ईरान के बमबारी वाले परमाणु स्थलों पर पारदर्शिता नहीं, ग्रोसी ने फिर से संवाद का रास्ता खोलने की गुहार लगाई
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी प्रमुख ने शासी बोर्ड में ईरान से उन ठिकानों का निरीक्षण फिर शुरू करने के लिए संपर्क बहाल करने का आग्रह किया जिन पर अमेरिका-इज़राइल ने एक साल पहले बमबारी की थी।

संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी प्रमुख राफ़ाएल ग्रोसी ने सोमवार को ईरान से फिर ‘संपर्क बहाल’ करने का अनुरोध किया ताकि उन स्थलों पर निरीक्षण दोबारा शुरू हो सके जिन्हें अमेरिका और इज़राइल ने करीब एक साल पहले बमबारी का निशाना बनाया था [A1][A2]। शासी बोर्ड की तिमाही बैठक में पश्चिमी देशों के एक प्रस्ताव का अमेरिकी नेतृत्व में समर्थन किया गया, जिसका मकसद ईरान पर उन ठिकानों से जुड़ी जानकारी साझा करने का दबाव बनाना है [A1][A3]। इस बीच, ग्रोसी ने स्वीकार किया कि एजेंसी फ़रवरी 2026 से ईरान में अपनी सभी फ़ील्ड सत्यापन गतिविधियाँ रोक चुकी थी और पिछले हफ़्ते सिर्फ़ बुशहर परमाणु बिजली घर की एक सामान्य जांच ही संभव हो सकी थी [A5]।
हालाँकि जून 2025 के हवाई हमलों ने यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं को नष्ट या बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, लेकिन माना जा रहा है कि उच्च-संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा इन हमलों की चपेट में नहीं आया [A2][A3]। यह भंडार 60 प्रतिशत तक शुद्धता वाला है, जो 90 प्रतिशत की परमाणु हथियार-ग्रेड सीमा से बस एक क़दम दूर है [A2][A3]। ईरान ने अब तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को यह नहीं बताया कि बमबारी वाले ठिकानों का क्या हुआ या वहाँ मौजूद परमाणु सामग्री की स्थिति क्या है [A1][A2][A3]। इससे एजेंसी का सूचना प्रवाह पूरी तरह टूट चुका है और वह वर्षों की निगरानी से बने ज्ञान-क्रम को बनाए रखने में असमर्थ हो गई है [A5]।
ईरानी राज्य-समर्थित मीडिया ने ग्रोसी के बयानों को सीधे झूठ करार दिया। हमशहरी ऑनलाइन ने ग्रोसी के इस दावे को कि ‘एजेंसी ने कभी नहीं कहा कि ईरान परमाणु बम बना रहा है’, पिछले साल की उनकी ही उस रिपोर्ट से काटा जिसमें कहा गया था कि एजेंसी इस बात का भरोसा नहीं दिला सकती कि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है [A4]। उसी दिन ईरान के विदेश मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा संगठन ने संयुक्त बयान जारी कर ग्रोसी की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया था [A4]। यह टकराव बताता है कि टूटे संवाद और पारस्परिक अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है।
आने वाले महीने दोनों पक्षों के लिए संकटपूर्ण हो सकते हैं। शासी बोर्ड के प्रस्ताव से न सिर्फ़ युद्धविराम वार्ता प्रभावित होगी, बल्कि इस बात की संभावना भी कम है कि ईरान बिना किसी राजनीतिक रियायत के एजेंसी के लिए वे दरवाज़े खोले जिनके पीछे बमबारी के बाद का परमाणु वास्तविकता छिपी है [A1][A3]। ग्रोसी की ‘पुनःसहभागिता’ की अपील भले ही तकनीकी लगे, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सवाल है: क्या दुनिया उस सामग्री की स्थिति जान पाएगी जो किसी दिन एक परमाणु हथियार का रूप ले सकती है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
IAEA ईरानी शासन के लगातार संचार अवरोध पर चिंता जताते हुए सहयोग फिर से शुरू करने का आग्रह करता है ताकि निरीक्षक अमेरिका और इज़राइल द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों तक पहुँच सकें। पश्चिमी शक्तियाँ एक प्रस्ताव पर ज़ोर दे रही हैं क्योंकि तेहरान ने परमाणु सामग्री, जिसमें हथियार-ग्रेड के करीब संवर्धित यूरेनियम शामिल है, के भाग्य का खुलासा नहीं किया है, जिससे प्रसार की गंभीर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
IAEA के महानिदेशक पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अपने पिछले बयानों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया है, उन्होंने झूठा दावा किया कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि ईरान बम बना रहा है। उन्हें संकट का एक प्रमुख चालक बताया गया है, जबकि ईरान इस बात पर प्रकाश डालता है कि बुशहर में निरीक्षण आंशिक रूप से फिर से शुरू हो गए हैं, जो पूर्ण असहयोग की कहानी को चुनौती देता है।
IAEA प्रमुख ने ईरान से फिर से जुड़ने और एक साल पहले अमेरिकी और इज़राइली हवाई हमलों से प्रभावित स्थलों पर निरीक्षण की अनुमति देने का आग्रह किया है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी शक्तियाँ एजेंसी के बोर्ड में एक मसौदा प्रस्ताव को आगे बढ़ा रही हैं, और परमाणु सामग्री की स्थिति को लेकर अनिश्चितता तथा राजनयिक वार्ताएँ रुकी हुई हैं।
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