होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी शुरू, चीन ने दी हस्तक्षेप न करने की चेतावनी
ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। ब्रिटेन ने समर्थन से इनकार किया, चीन ने कड़ा विरोध जताया और पाकिस्तान नई वार्ता के लिए मध्यस्थता कर रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नौसैनिक नाकेबंदी सोमवार से प्रभावी हो गई, जिसने पहले से ही तनावपूर्ण पश्चिम एशिया को और अस्थिर कर दिया है। पिछले सप्ताहांत पाकिस्तान में 21 घंटे तक चली अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद ट्रंप ने इस कदम की घोषणा की थी। वास्तव में ईरान ने युद्ध शुरू होने के कुछ ही समय बाद अधिकांश विदेशी जहाजों के लिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया था, लेकिन अब अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोक रही है, साथ ही उन तटस्थ जहाजों को भी लक्षित कर रही है जिन्होंने ईरान को मार्ग शुल्क का भुगतान किया था।
वैश्विक प्रतिक्रिया में गहरे मतभेद उभरे हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने नाकेबंदी का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया और 40 देशों को साथ लेकर जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पहल की। दूसरी ओर, चीन ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि उसके जहाज ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा समझौतों का सम्मान करते हुए इस क्षेत्र में आवाजाही जारी रखेंगे और अमेरिका को चीन के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद वार्ता में ईरान की ओर से कुछ लचीलापन दिखने की बात स्वीकार की, लेकिन जोर दिया कि तेहरान को और कदम उठाने होंगे।
आर्थिक मोर्चे पर संकट के बादल घने होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आम दिनों में जलडमरूमध्य से प्रतिदिन 100 से 120 जहाज गुजरते थे, जो अब घटकर मात्र तीन-चार रह गए हैं। तेल की कीमतें हालांकि नई वार्ता की उम्मीद में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, लेकिन वैश्विक खाद्य संकट की चेतावनियाँ जारी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि नाकेबंदी जितनी लंबी चलेगी, अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव उतना ही बढ़ेगा, जो ईरान की सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करेगा।
कानूनी और सामरिक दृष्टि से यह कदम बेहद जोखिम भरा है। अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों ने नाकेबंदी की वैधता पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता एक मूलभूत सिद्धांत है। ट्रंप ने धमकी दी है कि नाकेबंदी के पास आने वाली कोई भी ईरानी नौका तुरंत नष्ट कर दी जाएगी, जबकि ईरान की सेना पराजित घोषित होने के बावजूद अभी भी कुछ तेज हमलावर नौकाएँ और मिसाइल क्षमता रखती है। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों के बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को बाधित करने की आशंका ने एक और आपूर्ति श्रृंखला संकट की चिंता पैदा कर दी है।
आगे की राह अनिश्चित है। पाकिस्तान एक नए दौर की वार्ता के लिए जोर-शोर से प्रयास कर रहा है और संभावित तिथि बृहस्पतिवार बताई जा रही है। लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी ने जहाँ एक ओर ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसने की कोशिश की है, वहीं यह चीन के साथ सीधे टकराव का जोखिम भी उठा रही है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह एकतरफा कार्रवाई अमेरिका को 'समुद्री डाकू राष्ट्र' की छवि दे सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऐसे संकट में धकेल सकती है जिसमें हर पक्ष का नुकसान तय है।
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