अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज़ पर कब्ज़ा किया, जवाबी ड्रोन हमले के बाद बातचीत ठप
अमेरिकी विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअंस ने नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे ईरानी कार्गो जहाज़ तूस्का को निष्क्रिय कर कब्ज़े में ले लिया। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए ड्रोन से अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला किया और दूसरे दौर की वार्ता से इनकार कर दिया।

अमेरिकी नौसेना ने रविवार 19 अप्रैल को ओमान की खाड़ी में ईरानी ध्वज वाले कार्गो जहाज़ एमवी तूस्का पर गोलीबारी कर उसे कब्ज़े में ले लिया, जो अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने का प्रयास कर रहा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कहा कि विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअंस ने छह घंटे तक चेतावनी देने के बाद जहाज़ के इंजन रूम में छेद कर उसे रोका और अब अमेरिकी मरीन उस पर नियंत्रण कर रहे हैं [A2][A8][A9]। सेंटकॉम ने पुष्टि की कि तूस्का 17 नॉट की रफ्तार से बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर जा रहा था और बार-बार की चेतावनियों के बाद भी नहीं रुका [A10][A20]।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने इस कार्रवाई को “सशस्त्र समुद्री डकैती” और दो-सप्ताह के युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी [A3][A16][A23]। इसके कुछ ही घंटों बाद, तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार ईरानी बलों ने ओमान सागर में अमेरिकी सैन्य जहाज़ों पर ड्रोन हमले किए, जिससे तनाव अचानक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया [A6][A23]। तेहरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला घोषित कर दिया था, लेकिन अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहने पर उसने इसे फिर से बंद करने की धमकी दी [A1][A17]।
राजनयिक मोर्चे पर गतिरोध गहरा गया है। ईरान ने पाकिस्तान की मेज़बानी में होने वाली दूसरे दौर की अमेरिकी वार्ता में शामिल होने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब तक समुद्री नाकाबंदी रहेगी, बातचीत संभव नहीं [A1][A4][A13]। ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजने की घोषणा की थी और साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान समझौते पर राजी नहीं हुआ तो बिजली संयंत्रों और पुलों पर बमबारी की जाएगी [A5]। बुधवार को समाप्त हो रहे इस नाज़ुक युद्धविराम के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं [A4][A22]।
वैश्विक नज़रिए से देखें तो तूस्का जहाज़ चीन के झुहाई बंदरगाह से रवाना हुआ था और विशेषज्ञों के अनुसार उसमें सोडियम परक्लोरेट जैसे रसायन हो सकते थे, जो ठोस रॉकेट ईंधन का प्रमुख घटक है [A18]। इस घटनाक्रम ने पहले से ही ऊर्जा संकट की आशंका से जूझ रहे वैश्विक बाज़ारों को और अनिश्चितता में डाल दिया है। समुद्री इतिहासकार साल मर्कोग्लियानो ने इसे “वृद्धि और प्रतिशोध दोनों” करार दिया [A15]। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों की कठोर स्थिति के कारण क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना फिलहाल क्षीण है और टकराव तेज़ होने का खतरा बना हुआ है [A22][A24]।
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