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होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के बीच चीनी टैंकर ने डटकर पार की जलडमरूमध्य, परमाणु गतिरोध पर नए सिरे से कूटनीतिक जोर

अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी शुरू कर दी, लेकिन एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर ने उसे लाँघ दिया। वार्ता में 20 बनाम 5 साल के यूरेनियम संवर्धन अंतराल पर गतिरोध है, जबकि पाकिस्तान दूसरे दौर की वार्ता कराने में जुटा है।

भूराजनीति30 स्रोत8 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 10:06

होर्मुज जलडमरूमध्य में सोमवार से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी लागू होते ही पहला बड़ा तनाव सामने आया जब वाशिंगटन द्वारा प्रतिबंधित चीनी तेल टैंकर रिच स्टारी ने बिना रुके मार्ग पार कर लिया। अमेरिकी केन्द्रीय कमान ने कहा था कि ईरानी बंदरगाहों से जाने या आने वाले किसी भी जहाज़ को रोका, तलाशा या मोड़ा जा सकता है, लेकिन लाइव ट्रैकिंग डेटा के अनुसार यह टैंकर ओमान की खाड़ी में दाखिल हो गया। चीन ने इस नाकेबंदी को “ख़तरनाक और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना” बताते हुए स्पष्ट किया कि वह ईरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा समझौतों का पालन करता रहेगा। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में इसे “संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन” करार दिया, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने तेहरान पर जलडमरूमध्य में जहाज़रानी को बाधित कर “आर्थिक आतंकवाद” फैलाने का आरोप लगाया।

इस गतिरोध की जड़ में इस्लामाबाद में सप्ताहांत में हुई वह मैराथन वार्ता है जो यूरेनियम संवर्धन पर रोक की अवधि को लेकर विफल हो गई। अमेरिका ने 20 साल का प्रतिबंध माँगा, जबकि ईरान ने अधिकतम 5 साल का प्रस्ताव रखा – और यही अंतर पूरे समझौते को पटरी से उतार गया। डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं रख सकता, और यही उनकी लाल रेखा है। दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि बातचीत अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में ही आगे बढ़ सकती है। वेंस ने स्वीकार किया कि बातचीत में “वास्तविक प्रगति” हुई, लेकिन अब गेंद ईरान के पाले में है।

नाकेबंदी के बावजूद कूटनीतिक हलचल तेज़ है। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में ही दूसरे दौर की सीधी वार्ता का प्रस्ताव रखा है, और सूत्रों के अनुसार वह अगले कुछ दिनों में बैठक कराने को प्रतिबद्ध है। मध्यस्थता में जिनीवा का भी नाम लिया जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि नाकेबंदी के बाद ईरान ने स्वयं संपर्क कर समझौता चाहा है, हालाँकि तेहरान ने सार्वजनिक रूप से कोई तत्परता नहीं दिखाई। दोनों पक्षों पर समय का दबाव है, क्योंकि मौजूदा युद्धविराम 21 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

वैश्विक प्रतिक्रिया में विभाजन साफ़ नज़र आ रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अबू धाबी के युवराज के साथ बैठक में मध्यपूर्व में शांति के लिए चार सूत्रीय योजना रखी, जिसमें संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर ज़ोर दिया गया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने नाकेबंदी को “नुकसानदेह” बताया, जबकि ऑस्ट्रेलिया फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक ऐसे सम्मेलन में शामिल हो रहा है जिसमें अमेरिका नहीं है – इसका मकसद युद्ध के बाद जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी बीच, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं और वैश्विक बाज़ारों में राहत की लहर दिखी, क्योंकि निवेशकों को दोबारा बातचीत की उम्मीद है।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि संकरी जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव बेहद जोखिम भरा है। ईरान के पास ज़मीन से मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा समुद्री सुरंगों के ज़रिए जहाज़रानी को ठप करने की क्षमता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का पाँचवाँ हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ट्रंप ने ईरानी तेज़ नौकाओं को नष्ट करने की धमकी भी दी है। फिलहाल हर पक्ष अपनी सैन्य और कूटनीतिक चालें चल रहा है, लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब 2015 के परमाणु समझौते की तर्ज़ पर कोई नया भरोसेमंद ढाँचा बन पाए – और इसके लिए यूरेनियम संवर्धन की अवधि को लेकर कोई बीच का रास्ता निकालना होगा।

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