हंगरी में ओरबान का अंत: पूर्व सहयोगी की ऐतिहासिक जीत से लोकतंत्र और यूरोपीय संबंधों को नई दिशा
16 साल बाद हंगरी में विक्टर ओरबान सत्ता से बाहर, पीटर माग्यार को दो-तिहाई बहुमत; यूरोपीय संघ, यूक्रेन और वैश्विक दक्षिणपंथी आंदोलनों के लिए बड़े बदलाव के संकेत।

हंगरी के लोकतंत्र ने एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए 16 साल के 'निर्वाचित तानाशाही' वाले शासन को उलट दिया। विक्टर ओरबान, जो कभी लोकलुभावन राष्ट्रवाद की प्रतिमूर्ति थे, ने महज ढाई घंटे में हार स्वीकार कर अपने पूर्व सहयोगी पीटर माग्यार को जीत की बधाई दे दी [A11]। यह त्वरित पराजय-स्वीकार उसे आतंकित करने वालों के लिए एक झटका थी, जिसने दिखाया कि बदनाम लोकतंत्र अभी भी ज़िंदा है। माग्यार की टिस्ज़ा पार्टी ने 54% मतों के साथ लगभग 138 सीटें जीतीं, जबकि ओरबान की फ़िदेस 55 पर सिमट गई—यह दो-तिहाई बहुमत हंगरी की संसद में संरचनात्मक सुधारों का रास्ता खोलता है [A10]। इस चुनावी क्रांति के पीछे भ्रष्टाचार, आर्थिक तनाव और रूस-समर्थक झुकाव के ख़िलाफ़ जनता का गुस्सा था, जिसे ओरबान के पूर्व सहयोगी माग्यार ने कुशलता से एक साझा मंच पर ला खड़ा किया [A4]।
यूरोपीय संघ के लिए यह नतीजा एक बड़ी राहत लेकर आया। आयोग अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन ने 1956 की क्रांति और 1989 की तुलना करते हुए इसे उत्साह से सराहा [A9], जबकि ओरबान के यूक्रेन सहायता को रोकने और रूसी प्रतिबंधों में बाधा डालने का दौर ख़त्म होता दिख रहा है [A8]। पर इटली से अरियाना मेलोनी ने सावधानी बरतते हुए कहा कि ये आज़ाद चुनाव थे और हार स्वीकार करना ओरबान की लोकतांत्रिक परिपक्वता दर्शाता है, लेकिन यह लोकलुभावनवाद का अंत नहीं [A2]। स्पेन में वोक्स के लिए यह तिगुना झटका साबित हुआ: आर्थिक, रणनीतिक और भविष्य का—क्योंकि ओरबान को पार्टी का वैचारिक और वित्तीय संरक्षक माना जाता था [A5][A15]। दूसरी ओर, माग्यार ने स्पष्ट किया कि यदि पुतिन फ़ोन करें तो वह उठा लेंगे और युद्ध रोकने को कहेंगे, हालांकि यूरोपीय आलोचकों ने चेताया कि रूसी तेल-गैस पर उनका रुख ओरबान से बहुत अलग नहीं लगता [A7][A9]।
माग्यार के सामने दोहरी चुनौती है: ओरबान की गहरी जड़ें जमा चुकी 'राष्ट्रीय सहयोग प्रणाली' (एनईआर) को तोड़ना और अपने विविध गठबंधन को साधते हुए राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्त करना [A14]। उन्होंने 5 मई तक पदभार संभालने की इच्छा जताई और 'राज्य की नालियों की सफ़ाई' का संकल्प लिया, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बहाल करने का वादा किया [A10][A12]। पर विशेषज्ञ मानते हैं कि ओरबान का सिस्टम इतना व्यापक है कि माग्यार की भारी जीत भी इसकी पूरी ताक़त को तुरंत ख़त्म नहीं कर पाएगी [A16]। साथ ही, जलवायु कार्रवाई के लिए नई खिड़की खुलने की उम्मीद है, क्योंकि ओरबान ने 2050 तक शून्य उत्सर्जन की यूरोपीय योजना को 'काल्पनिक' बताकर वीटो किया था [A3]।
यह चुनाव वैश्विक अधिनायकवादी दक्षिणपंथ के लिए एक झटका है, जिसने एक दशक से लोकतंत्रों को खोखला करने की रणनीति बनाई थी [A1][A6]। ट्रंप और पुतिन के प्रशंसक ओरबान की विदाई यूरोपीय संप्रभुतावाद के पतन का प्रतीक है, लेकिन इटली से लेकर स्पेन तक यह सवाल बना है कि क्या यह वैश्विक लहर का हिस्सा है या केवल हंगरी की स्थानीय थकान [A13]। पीटर माग्यार ने साबित किया कि बदलाव की भूख और मतपेटी की ताकत किसी भी अभेद्य क़िले को ढहा सकती है। अब असली परीक्षा यह होगी कि क्या वह हंगरी के लोकतंत्र को पुनर्जीवित कर पाते हैं, या ओरबान की छाया लंबे समय तक संस्थाओं पर मंडराती रहेगी।
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