ओंटारियो में डेढ़ सौ से अधिक क़ैदियों की ग़लती से रिहाई, ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया में भी सामने आए मामले
ओंटारियो की जेलों से 2021-2025 के बीच 157 क़ैदियों की अनुचित रिहाई पर राजनीतिक आग उगलती रही, ब्रिटेन में 179 और ऑस्ट्रेलिया के एक मामले ने वैश्विक कारागार व्यवस्थाओं की आंतरिक खामियों को उजागर किया।

कनाडा के ओंटारियो प्रांत में पिछले पाँच सालों में 157 क़ैदियों की ग़लती से रिहाई ने सरकार को घेर लिया है। ग्लोबल न्यूज़ द्वारा सूचना अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ कि 2021 से 2025 के बीच प्रशासनिक और मानवीय चूकों के चलते इतनी बड़ी संख्या में क़ैदी अनुचित तरीके से छोड़ दिए गए। प्रीमियर डग फ़ोर्ड ने इसे “अस्वीकार्य” करार देते हुए कहा कि वह पूरे मामले की तह तक जाएँगे, लेकिन सॉलिसिटर जनरल माइकल केर्ज़नर को पिछले साल ही इस मुद्दे पर ब्रीफ़ किया जा चुका था [A1][A3]।
सियासी हलकों में तब और तल्ख़ी बढ़ गई जब पता चला कि केर्ज़नर ने विधानसभा में भरोसा दिलाया था कि ग़लती से छूटे सभी क़ैदियों को “तुरंत” वापस लाया गया, जबकि आंतरिक सूत्रों के अनुसार कई बंदी महीनों तक फ़रार रहे। विपक्ष ने सरकार पर प्रांत की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। इन ख़बरों के बीच यह भी सामने आया कि 2021 से 2024 के बीच 118 अनुचित रिहाइयाँ हुईं और 2025 के पहले नौ महीनों में 39 और मामले दर्ज हो चुके थे, जबकि 2023 में ही एक केंद्रीय समन्वयक तैनात किया गया था [A4][A7]।
वहीं ब्रिटेन के इंग्लैंड और वेल्स में भी इसी तरह की संकटग्रस्त तस्वीर उभरी। वहाँ न्याय मंत्रालय ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 179 क़ैदियों को ग़लती से रिहा कर दिया। न्याय सचिव डेविड लैमी पहले ही एक प्रवासी यौन अपराधी की ग़लत रिहाई जैसे हाई-प्रोफ़ाइल मामलों के बाद सख़्ती का वादा कर चुके थे, लेकिन आँकड़े बताते हैं कि ख़ामियाँ अब भी बरक़रार हैं [A2]।
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स से एक ताज़ा मिसाल ने मानवीय पहलू को रेखांकित किया। क्लेरेंस करेक्शनल सेंटर से प्रशासनिक ग़लती से छूटे काइल क्वेल ने अदालत में दलील दी कि यह “दोहरी सज़ा” है। उसे दुबारा गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन इस साल सितंबर में उसके पैरोल का रास्ता साफ़ रहेगा [A6]।
इन सबके बीच ओंटारियो के प्रीमियर फ़ोर्ड ने जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए 2050 तक 6,000 नए बिस्तर जोड़ने की योजना का बचाव किया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि केवल बुनियादी ढाँचा बढ़ाने से क़ैदियों की रिहाई की प्रक्रियागत चूकें नहीं सुधरेंगी। वैश्विक स्तर पर ये घटनाएँ जेल प्रशासन में डिजिटल निगरानी, स्टाफ़ प्रशिक्षण और जवाबदेही की गहरी पड़ताल की माँग कर रही हैं [A5][A7]।
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