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ट्रम्प-शी शिखर वार्ता के बाद ताइवान के चारों ओर चीन ने तैनात किए 100 से अधिक युद्धपोत

बीजिंग में अमेरिकी-चीनी शिखर बैठक के तुरंत बाद चीन ने पहली द्वीप श्रृंखला में बड़े पैमाने पर नौसैनिक अभ्यास किया, जबकि वाशिंगटन 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर निर्णय लेने वाला है।

भूराजनीति6 स्रोत6 भाषाएँ2 मिनट पढ़नाअपडेट 05:34

पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई शिखर बैठक के बाद चीन ने ताइवान के इर्द-गिर्द एक सौ से अधिक पोतों की अभूतपूर्व तैनाती कर दी। ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बताया कि चीन की नौसेना, तटरक्षक और अन्य निगरानी पोत पीले सागर से दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत तक फैली पहली द्वीप श्रृंखला में सक्रिय हैं। एक अनाम सुरक्षा अधिकारी के हवाले से एएफपी ने यह भी बताया कि इनमें से कई पोत बैठक से पहले ही देखे जा चुके थे, लेकिन शिखर वार्ता के बाद इनकी संख्या बढ़कर सौ के पार हो गई।

वू ने एक्स पर पोस्ट किए गए ग्राफिक के साथ लिखा, “दुनिया के इस हिस्से में #चीन ही एकमात्र समस्या है जो #यथास्थिति को नष्ट कर रहा है और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को ख़तरे में डाल रहा है।” यह बयान उस घेराबंदी की ओर इशारा करता है जिसे पश्चिमी मीडिया में ‘चीन का ताइवान का गला घोंटने का कदम’ कहा गया। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसने बल प्रयोग की धमकी पहले भी दी है, लेकिन इस पैमाने की तैनाती इसे एक नए स्तर पर ले जाती है।

इसी बीच, अन्य रिपोर्टों में अमेरिकी हथियार बिक्री पर जोर दिया गया। ताइवान के लिबर्टी टाइम्स की एक खबर के अनुसार, ट्रम्प जल्द ही 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर निर्णय ले सकते हैं। एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस सौदे में देरी ईरान के साथ युद्ध (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) से असंबद्ध है, और अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त हथियार हैं। इस प्रकार, चीन की नौसैनिक धमकी के ठीक बाद अमेरिकी समर्थन का संकेत ताइपे के लिए रणनीतिक राहत ला सकता है।

क्षेत्रीय प्रतिक्रियाओं को देखें तो इटली के इल जियोर्नेल ने इस तैनाती को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी नौसैनिक एकाग्रता बताया है, जबकि ब्राज़ील के बैंड ने इसे पूर्ण घेरे के रूप में प्रस्तुत किया। फ़ारसी रेडियो फ़र्दा ने इस कदम को बीजिंग की यथास्थिति के उल्लंघन की रणनीति का हिस्सा करार दिया। विश्लेषकों का मानना है कि चीन शिखर वार्ता की विफलता के बाद दबाव बढ़ा रहा है, वहीं वाशिंगटन की ओर से त्वरित हथियार निर्णय दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक टकराव को और गहरा सकता है।

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Latin American press reports Taiwan's alarm, denouncing an encirclement by over 100 Chinese vessels after the Trump-Xi summit. The tone is critical of Beijing, accused of threatening regional stability and wrecking the status quo. The island is portrayed as a victim of growing military pressure.

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Continental European press describes the Chinese naval deployment as a serious move but framed within a long-term pressure strategy. The tone is measured, emphasizing geopolitical implications and the post-summit timing. The delicacy of the moment is highlighted without excessive alarmism.

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Atlantic security press amplifies Taiwan's alarm, calling China the one and only problem threatening regional peace. The deployment of over 100 vessels is presented as a provocation after the Trump-Xi summit. The tone is accusatory and alarmed, strongly siding with Taiwan.

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