सी शी चिनफिंग की ट्रंप से मुलाकात में जापान पर नाराजगी की खबरों को चीन ने किया खारिज
फाइनेंशियल टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि सी शी ने जापानी प्रधानमंत्री की नीतियों पर आवाज उठाई, जबकि चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसी सभी रिपोर्टों को तथ्यहीन बताया।

चीन ने उन मीडिया दावों को सिरे से नकार दिया है जिनमें कहा गया था कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के दौरान जापान को लेकर भड़क गए थे। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने स्पष्ट किया कि इस तरह की खबरें ‘चीनी पक्ष के पास उपलब्ध जानकारी से मेल नहीं खातीं।’ [A1][A5] यह बयान उस समय आया जब पश्चिमी और जापानी मीडिया में बीजिंग शिखर वार्ता की आंतरिक गतिशीलता की चर्चा जोरों पर थी।
फाइनेंशियल टाइम्स ने सात सूत्रों के हवाले से खुलासा किया कि मई के मध्य में हुई दो दिवसीय वार्ता के दौरान सी शी ने जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची पर ‘पुनर्सैन्यीकरण’ का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। [A2][A3] अखबार के मुताबिक, शी ‘जापान पर चर्चा के दौरान तेज़ और उत्तेजित स्वर में बात करने लगे’, जिसने अमेरिकी अधिकारियों को चौंका दिया क्योंकि यह विषय पहले कभी द्विपक्षीय वार्ता में प्रमुखता से नहीं उठा था। [A3][A6] सूत्रों ने इस हिस्से को ‘शिखर वार्ता का सबसे गर्म हिस्सा’ बताया। [A3][A4]
अरबी और इतालवी मीडिया ने इस हंगामेदार पल का अतिरिक्त ब्योरा देते हुए बताया कि शी ने जापान के बढ़ते सैन्य खर्च और संवैधानिक बंधनों में ढील को क्षेत्रीय शांति के लिए ख़तरा करार दिया। [A4] ट्रंप ने ताकाइची का बचाव करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया से बढ़ते ख़तरे के मद्देनज़र टोक्यो को अपनी रक्षा क्षमताएं मजबूत करनी पड़ रही हैं। [A4][A6] बैठक समाप्त होते ही ट्रंप ने एयर फोर्स वन से ताकाइची को फोन कर इस पूरे प्रकरण पर चर्चा की, जो रणनीतिक नज़दीकियों का संकेत देता है। [A4]
चीनी विदेश मंत्रालय का सख्त खंडन केवल एक तथ्यात्मक असहमति नहीं है, बल्कि यह पूर्वी एशिया में बदलती सुरक्षा संरचना को लेकर गहरी कूटनीतिक दरार को उजागर करता है। जहां पश्चिमी और जापानी स्रोत शी की तीखी प्रतिक्रिया को चीन की बेबाक शैली के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं बीजिंग का आधिकारिक रुख पूरी घटना को मनगढ़ंत ठहराता है। यह विरोधाभास दिखाता है कि क्षेत्र में सैन्य विस्तार और ऐतिहासिक आशंकाओं पर चीन-अमेरिका संवाद कितना संवेदनशील बना हुआ है। आगे चलकर, जापान की रक्षा नीति को लेकर इस तरह की अनकही तनातनी, ट्रंप प्रशासन के हस्तक्षेप के बावजूद, चीन के साथ जापान के रिश्तों को और जटिल बना सकती है।
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