Edition of 06:00 CETSunday, 14 June 2026
287 स्रोत · 16 भाषाएँआज 0 ब्रीफिंग
Tuesday, 9 June 2026 · Edition of 20:00 CET

लिहान्ना हत्याकांड के बाद फ्रांस में बाल अपराधों पर सख्ती: सीरियल रेपिस्टों को आजीवन कारावास का प्रस्ताव

11 वर्षीय लिहान्ना की हत्या से उपजे जनाक्रोश के बीच प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने बच्चों से जुड़े अपराधों की जांच तीन महीने में पूरी करने और सिलसिलेवार बलात्कारियों को उम्रकैद की सज़ा देने का सुझाव दिया।

कानून एवं नियमन10 स्रोत4 भाषाएँ2 मिनट पढ़नाअपडेट 20:25

फ़्रांसीसी सरकार ने लिहान्ना हत्याकांड के बाद न्याय व्यवस्था में बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू ने मंगलवार को पाँच मंत्रियों के साथ 90 मिनट की बैठक के बाद घोषणा की कि सिलसिलेवार बलात्कारियों के लिए अधिकतम सज़ा 20 साल से बढ़ाकर आजीवन कारावास की जाएगी। साथ ही, बच्चों के ख़िलाफ़ अपराधों में सभी जाँच कार्रवाइयाँ अधिकतम तीन महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। यह कदम उस व्यवस्थागत जड़ता की सीधी प्रतिक्रिया है, जिसने 41 वर्षीय संदिग्ध जेरोम बी. के ख़िलाफ़ पूर्व की कई शिकायतों को बिना नतीजे के बंद कर दिया था।

पूरे फ्रांस में इस मामले ने भारी आक्रोश जगाया है। 11 साल की लिहान्ना का शव दक्षिण-पश्चिमी जेर विभाग में खोजा गया था, जिसके बाद 200 से अधिक शहरों में 60,000 से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतर आए। मुख्य संदिग्ध के ख़िलाफ़ अगस्त 2025 में दर्ज एक शिकायत पर तेज़ी से कार्रवाई नहीं हुई थी—न तो उससे पूछताछ की गई, न ही उसे गिरफ़्तार किया गया। इटालियन और फ्रांसीसी मीडिया में इस लापरवाही को “न्याय की विफलता” करार दिया गया है, जिसने पीडोक्रिमिनैलिटी के ख़िलाफ़ लड़ाई में सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।

इसी बीच, सेनेट की एक सुनवाई में न्याय मंत्री जेराल्ड डारमानिन और गृह मंत्री लोरां नूनेज़ ने स्वीकार किया कि उनके पास संदिग्ध के बारे में “सभी तत्व” मौजूद थे, फिर भी वे कार्रवाई करने में नाकाम रहे। सुनवाई की सहसा आयोजित हुई गंभीरता बताती है कि यह प्रकरण सार्वजनिक बहस के केंद्र में किस कदर आ गया है। वहीं, एक और पीड़िता की माँ ने राज्य के ख़िलाफ़ गंभीर लापरवाही का दावा करते हुए मुकदमा दायर करने की घोषणा की है—उनकी नाबालिग बेटी ने भी उसी व्यक्ति पर यौन हिंसा का आरोप लगाया था, जिसे अब लिहान्ना की हत्या का मुख्य आरोपी माना जा रहा है।

सरकार की इन घोषणाओं के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सज़ा बढ़ाने और समय-सीमा तय करने से व्यवस्थागत समस्या हल नहीं होगी। न्यायपालिका के लिए संसाधनों की कमी, अल्प-अभियोजन और लैंगिक हिंसा के मामलों में संवेदनशीलता का अभाव बड़ी बाधाएँ बनी हुई हैं। अगले कुछ हफ़्तों में जब यह विधेयक संसद में पेश होगा, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि कड़ी सज़ाओं का राजनीतिक संकेत जनता के भरोसे को बहाल कर पाता है या केवल एक अस्थायी राहत साबित होता है।

एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa europea continentaleStampa latinoamericana · mercatoStampa atlantica / anglosfera · sicurezza
Stampa europea continentaleindignazioneurgenzaallarme

फ्रांस 11 वर्षीय लियाना की हत्या के बाद गुस्से में है, जिसने बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में न्यायिक विफलताओं को उजागर किया है। 60,000 प्रदर्शनकारियों के दबाव में, सरकार सख्त सजा और आपातकालीन सुधारों का वादा कर रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह बहुत कम और बहुत देर से है।

Stampa latinoamericana/ mercatodistacco

एक 11 वर्षीय बच्ची की हत्या के बाद, फ्रांस में बच्चों के यौन शोषण के मामलों में न्यायिक सुस्ती के खिलाफ हजारों ने विरोध प्रदर्शन किया, अधिकारियों ने बताया।

Stampa atlantica / anglosfera/ sicurezzaallarmeurgenza

लियाना मामला फ्रांसीसी सरकार पर दबाव डालता है, उसे पहले से चिन्हित संदिग्ध द्वारा 11 साल की बच्ची की हत्या के विरोध में यौन हिंसा के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर करता है।

यह समाचार इन पर प्रकाशित हुआ

10 स्रोत · 4 भाषाएँ · 24 घंटे की खिड़की

Le Figaro9 जून, 14:31
France 249 जून, 14:31
Le Temps9 जून, 14:31
Open9 जून, 14:33
Süddeutsche Zeitung (SZ)9 जून, 17:18
AGI9 जून, 17:21
Il Post9 जून, 18:21
Adnkronos9 जून, 14:35