ट्रंप का विचित्र वीकेंड: AI-जनित ईसा की छवि, पोप से टकराव और व्हाइट हाउस में मैकडॉनल्ड्स की डिलीवरी
राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को ईसा मसीह जैसा दिखाने वाली AI तस्वीर पोस्ट कर रूढ़िवादी ईसाइयों को नाराज़ किया, फिर पोप पर हमला बोला, और इसी बीच व्हाइट हाउस में डोरडैश से मैकडॉनल्ड्स मंगवाकर टैक्स-मुक्त टिप योजना का प्रचार किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया पर एक एआई-जनित तस्वीर साझा की, जिसमें वे दिव्य प्रकाश में नहाए एक बीमार व्यक्ति पर हाथ रखते दिख रहे थे—बिल्कुल ईसा मसीह की छवि की तरह। इस पर उनके अपने समर्थक आधार, खासकर इवेंजेलिकल ईसाइयों और कैथोलिक दक्षिणपंथियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी [A1][A9]। पूर्व तैराक और कंज़र्वेटिव कार्यकर्ता राइली गेन्स ने लिखा, “ईश्वर का मज़ाक नहीं उड़ाया जा सकता” [A2]। ट्रंप ने बाद में तस्वीर हटा दी और संवाददाताओं से कहा कि वह तो डॉक्टर के रूप में खुद को दिखाने वाली तस्वीर समझ रहे थे [A1][A9]। यह कोई पहला मौका नहीं था जब उन्होंने एआई इमेजरी से विवाद खड़ा किया—पहले भी वे पोप की वेशभूषा में और ओबामा दंपति को वानर के रूप में चित्रित करने वाली तस्वीरें पोस्ट कर चुके हैं [A1]।
इसी दौरान ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर अभूतपूर्व हमला बोलते हुए उन्हें “अपराध पर कमज़ोर” और “विदेश नीति में भयानक” बताया [A5][A7]। पोप लगातार युद्ध के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे, और ट्रंप का यह प्रहार तब आया जब अमेरिका ईरान के साथ तनाव के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी कर रहा था [A7][A8]। यूरोपीय मीडिया के अनुसार, पोप ने इस पर संयमित किंतु दृढ़ प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे “सुसमाचार की बात कर रहे हैं” और युद्ध के ख़िलाफ़ बोलते रहेंगे [A5]। स्पेन के एल पाइस ने विश्लेषण किया कि लियो चौदहवें, जिन्हें चुनाव के समय ट्रंप-विरोधी माना गया था, अब सामरिक धैर्य के साथ एक नैतिक प्रतिकार की भूमिका में उभरे हैं, जिससे धुर-दक्षिणपंथी नेताओं और मतदाताओं के सामने अस्तित्वगत दुविधा खड़ी हो गई है [A10]।
इस धार्मिक और कूटनीतिक तूफ़ान के बीच ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक विचित्र प्रचार कार्यक्रम आयोजित किया। डोरडैश डिलीवरी ड्राइवर शैरन सिमंस, जिन्हें “डोरडैश ग्रैंडमा” कहा जाता है, मैकडॉनल्ड्स के दो बैग लेकर ओवल ऑफ़िस पहुंचीं [A4][A6]। ट्रंप ने इस मौके का इस्तेमाल टिप पर कर हटाने की अपनी नीति को बढ़ावा देने के लिए किया और पत्रकारों से ईरान युद्ध पर भी सवाल लिए [A8]। जब उन्होंने सिमंस से पूछा कि क्या उन्होंने उन्हें वोट दिया था, तो जवाब मिला, “अम, शायद” [A4]। फ्रांसीसी अख़बार ल फ़िगारो ने इस पूरे प्रकरण को एक असाधारण दृश्य बताया, जो “वन बिग, ब्यूटीफुल बिल” के प्रचार का हिस्सा था [A6]।
स्रोतों के तुलनात्मक विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि अमेरिकी मीडिया ने इस घटनाक्रम को ट्रंप के आधार के भीतर बढ़ती बेचैनी और विचित्र राजनीतिक रंगमंच के रूप में देखा, जबकि यूरोपीय प्रेस ने पोप के साथ टकराव और कैथोलिक दक्षिणपंथ की नाराज़गी पर ज़ोर दिया [A9][A10]। भारतीय मीडिया ने इसे ईरान युद्ध के संदर्भ में रखते हुए सवाल उठाया कि क्यों ट्रंप अपने आपको मसीह रूप में पेश करते हुए दुनिया के आधे से अधिक ईसाइयों के आध्यात्मिक नेता से भिड़ रहे हैं [A7]। आगे देखें तो यह प्रकरण ट्रंप के धार्मिक रूढ़िवादियों के साथ संबंधों में दरार और एआई के राजनीतिक इस्तेमाल की बढ़ती जटिलताओं का संकेत देता है; पोप की नैतिक स्पष्टता आने वाले दिनों में अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक स्थायी प्रतिध्वनि बन सकती है।
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