]। कंसल्टेंसी इप्सोस ने चेतावनी दी है कि लीमा और विदेशों के बाकी वोट फुजीमोरी को वापसी का मौका दे सकते हैं [A15]।
ब्राजील और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया [A7][A9][A11] ने इस उतार-चढ़ाव भरी गिनती पर विस्तार से रिपोर्ट किया: शुरुआत में फुजीमोरी 2 लाख वोटों से आगे थीं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की गिनती बढ़ने पर सांचेज़ ने बढ़त बना ली और एक समय अंतर महज 330 वोट रह गया [A7]। अब धीमी गिनती के बीच सांचेज़ की बढ़त घट रही है [A11]। इटली के एक अखबार [A13] ने भी इस चुनाव को एक ऐसे मोड़ पर बताया है जहां विदेशी वोटों की भूमिका निर्णायक होगी।
इन सबके बीच, दोनों प्रत्याशियों ने देश में सहमति बनाने की जरूरत पर बल दिया है [A4]। सांचेज़ ने भ्रष्टाचार और गरीबी को सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए सभी दलों तक हाथ बढ़ाने की बात कही है, जबकि फुजीमोरी ने भी मिलकर काम करने का वादा किया है [A4]। फिर भी, विशेषज्ञों को भय है कि इतनी कड़ी टक्कर और कानूनी पेचीदगियों के बाद परिणाम की स्वीकार्यता चुनौतीपूर्ण हो सकती है। पिछले एक दशक में पेरू में आठ राष्ट्रपति बदले हैं [A5], और यह चुनाव उसी राजनीतिक अस्थिरता की निरंतरता को दर्शाता है। अब देश की निगाहें उन अंतिम मतपत्रों पर हैं जो पहाड़ी और अमेजन क्षेत्रों से आने हैं [A12], और साथ ही उन चुनावी विवादों पर भी जो एक नाजुक जनादेश को और उलझा सकते हैं।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
पेरू के राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर बहुत ही नज़दीकी है, वामपंथी रॉबर्टो सांचेज़ दक्षिणपंथी कीको फ़ुजीमोरी से बहुत मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। अंतिम नतीजा अब विदेश के वोटों और विवादित मतदान केंद्र रिकॉर्ड पर टिका है, जिससे अनिश्चितता और ध्रुवीकरण का माहौल बना हुआ है।
पेरू की मतगणना में बेहद कड़ा मुकाबला दिख रहा है, 95% वोटों की गिनती के बाद दोनों उम्मीदवारों के बीच एक प्रतिशत से भी कम का अंतर है। विश्लेषक बता रहे हैं कि निर्णायक वोट विदेश और सुदूर इलाकों से आ रहे हैं, जो प्रक्रिया की धीमी गति और कमज़ोरी को रेखांकित करता है, जबकि देश एक ऐसे नतीजे की प्रतीक्षा कर रहा है जिस पर विवाद हो सकता है।
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