पर्थ में टॉडलर की रोकी जा सकने वाली मौत से वैश्विक स्वास्थ्य संकटों की पड़ताल
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक कोरोनर ने पाया कि 21 महीने के बच्चे की मृत्यु रक्त परीक्षण न करने की चूक से हुई। युवाओं में कैंसर, दुर्लभ बीमारियाँ और हिंसा की घटनाएँ दुनिया भर में जीवन की नाज़ुकता को दर्शाती हैं।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक कोरोनर की जांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया है: 21 महीने का बच्चा संदीपन धर, जिसकी मार्च 2024 में जूंडालप हेल्थ कैंपस में मौत हो गई, वह संभवतः बचाई जा सकती थी। अभिनय राज्य कोरोनर सारा लिंटन ने अपने 86 पृष्ठों के निष्कर्ष में कहा कि पहली बार अस्पताल आने पर एक रक्त परीक्षण कर लिया गया होता, तो अज्ञात तीव्र ब्लास्टोमा ल्यूकेमिया का पता चल जाता और शिशु की जान बच जाती [A7][A8]। यह 'एक चूक से भी बड़ी भूल' थी, जिसने छोटे से परिवार को तबाह कर दिया।
यह घटना दुनिया भर में युवा जिंदगियों पर मंडराते स्वास्थ्य संकटों की एक कड़ी है। स्विट्जरलैंड से आई खबरों में सामने आया कि सोफी रेन्ज़ नामक महिला ने अपने दूसरे बच्चे के साथ गर्भवती होने के दौरान स्तन कैंसर का पता चलने पर कीमोथेरेपी शुरू की; उनके साथी मरीज़ तान्या केवान की बेटी को पालक परिवार में भेजना पड़ा [A1]। इसी तरह, अमेरिका में एक डॉक्टर ने बताया कि 45 साल से कम उम्र के लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर तेज़ी से बढ़ रहा है—एक 22 वर्षीय युवती का ट्यूमर इतना बड़ा था कि उसकी आंत लगभग बंद हो गई थी [A6]। और रोमानिया मूल की कनाडाई माँ मार्सेला ज़बेरिया अपने दो छोटे बेटों के लिए स्टेम सेल डोनर की गुहार लगा रही हैं, जो विस्कॉट-एल्ड्रिच सिंड्रोम नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहे हैं; यह सिर्फ़ हर दस लाख में तीन बच्चों को प्रभावित करता है [A5]। इन सभी मामलों में समय पर पहचान और उचित संसाधनों की भारी कमी झलकती है।
कनाडा के फ्रेंच भाषी अख़बार 'ल देव्वार' में एक लेख ने इस त्रासदी को दार्शनिक धरातल पर रखा: जो समाज गति की पूजा करता है और धीमेपन से घृणा करता है, वह बीमारी को एक बुरा सपना बना देता है। कैंसर या किसी गंभीर रोग का निदान आपको समाज की धारा के विपरीत जाने पर मजबूर कर देता है—ठहराव का आदेश देता है [A4]। लेखक का तर्क है कि युवा और तंत्रिका-विशिष्ट प्रोफ़ाइल का गुणगान बुज़ुर्गों और बीमारों जैसे अलग लय वाले समूहों को हाशिये पर धकेल देता है।
इन स्वास्थ्य संकटों के बीच, हिंसक घटनाएँ भी जीवन की क्षणभंगुरता को रेखांकित करती हैं। अटलांटा में ब्रिटेन के मूल निवासी और अमेरिकी नौसेना के पूर्व सैनिक ओलाओलुकिटान एडन एबेल पर घर के एयर कंडीशनिंग को लेकर हुए तीखे झगड़े के बाद घर से बाहर निकलकर तीन लोगों पर गोली चलाने का आरोप है, जिसमें दो की मौत हो गई—एक मृतका होमलैंड सिक्योरिटी की ऑडिटर थी जो अपने कुत्ते को टहला रही थी [A3]। मॉन्ट्रियल में चल रहे एक मुकदमे में, एक महिला ने अदालत को बताया कि कैसे उसका साथी चाड और जेडन पिनेल नामक भाइयों द्वारा कथित रूप से चाकू मारे जाने के बाद उसकी गोद में दम तोड़ गया—उसने उसकी नब्ज़ टटोली, पर कोई धड़कन नहीं थी [A2]। ये मामले दिखाते हैं कि रोज़मर्रा के तनाव किस तरह अपूरणीय क्षति में बदल सकते हैं, और प्रणालीगत असफलताओं के समानांतर चलते हैं।
दुनिया भर के ये किस्से एक समान संदेश देते हैं: चाहे वह अस्पताल की प्रोटोकॉल की चूक हो, दुर्लभ बीमारियों के लिए डोनर का अभाव, या सामाजिक अधीरता, मानव जीवन की रक्षा के लिए अधिक सजगता, करुणा और सामूहिक जिम्मेदारी की ज़रूरत है। जैसे-जैसे युवाओं में कैंसर बढ़ रहा है और आनुवंशिक विकारों की पहचान हो रही है, चिकित्सा प्रणालियों को रूढ़िवादी सोच त्यागकर असामान्य लक्षणों को भी गंभीरता से लेना होगा। साथ ही, समाज को गति के प्रति अपने जुनून पर सवाल उठाना होगा ताकि कमज़ोर लोगों को हाशिये पर न ढकेला जाए। यह तभी संभव होगा जब हम प्रत्येक जीवन की कीमत पहचानें, चाहे वह ऑस्ट्रेलिया का कोई शिशु हो या अटलांटा की सड़क पर टहलती कोई महिला।
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