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लेनिनग्राद में ड्रोन रोकने को रिजर्विस्टों की मोबाइल टीमें तैनात होंगी

यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद लेनिनग्राद प्रशासन ने महत्वपूर्ण ठिकानों पर अतिरिक्त मोबाइल फायर ग्रुप बनाने और युद्ध के दिग्गजों को तीन साल के अनुबंध पर भर्ती करने का फैसला किया है।

भूराजनीति6 स्रोत2 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 09:32

लेनिनग्राद क्षेत्र में हवाई सुरक्षा का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है, जहाँ पहली बार रिजर्विस्टों—खासकर यूक्रेन युद्ध के अनुभवी सैनिकों—को सीधे मोबाइल फायर ग्रुपों में शामिल किया जा रहा है। गवर्नर अलेक्ज़ांद्र ड्रोज़देंको ने ऑपरेशनल मुख्यालय की बैठक के बाद घोषणा की कि हर महत्वपूर्ण उद्योग और बुनियादी ढाँचे पर ये दस्ते तैनात होंगे, और इन्हें छठी गार्ड्स वायु सेना-वायु रक्षा सेना के अधीन भी रखा जाएगा। [A2][A5] यह कदम उस समय उठाया गया है जब मार्च के मध्य से क्षेत्र के तेल निर्यात टर्मिनलों पर बार-बार ड्रोन हमले हुए हैं, जिनसे किसी समय रूस की कुल तेल निर्यात क्षमता में अनुमानित 40 प्रतिशत की कमी आई थी। [A3]

इन मोबाइल टुकड़ियों में भर्ती के लिए खासतौर पर उन दिग्गजों को आमंत्रित किया गया है जो यूक्रेन में सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे हैं या सोवियत-रूसी सेना में सेवा दे चुके हैं। उन्हें लेनिनग्राद क्षेत्रीय सैन्य कमिश्रिएट के ज़रिए तीन साल का अनुबंध देने की योजना है, जिसके तहत वे अधिकतम दो से छह महीने तक बैरकों में रहकर आसमान की निगरानी करेंगे और साथ ही जिस उद्यम की रक्षा कर रहे हैं, वहीं पर स्थायी रोज़गार भी पाएँगे। [A6][A7] गवर्नर ने स्पष्ट किया कि इस योजना से न केवल सुरक्षा बल्कि रोज़गार का भी समाधान निकलेगा।

सैन्य तैयारियों की ज़मीनी हकीकत लेनिनग्राद ओब्लास्ट के एक पॉलीगॉन पर दिखी, जहाँ लेनिनग्राद सैन्य जिले की मोबाइल फायर यूनिटों ने नियंत्रण गोलीबारी और युद्ध समन्वय का अभ्यास किया। [A1] प्रेस सेवा के अनुसार, सैनिकों ने मानक छोटे हथियारों से हवाई लक्ष्यों को भेदने का प्रशिक्षण लिया और जल्द ही ये दस्ते क्षेत्र की अहम इमारतों की वायु रक्षा को मज़बूत करेंगे। क्षेत्रीय सरकार और उद्योग खुद गाड़ियों तथा उपकरणों की खरीद का खर्च उठाएँगे, जिससे स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय सेना के बीच एक नया समन्वय उभरता है। [A5][A7]

यूक्रेनी ड्रोनों का बढ़ता ख़तरा अब युद्ध के मैदान से हज़ारों किलोमीटर दूर रूस के उत्तर-पश्चिमी औद्योगिक केंद्रों तक पहुँच चुका है। मार्च से अब तक तेल डिपो और निर्यात टर्मिनलों पर हुए हमले इस बात का संकेत हैं कि पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियाँ सीमित संसाधनों के चलते हर जगह चौकसी नहीं रख सकतीं। ऐसे में अनुभवी रिजर्विस्टों को मोबाइल ग्रुपों में ढालना एक कम लागत वाला किंतु प्रभावी जवाबी उपाय है, जो मानव संसाधन की कमी को भी रेखांकित करता है।

आगे का रास्ता जून तक साफ हो जाएगा, जब प्रशासन ने मौजूदा 80 यूनिटों के अतिरिक्त 54 नई मोबाइल फायर टीमें खड़ी करने का लक्ष्य रखा है। [A3] अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यह मॉडल दूसरे सीमावर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों में भी दोहराया जा सकता है। फ़िलहाल, लेनिनग्राद का आसमान रिजर्विस्टों की बंदूकों की नोक पर टिका है, और यह पहल रूस की उभरती सुरक्षा चुनौतियों का एक अहम प्रतीक बन गई है।

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Interfax
Forbes Russia
Meduza
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