रूस में 1 ट्रिलियन रूबल की कर चोरी की सबसे बड़ी स्कीम का भंडाफोड़, कई गिरफ्तार
एफएसबी और जांच समिति ने 4800 से अधिक फर्जी कंपनियों के जरिए 40 हजार कंपनियों को फर्जी वैट कटौती मुहैया कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया।

रूस की सुरक्षा एजेंसियों ने टैक्स चोरी के अब तक के सबसे बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसा है, जिसमें देश के बजट को एक ट्रिलियन रूबल (करीब 13.2 अरब डॉलर) से अधिक का नुकसान हुआ। एफएसबी और जांच समिति (एसके) ने संयुक्त अभियान में उस गिरोह के सरगनाओं को गिरफ्तार किया, जिसने मॉस्को क्षेत्र में ‘पेपर वैट’ की सबसे बड़ी प्लेटफॉर्म खड़ी की थी [A1][A3]। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह नेटवर्क 4800 से अधिक ट्रांजिट कंपनियों से बना था, जिनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था, और इसने 40 हजार से ज्यादा कंपनियों को फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी कर अवैध वैट कटौती का लाभ दिलवाया [A2][A8]।
योजना की बुनियाद ‘पेपर वैट’ की वह पद्धति थी जिसमें नकली खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार कर कर देनदारियों को घटाया जाता था। सूत्रों के मुताबिक, इन फर्जी कंपनियों में से 190 के निदेशक तो सीधे जेल की कॉलोनियों से भर्ती किए गए थे, जिन्होंने कभी कोई कारोबार नहीं देखा [A5]। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में आपराधिक संहिता की धारा 173.1 (गैरकानूनी कानूनी इकाई का गठन) और धारा 187 (भुगतान माध्यमों का अवैध संचालन) के तहत मुकदमा दर्ज किया है [A6]। गिरफ्तार किए गए आरोपी पहले भी आर्थिक अपराधों में दोषी ठहराए जा चुके थे [A6][A7]।
इसी कड़ी में राजधानी में एक अलग लेकिन संबद्ध अभियान में पुलिस ने 2.5 अरब रूबल के छाया कारोबार का खुलासा किया। गृह मंत्रालय की प्रवक्ता इरिना वोल्क के अनुसार, यहां 30 से अधिक ‘फर्म-प्रेत’ बनाकर ग्राहकों की रकम को फर्जी वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान के बहाने बैंक खातों में डाला जाता था और फिर कम से कम 15 प्रतिशत कमीशन लेकर नकद निकासी की जाती थी [A4]। हालांकि यह नेटवर्क आकार में छोटा था, पर इसका तरीका वैट स्कीम से मिलता-जुलता था – बिना असल माल के नकदी को सफेद करना।
जांच का दायरा मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग से लेकर पर्म क्राय, बेलगोरोद ओब्लास्त तक फैला, जहां 30 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे गए [A1][A7]। यह कार्रवाई जनरल प्रॉसिक्यूटर ऑफिस, संघीय कर सेवा (एफएनएस), एसके और एमवीडी की संयुक्त कार्यबल ने की [A5][A7]। गिरोह ने एक जटिल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सहारा लिया था, जिसके जरिए हजारों कंपनियों के टैक्स रिटर्न में फर्जी इनवॉइस डाले जाते थे [A7]।
इस मामले ने रूस की कर प्रणाली में गहरे बसे छाया अर्थव्यवस्था के घाव को एक बार फिर उजागर किया है। भवन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स वितरण, ईंधन बिक्री और क्लीनिंग से जुड़ी कंपनियां इस नेटवर्क की प्रमुख ग्राहक थीं [A5]। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ट्रिलियन रूबल का नुकसान सिर्फ पिछले वर्षों का हो सकता है, और अब एजेंसियां उन 40 हजार कंपनियों की तरफ बढ़ेंगी जिन्होंने अवैध कटौतियां लीं। इसके साथ ही सरकारी खजाने की भरपाई के लिए संपत्तियों की जब्ती और कर पुनर्निधारण की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
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