रोम में बेन-गवीर पर यातना मामले की जांच, इटली ने ‘चप्पल’ वाली टिप्पणी को बताया अशोभनीय
इजरायली मंत्री की अपमानजनक टिप्पणी पर इतालवी विदेश मंत्री का कड़ा जवाब; लीबिया में फंसे दो इटालियंस की आज सुनवाई, यूरोपीय प्रतिबंधों पर ज़ोर।

रोम के अभियोजक कार्यालय ने इज़रायली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर के ख़िलाफ़ यातना और अपहरण के आरोपों में जाँच शुरू कर दी है। यह मामला मई में ‘ग्लोबल सुमूद फ़्लोटिला’ के उन अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं से जुड़ा है जिन्हें ग़ज़ा की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश के दौरान इज़रायल ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोक लिया था। स्वीडिश और अरबी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अशदोद बंदरगाह पर बेन-गवीर ने स्वयं एक वीडियो साझा किया था जिसमें सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हथकड़ी लगाए घुटनों के बल झुकाए जाने और उनके सामने इज़रायली झंडा लहराते हुए उपहास करते दिखाया गया है। स्पेनिश समाचार पत्रों के मुताबिक यह जाँच कम से कम तीन शिकायतों और पिछले साल अक्टूबर व अप्रैल की फ़्लोटिला मिशनों से जुड़ी न्यायिक कार्यवाहियों के सिलसिले में आई है।
इस जाँच के सार्वजनिक होने पर बेन-गवीर ने इटली को निशाना बनाते हुए कहा, “स्टिवाल (जूता) का देश अब चप्पलों का देश बन गया है।” इतालवी मीडिया के अनुसार, उन्होंने आगे झूठे समर्थकों और आतंकवादियों का देश बताते हुए यह भी कहा कि इज़रायल किसी का “मुक्केबाज़ी का बैग” नहीं है। विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इन शब्दों को “अस्वीकार्य और अशोभनीय” करार दिया और कहा, “ये शब्द इस व्यक्ति के राजनीतिक और नैतिक स्तर को दर्शाते हैं।” संसदीय समितियों में उन्होंने दोहराया कि इटली इज़रायल का मित्र है, लोकतंत्र और स्वतंत्रता का समर्थक है, और हमास का निशस्त्रीकरण प्राथमिकता बनी हुई है।
तायानी ने इसी सत्र में बताया कि लीबिया के बेंगाज़ी में दो सप्ताह से हिरासत में रखे गए दो इतालवी नागरिकों की आज सुनवाई निर्धारित है और उनके शीघ्र रिहाई के लिए राजनयिक दबाव बढ़ाया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों पर इटली का ज़ोर बरकरार है और युद्ध के बाद होर्मुज़ में संभावित मिशन में भागीदारी के लिए रोम तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के प्रति इटली की पूर्ण निंदा को रेखांकित किया।
बेन-गवीर के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई केवल एक देश की पहल नहीं है। अरबी स्रोतों के मुताबिक मामले में गंभीर आपराधिक संदेह हैं और वीडियो में दिख रही मानसिक यातना अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के उल्लंघन के दायरे में आ सकती है। स्वीडन और स्पेन की रिपोर्टिंग इसे यूरोपीय न्यायिक प्रणाली की सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र की परीक्षा के रूप में देखती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण इटली की कूटनीतिक संतुलन साधने की क्षमता को परखेगा—एक ओर इज़रायल के साथ घनिष्ठ संबंध और दूसरी ओर यूरोपीय मूल्यों व संस्थानों के प्रति प्रतिबद्धता। आगे की राह में यूरोपीय संघ के स्तर पर प्रतिबंधों की चर्चा और लीबिया में फंसे नागरिकों की रिहाई जैसे मुद्दे इटली की क्षेत्रीय भूमिका को और जटिल बना सकते हैं।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
इटली ने इज़राइली मंत्री बेन गवीर के अपमानजनक बयानों को दृढ़ता से खारिज करते हुए उन्हें अस्वीकार्य और एक मंत्री के लिए अनुचित बताया। रोम लोक अभियोजक ने फ़्लोटिला कार्यकर्ताओं से जुड़े यातना और अपहरण के मामले में जांच शुरू की है, और इतालवी सरकार इस उग्र दक्षिणपंथी पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का दबाव बना रही है। विदेश मंत्री तायानी ने कहा कि इज़राइल से मित्रता कानून के शासन और राष्ट्रीय गरिमा से ऊपर नहीं हो सकती।
इतालवी न्यायपालिका ने ज़ायोनी मंत्री बेन गवीर को वैश्विक दृढ़ता फ़्लोटिला के कार्यकर्ताओं के खिलाफ यातना और मनमानी हिरासत जैसे गंभीर अपराधों के लिए औपचारिक जांच में शामिल किया है। जांच उस वीडियो पर आधारित है जिसे मंत्री ने खुद जारी किया था जिसमें अश्दोद बंदरगाह पर बंदियों को अपमानित किया जा रहा है, और यह गाजा के साथ एकजुटता दिखाने वाले अंतरराष्ट्रीय लोगों के खिलाफ कब्जे की व्यवस्थित क्रूरता की पुष्टि करता है।
यरूशलेम में इतालवी जांच को शत्रुतापूर्ण कार्यकर्ताओं द्वारा प्रेरित एक राजनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक अनावश्यक शब्द-युद्ध को भी जन्म दिया। मंत्री की दुर्भाग्यपूर्ण भाषा को स्वीकार करते हुए भी, सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि फ़्लोटिला ने एक वैध नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास किया और बंदियों के साथ व्यवहार संचालन प्रोटोकॉल के अनुरूप था। यह घटना इज़राइल की छवि को नुकसान पहुंचाती है लेकिन गाज़ा की ओर समुद्री घुसपैठ रोकने की अनिवार्यता को नहीं बदलती।
रोम में अपने घृणित सुरक्षा मंत्री के अभियोग से ज़ायोनी शासन को एक करारा झटका लगा है, जबकि दुनिया कब्ज़े वाले बंदरगाह पर दर्ज बर्बरता देख रही है। इतालवी जांच तेल अवीव की आपराधिक प्रकृति को उजागर करती है और कब्ज़ाधारियों की दण्ड-मुक्ति खत्म करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मुकदमे का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रतिरोध इसे हड़पने वाली इकाई के खिलाफ कानूनी और नैतिक लड़ाई में एक मील का पत्थर बताता है।
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