ईस्टर संघर्षविराम की विफलता के बीच यूक्रेन और रूस ने 350 युद्धबंदियों की अदला-बदली की
रूढ़िवादी ईस्टर के मौके पर लागू संघर्षविराम का दोनों पक्षों ने हज़ारों बार उल्लंघन किया, वहीं संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में 175-175 क़ैदियों की अदला-बदली हुई और शवों का आदान-प्रदान किया गया।

रूढ़िवादी ईस्टर के अवसर पर शनिवार दोपहर से लागू हुए संघर्षविराम ने यूक्रेन की जनता को राहत देने के बजाय निराशा को और गहरा कर दिया। शनिवार को युद्धविराम शुरू होने के मात्र 38 मिनट बाद ख़ारकीव शहर में हवाई हमले के सायरन बज उठे [A1]। अगली सुबह तक, यूक्रेनी सेना ने अग्रिम मोर्चे पर 2,299 संघर्षविराम उल्लंघन दर्ज किए, जिनमें 28 हमलावर कार्रवाइयाँ, 479 गोलाबारी, 747 आक्रमण ड्रोन हमले और 1,045 एफ़पीवी ड्रोन हमले शामिल थे [A2]। रूसी रक्षा मंत्रालय ने भी यूक्रेनी बलों द्वारा 1,971 उल्लंघनों की बात कही और दावा किया कि द्निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र में तीन जवाबी हमलों का प्रयास किया गया [A3]। हालाँकि, किसी भी पक्ष ने लंबी दूरी की मिसाइल, गाइडेड हवाई बम या शाहेद जैसे बड़े ड्रोन हमलों की सूचना नहीं दी।
राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने एक्स पर लिखा कि “ईस्टर शांति का समय होना चाहिए,” लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेनी सेनाएँ रूसी हमलों का “सममित” जवाब देंगी [A3]। यूक्रेनी सेना के फ़ेसबुक पोस्ट में बताए गए आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि युद्धविराम महज़ काग़ज़ों पर रहा और ज़मीनी हक़ीक़त में भारी संघर्ष जारी रहा। रूसी रक्षा मंत्रालय और यूक्रेनी जनरल स्टाफ़ एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे, जिससे यह साफ़ हो गया कि पूर्वी मोर्चे पर कोई वास्तविक शांति नहीं आ पाई [A4]।
इसी अराजक माहौल के बीच, शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में एक अप्रत्याशित मानवीय पहल सामने आई: रूस और यूक्रेन ने 175-175 युद्धबंदियों की अदला-बदली की [A5]। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने मृत सैनिकों के शवों का भी आदान-प्रदान किया—यूक्रेन के 1,000 शवों के बदले रूस के 41 शव लौटाए गए। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन ने कुर्स्क सीमावर्ती क्षेत्र के सात नागरिकों को भी वापस किया।
यह दोहरी तस्वीर—एक ओर विफल संघर्षविराम और दूसरी ओर बंदी अदला-बदली—चार साल से अधिक लंबे इस युद्ध की विरोधाभासी प्रकृति को उजागर करती है। ज़ेलेंस्की ने सोमवार तक के लिए निर्धारित इस ठहराव को आगे बढ़ाकर व्यापक शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने की उम्मीद जताई, लेकिन हज़ारों उल्लंघनों के बाद यह संभावना धूमिल नज़र आती है। फिर भी, क़ैदियों की सफल अदला-बदली यह सिद्ध करती है कि संघर्ष के बीच भी कूटनीतिक संवाद जारी रह सकता है, बशर्ते दोनों पक्ष वास्तविक शांति की दिशा में ठोस क़दम उठाने को तैयार हों।
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