क्यूबा में ईंधन संकट चरम पर: सरकार बोली—एक बूंद भी नहीं बची, हवाना में प्रदर्शन
अमेरिकी नाकेबंदी के कारण क्यूबा का डीज़ल और ईंधन तेल पूरी तरह समाप्त; 22 घंटे तक ब्लैकआउट, पूर्वी प्रांतों में ग्रिड ध्वस्त, हवाना में बर्तन पीटकर सड़कों पर उतरे लोग। ट्रंप ने सहायता और मुफ़्त इंटरनेट की पेशकश की।

क्यूबा ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि उसके पास बिजली संयंत्र चलाने लायक डीज़ल और ईंधन तेल का एक भी भंडार नहीं बचा। ऊर्जा मंत्री विसेंते दे ला ओ लेवी ने बुधवार देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारे पास रिज़र्व का एक कण भी शेष नहीं—बिल्कुल कुछ नहीं।” [A5][A9] इसके अगले ही दिन राष्ट्रीय ऊर्जा ग्रिड ध्वस्त हो गया, जिससे गुआंतानामो से सिएगो दे आविला तक के सभी पूर्वी प्रांत अंधेरे में डूब गए। [A3][A6] राजधानी हवाना में पहले से ही 22 घंटे तक की बत्ती गुल हो रही थी, और गुरुवार को वहाँ भी 24 घंटे की कटौती दर्ज की गई। [A1][A6] एक साथ 70 फ़ीसदी द्वीप की बिजली चले जाने का रिकॉर्ड पहले ही बन चुका था, जबकि माँग 3,150 मेगावॉट के मुक़ाबले उत्पादन मात्र 976 मेगावॉट रह गया था। [A1]\n\nहवाना के कई मोहल्लों में बुधवार रात सैकड़ों लोगों ने बर्तन-थाली बजाकर, सड़कें जाम कर और “बिजली चालू करो!” के नारे लगाकर प्रदर्शन किया। [A4][A6] समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस साल ऊर्जा संकट गहराने के बाद राजधानी में ये सबसे बड़े विरोध-प्रदर्शन थे। [A4] सरकार ने संकट की सारी ज़िम्मेदारी अमेरिकी “तेल नाकेबंदी” पर डालते हुए इसे “नरसंहारक” तक क़रार दिया। [A5][A2] राष्ट्रपति मिगेल डियाज़-कानेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी घेरेबंदी के चलते ही क्यूबा के जनरेटर ईंधन के अभाव में बंद पड़े हैं और शाम के पीक समय में दो हज़ार मेगावॉट से अधिक की कमी रहेगी। [A2] वास्तव में, जनवरी 2026 के अंत में वॉशिंगटन ने प्रतिबंध और कड़े कर दिए थे, जिससे वेनेज़ुएला और मेक्सिको जैसे मुख्य आपूर्तिकर्ता क्यूबा को तेल भेजने से कतराने लगे। [A4][A9]\n\nविभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की मीडिया ने इस संकट को अलग-अलग कोण से देखा। लातिन अमेरिकी स्रोतों ने सरकारी बयानों और नाकेबंदी के प्रभाव पर ज़ोर दिया, [A1][A2][A7][A8] जबकि यूरोपीय प्रेस ने प्रदर्शनों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हैरान करने वाली पेशकश को प्रमुखता दी—ट्रंप ने एक ओर जहाँ नाकेबंदी से क्यूबा को घुटनों पर ला दिया, वहीं दूसरी ओर सहायता सामग्री और मुफ़्त इंटरनेट का ऑफ़र दिया। [A5] संयुक्त राष्ट्र पहले ही इस नाकेबंदी की आलोचना कर चुका है, यह कहते हुए कि इससे क्यूबावासियों की भोजन, स्वास्थ्य सेवा और बिजली तक पहुँच प्रभावित हो रही है। [A4] यह विरोधाभास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दोहरे चरित्र को उजागर करता है—एक हाथ से दबाव, दूसरे से “मानवीय” छवि।\n\nआगे का रास्ता अत्यंत अनिश्चित है। क्यूबा के पास अब केवल अपने कुओं से निकलने वाली गैस और घरेलू कच्चा तेल है, जो राष्ट्रीय माँग का एक अंश ही पूरा कर सकता है। [A5][A8] सौर ऊर्जा परियोजनाएँ अभी शैशव अवस्था में हैं। विशेषज्ञों की मानें तो निकट भविष्य में ग्रिड का बार-बार ध्वस्त होना और सामाजिक असंतोष का भड़कना तय है। अमेरिकी प्रशासन से तत्काल राहत के संकेत नहीं हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद नाकेबंदी यथावत है। ऐसे में एक करोड़ की आबादी वाले इस द्वीप पर बिजली की एक-एक घंटे की आपूर्ति भी भारी राजनीतिक कीमत माँग रही है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The energy crisis in Cuba is a direct result of the US economic blockade, which has cut off fuel supplies. The government reports a deficit of over 2,000 megawatts and up to 22 hours of blackouts daily. Protests in Havana are fueled by the unbearable conditions imposed by this 'genocidal' blockade.
Cuba's energy minister claims there is absolutely no fuel left, blaming the US blockade after Venezuela's oil deliveries were interrupted. The communist one‑party state faces rolling blackouts of up to 22 hours, with protests erupting in Havana. The government's assertion of total fuel exhaustion is reported with some caution.
Hundreds of people in Havana staged 'casserole protests' against the power cuts after more than 20 hours of blackouts. They blocked streets, burned rubbish, and chanted slogans criticizing the Cuban government. The authorities are under pressure as the energy crisis worsens with no end in sight.
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