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हॉर्मुज की अमेरिकी नाकेबंदी से तेल बाज़ार में हलचल, चीन ने दी चेतावनी, ब्रिटेन ने खींचा हाथ

वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी। इस कदम से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच टकराव गहराया है।

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हफ़्ते भर की नाज़ुक जंगबंदी के बाद जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे की मैराथन वार्ता बिना नतीजे के ख़त्म हुई, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। अमेरिकी सेना अब ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले सभी जहाज़ों को रोक रही है, और ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी कि नाकेबंदी के पास आने वाली किसी भी ईरानी ‘तेज़ हमलावर नौका’ को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हालाँकि बाद में वाशिंगटन ने कहा कि जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले दूसरे जहाज़ों को नहीं रोका जाएगा, पर ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी। [A1][A3][A11][A16]

यह नाकेबंदी ऐसे समय में आई है जब छह हफ़्तों की बमबारी के बाद भी ईरान ने आत्मसमर्पण नहीं किया और उसने ख़ुद जलडमरूमध्य को विदेशी यातायात के लिए बंद कर रखा था। ट्रंप ने ईरान पर ‘जबरन वसूली’ का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका उन तटस्थ जहाज़ों को भी रोकेगा जिन्होंने ईरान को सुरक्षित मार्ग का शुल्क अदा किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान ने वार्ता में कुछ लचीलापन दिखाया, लेकिन समझौते के लिए पर्याप्त नहीं। सैन्य दृष्टि से यह रणनीति बदलाव था—बमबारी से आर्थिक दबाव की ओर। दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इसे ‘समुद्री डकैती’ बताया और चेतावनी दी कि बंदरगाहों को ख़तरा पहुँचा तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। [A2][A6][A8][A17]

वैश्विक प्रतिक्रिया तीखी और विभाजित रही। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने नाकेबंदी का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि ब्रिटेन ‘इस युद्ध में नहीं घिसटेगा’। उन्होंने संसद में 40 देशों को साथ लेकर जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के प्रयास का ऐलान किया। चीन ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह ईरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा समझौतों का सम्मान करेगा और अमेरिका को बीजिंग के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। चीनी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखता है और चीनी जहाज़ों के लिए यह खुला है। इस बयान ने सीधे टकराव की आशंका बढ़ा दी। पाकिस्तान, जिसने मध्यस्थता की भूमिका निभाई, ने दोनों पक्षों पर जल्द ही दोबारा बातचीत शुरू करने का दबाव बनाया; ख़बरें हैं कि अगले दौर की वार्ता जिनेवा या इस्लामाबाद में हो सकती है। [A4][A9][A13][A19]

तेल बाज़ार पर इसका तत्काल असर दिखा। ब्रेंट क्रूड 4% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, हालाँकि अगले दिन नई वार्ता की उम्मीद में कीमतें 97.50 डॉलर तक गिर गईं। विशेषज्ञों ने चेताया कि सामान्य दिनों में इस जलडमरूमध्य से 100-120 जहाज़ गुज़रते हैं, लेकिन अब घटकर तीन-चार रह गए हैं, जिससे ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था हॉर्मुज पर टिकी’ है। अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि यह नाकेबंदी नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकती है, ख़ासकर जब अमेरिका उन जहाज़ों को रोकने की धमकी देता है जो ईरान को शुल्क देते हैं। इस बीच, हूथी विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को निशाना बनाने की आशंका ने संकट को और गहरा दिया है। [A7][A14][A15][A20]

ट्रंप की यह नाकेबंदी केवल ईरान पर दबाव नहीं है—यह उन देशों को सज़ा देने का औज़ार भी बन सकती है जिन्होंने अमेरिकी गठबंधन में शामिल होने से इनकार किया। विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका और चीन के बीच सीधे सैन्य टकराव का ख़तरा पैदा हो गया है, जिसमें चीन ख़ुद को ‘ज़िम्मेदार शक्ति’ के रूप में पेश कर सकता है। अगले कुछ दिनों में या तो पाकिस्तान के दबाव में कोई नया युद्धविराम और वार्ता का दौर शुरू होगा, या फिर हॉर्मुज का संकट एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और सैन्य टकराव में बदल जाएगा। [A5][A18][A21]

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