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शी जिनपिंग की सात साल बाद प्योंगयांग यात्रा: चीन-उत्तर कोरिया संबंधों का नया अध्याय

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से मुलाकात कर आर्थिक सहयोग और रणनीतिक समन्वय को मजबूत करने पर सहमति जताई, जबकि परमाणु मुद्दे पर चुप्पी रही और क्षेत्रीय शक्तियों की चिंताएं बढ़ीं।

भूराजनीति22 स्रोत10 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 20:26

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में जोरदार स्वागत हुआ, जब वे सात वर्षों में पहली बार वहां पहुंचे। किम जोंग-उन ने लाल कालीन, सैन्य परेड और भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मेहमान का इस्तकबाल किया। यह यात्रा महज़ एक प्रोटोकॉल भेंट नहीं थी; यह दोनों देशों के बीच उस रणनीतिक साझेदारी को फिर से मज़बूत करने का अवसर बनी, जो हाल के वर्षों में रूस के साथ प्योंगयांग की बढ़ती नज़दीकियों के कारण कुछ कमज़ोर पड़ गई थी।

बैठक के दौरान दोनों नेता आर्थिक सहयोग बढ़ाने, उच्च-स्तरीय बैठकों को नियमित करने और एक-दूसरे की संप्रभुता व सुरक्षा का बचाव करने पर सहमत हुए। उत्तर कोरियाई मीडिया ने इसे ‘द्विपक्षीय संबंधों का नया ऐतिहासिक चरण’ बताया। हालांकि, जर्मन अखबार फ्रैंकफुर्टर ऑल्गेमाइने (FAZ) और फ्रांसीसी ल फिगारो के विश्लेषण के अनुसार, शी ने परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी, जो एक स्पष्ट संकेत है कि अब चीन उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को एक स्वीकृत वास्तविकता के रूप में देखता है। न्यूज़वीक ने रिपोर्ट किया कि शी ने व्यापार बढ़ाने का वादा किया, जो किम के लिए बड़ी जीत है क्योंकि उनका शासन आर्थिक रूप से अलग-थलग है।

जापान और दक्षिण कोरिया में इस मुलाकात को लेकर बेचैनी साफ झलकी। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव ने कहा कि सरकार ‘गंभीर रुचि’ के साथ सूचनाएं जुटा रही है, विशेषकर इस संभावना को लेकर कि अब चीन-उत्तर कोरिया सैन्य सहयोग रूस-उत्तर कोरिया गठबंधन की तरह जापान के लिए सुरक्षा खतरा बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया, जो हाल ही में चीन के साथ आर्थिक संबंधों को सुधारने में लगा है, इसे एक मध्यम शक्ति की जोखिम प्रबंधन रणनीति के रूप में देखता है, न कि वाशिंगटन से अलग होने के इरादे के रूप में।

रूसी विशेषज्ञ और कुछ बीबीसी विश्लेषण इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यह यात्रा पुतिन के प्रभाव को कम करने का चीनी प्रयास थी, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस को गोला-बारूद और सैन्य श्रम उपलब्ध कराया था। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्योंगयांग अब दो बड़ी ताकतों के बीच संतुलन बनाकर अपनी सौदेबाजी की स्थिति मज़बूत कर रहा है। शी की यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आर्थिक निर्भरता के कारण चीन की भूमिका अपरिहार्य है, भले ही रणनीतिक निकटता के लिए किम पुतिन की ओर देखें। इस मुलाकात ने क्षेत्र में एक नई भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण की नींव रख दी है, जहां परमाणु स्थिति पर वैश्विक चुप्पी छाई रहेगी।

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यह यात्रा एक भव्य तमाशा थी, जो वैभव और देशभक्ति गीतों से भरी थी, फिर भी दोनों नेताओं ने जानबूझकर परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई जिक्र नहीं किया। शी जिनपिंग चुप रहे और किम जोंग उन का आत्मविश्वास बढ़ता गया, जो प्योंगयांग पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के कमजोर पड़ने को रेखांकित करता है। यूरोपीय टिप्पणीकार इसे किम के लिए एक रणनीतिक जीत और चीन की व्यावहारिकता का प्रमाण मानते हैं जो परमाणु अप्रसार की अनदेखी करती।

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शी जिनपिंग और किम जोंग उन की बैठक ने दो मित्र राष्ट्रों के बीच रणनीतिक सहयोग का एक नया अध्याय खोला, और संप्रभुता तथा क्षेत्रीय शांति के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। शत्रुतापूर्ण अंतर्राष्ट्रीय माहौल में, इस शिखर वार्ता ने बीजिंग-प्योंगयांग धुरी की ताकत प्रदर्शित की। ईरानी विवरण इस घटना को साम्राज्यवाद-विरोधी एकजुटता की जीत और पश्चिमी हस्तक्षेप के खिलाफ व्यावहारिक गठबंधन के रूप में चित्रित करता है।

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शी और किम की शिखर वार्ता ने दुनिया के सबसे भयावह गठबंधन को मुहर लगा दी, दो परमाणु-शक्ति संपन्न देशों को ऐसे समझौते में एकजुट किया जो वाशिंगटन से मास्को तक वैश्विक व्यवस्था को हिला सकता है। अधिक समझ की चीनी खुशी, नए परमाणु प्रसार और सैन्य समन्वय की धुरी पर चिंता को कम नहीं कर पाती। क्षेत्र के कई लोगों के लिए, यह अमेरिकी वर्चस्व को सीधी चुनौती और महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता में खतरनाक वृद्धि है।

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शी जिनपिंग की यात्रा ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में चीन की अपरिहार्य भूमिका की पुष्टि की और दिखाया कि उत्तर कोरिया, बीजिंग के आर्थिक समर्थन के बिना नहीं रह सकता। शिखर सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण आम राय बनी, जिसने प्योंगयांग के भविष्य के लिए आवश्यक भागीदार के रूप में चीन की स्थिति मजबूत कर दी। चीनी विश्लेषक इस बात पर जोर देते हैं कि बीजिंग की कूटनीतिक भागीदारी एक स्थिरता-प्रदायक ताकत है जो प्रायद्वीप को अराजकता में गिरने से रोकती है।

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22 स्रोत · 10 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की

Le Figaro9 जून, 16:07
Hamshahri Online9 जून, 14:56
France 249 जून, 14:31
El Cronista9 जून, 17:20
The Mainichi Shimbun9 जून, 14:33
BBC News Russian9 जून, 14:33
Radio Farda9 जून, 14:34
Iran International9 जून, 14:31