इटली ने डीज़ल छूट आधी कर ईंधन उत्पाद शुल्क कटौती बढ़ाई, ऑस्ट्रेलिया-ब्राज़ील में भी राहत की तैयारी
रोम— सरकार ने पेट्रोल पर 5 सेंट और डीज़ल पर 10 सेंट प्रति लीटर की कमी 6 जून तक बढ़ाई, ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल टली, 300 मिलियन यूरो कर क्रेडिट; वैश्विक स्तर पर अस्थायी सब्सिडी की ओर रुझान।

इटली की मेलोनी सरकार ने ईरान युद्ध से उपजे ऊर्जा संकट के बीच ईंधन उत्पाद शुल्क में कटौती को एक बार फिर बढ़ा दिया है, लेकिन इस बार डीज़ल पर राहत आधी कर दी गई है। शुक्रवार देर रात मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद जारी डिक्री के अनुसार, पेट्रोल पर 5 सेंट प्रति लीटर की छूट यथावत रहेगी, जबकि डीज़ल पर छूट 20 से घटाकर 10 सेंट कर दी गई है — वैट प्रभाव मिलाकर यह कमी 24.4 से 12.2 सेंट तक पहुँच जाती है। यह उपाय 23 मई से 6 जून तक लागू रहेगा, जो मार्च के बाद चौथा विस्तार है। सरकार ने ऑटोट्रांसपोर्ट क्षेत्र को 300 मिलियन यूरो का कर क्रेडिट देने की भी घोषणा की, जिससे 25-29 मई के लिए नियोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल टल गई।
इस फ़ैसले से उपभोक्ता संगठन नाराज़ हैं। कोडाकॉन्स के अनुसार, डीज़ल की कीमतें फिर से 2 यूरो प्रति लीटर के पार पहुँच सकती हैं, जिससे इटली यूरोप में सबसे महँगे डीज़ल वाले देशों में शामिल हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने तिमाही उत्पाद शुल्क रिफ़ंड की अवधि को 60 से घटाकर 30 दिन करने और कर भुगतान टालने जैसी रियायतें देकर ट्रक संचालकों को शांत किया। इन सबके लिए धन की व्यवस्था वैट के अतिरिक्त राजस्व, एंटीट्रस्ट जुर्मानों और दूसरे बजट कटौतियों से की गई है, जिसमें ऑटोमोटिव फ़ंड और स्थानीय परिवहन निवेश भी शामिल हैं।
वैश्विक परिदृश्य में यह इटली की अकेली पहल नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में भी अस्थायी ईंधन उत्पाद शुल्क कटौती जून के अंत में समाप्त होने वाली है, और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने स्पष्ट किया है कि इसे अस्थायी ही रहने दिया जाएगा। वहाँ पेट्रोल-डीज़ल पर 26.3 सेंट प्रति लीटर की छूट दी गई थी, लेकिन मई के बजट में इसे बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। ब्राज़ील में लूला सरकार ने पेट्रोल पर 0.44 रियाल प्रति लीटर सब्सिडी का प्रस्ताव रखा है, जो संघीय करों का लगभग आधा है; यह फ़ैसला सतर्कता से लिया गया ताकि सार्वजनिक वित्त पर अधिक दबाव न पड़े।
इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच समानता यह है कि सभी अस्थायी राहत को प्राथमिकता दे रहे हैं, स्थायी कर संरचना में बदलाव नहीं कर रहे। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान संघर्ष जारी रहने तक ऐसे अल्पकालिक उपाय ही राजनीतिक दबाव को कम कर सकते हैं, लेकिन इनकी लागत बढ़ती जा रही है। इटली में अब तक ऊर्जा संकट पर 2 बिलियन यूरो खर्च हो चुके हैं, और मात्र दो सप्ताह के विस्तार पर 134 मिलियन यूरो का अतिरिक्त बोझ आएगा।
आने वाले सप्ताहों में सबकी निगाहें 6 जून के बाद की स्थिति पर होंगी। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है या कच्चे तेल के दाम और ऊपर जाते हैं, तो इटली, ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील तीनों को अपनी राजकोषीय सीमाओं और सामाजिक माँगों के बीच एक मुश्किल संतुलन साधना होगा।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
The Italian government extended fuel excise cuts until early June but halved the diesel discount, drawing criticism from consumer groups. To appease truckers, it allocated 300 million euros in tax credits, averting a national strike. The measures, the fourth extension in three months, aim to cushion the impact of high fuel prices from the Iran war, but the fiscal cost is considerable.
Japan's ruling party secretary general suggested that the gasoline price support measures, which cap prices at around 170 yen per liter, may need to be revised due to the large fiscal burden. While acknowledging the importance of addressing price hikes, he emphasized the need to consider adjustments. The statement reflects growing concerns over the sustainability of the subsidy amid the prolonged Iran conflict.
Australia's fuel excise cut, introduced in April to combat soaring prices from the Iran war, is expected to remain temporary as the government monitors the situation. Energy Minister Chris Bowen indicated that the three-month reduction, which lowers petrol and diesel by 26.3 cents per litre, is a temporary measure. The government has not yet decided on an extension, balancing relief for consumers with fiscal prudence.
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