भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु हथियार, वैश्विक खर्च 119 अरब डॉलर के रिकॉर्ड पर
परमाणु शक्तियों ने 2025 में हथियारों पर 19% अधिक खर्च किया; SIPRI के अनुसार भारत ने पहली बार 12 हथियार परिचालित किए, पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच परमाणु नीति में बड़ा बदलाव।

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट ने भारत की परमाणु नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव को रेखांकित किया है – पहली बार भारत ने शांतिकाल में 12 परमाणु हथियारों को सक्रिय रूप से तैनात किया है। [A2] [A3] यह कदम दशकों पुरानी उस सोच से हटकर है जिसके तहत परमाणु बम और उनकी प्रक्षेपण प्रणालियों को अलग-अलग रखा जाता था। संस्थान के वर्ष पुस्तिका 2026 के अनुसार भारत का कुल परमाणु भंडार अब 190 हथियारों तक पहुंच गया है, जिसमें ये 12 परिचालित हथियार मुख्य रूप से बढ़ती परमाणु पनडुब्बी क्षमता से जुड़े हैं। [A2] [A3] यह विकास ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल बाद आया है, जिसमें भारतीय हमलों ने पाकिस्तान के परमाणु बुनियादी ढांचे से जुड़े स्थलों को निशाना बनाया था, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है। [A10]
वैश्विक स्तर पर परमाणु खर्च भी अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंच गया है। परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान (ICAN) की रिपोर्ट के अनुसार, नौ परमाणु संपन्न देशों ने 2025 में अपने शस्त्रागारों पर कुल 119 अरब डॉलर खर्च किए, जो 2024 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। [A1] [A4] [A6] इसमें सबसे आगे अमेरिका रहा, जिसने 69.2 अरब डॉलर खर्च कर एक साल में 22 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की। [A4] [A7] चीन 13.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे और ब्रिटेन 12.6 अरब डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जबकि रूस ने 9.5 अरब डॉलर खर्च किए। [A7] भारत ने भी अपना परमाणु बजट बढ़ाया, हालांकि वह इन देशों से काफी पीछे रहा। [A1] यह आंकड़े प्रति सेकंड 3,700 डॉलर से अधिक के खर्च के बराबर हैं, जिस पर ICAN ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक नई परमाणु हथियारों की दौड़ के दौर में प्रवेश कर चुकी है। [A5] [A6]
यूरोपीय और फारसी मीडिया ने इस उछाल को निरस्त्रीकरण के दशकों के उलट के रूप में देखा है। इतालवी अखबार लिबेरो क्वोटिडियानो ने SIPRI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया में कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 9,745 सक्रिय हैं और 2,100 से 2,200 पहले ही बैलिस्टिक मिसाइलों पर लगे हुए हैं। [A9] रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि राष्ट्र अब परमाणु बम को अंतिम उपाय के बजाय प्रदर्शन के औजार के रूप में देखने लगे हैं, जिससे गलत अनुमान की आशंका बढ़ गई है। [A9] बीबीसी फारसी और रेडियो फर्दा ने ICAN के हवाले से कहा कि यह निवेश आने वाले दशकों में और बढ़ने वाला है तथा हथियारों का आधुनिकीकरण तेज़ हो रहा है। [A5] [A6]
भारत का यह कदम व्यापक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच आया है। भारत 92.1 अरब डॉलर के सैन्य खर्च के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्चकर्ता बन गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। [A8] विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की ‘न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता’ की नीति को पुनर्परिभाषित कर सकती है और इसका सीधा संबंध चीन तथा पाकिस्तान के साथ बदलते सुरक्षा समीकरणों से है। SIPRI का आकलन है कि हथियारों के भंडारण से सक्रिय तैनाती की ओर यह रुझान वैश्विक स्तर पर स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि परमाणु शक्तियां अब प्रतिक्रिया समय को घटा रही हैं और परिचालन तत्परता बढ़ा रही हैं। [A9]
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
एसआईपीआरआई के अनुसार, भारत ने पहली बार शांतिकाल में परमाणु हथियार तैनात किए हैं, जो उसकी प्रतिरोध मुद्रा में बदलाव को दर्शाता है। अब उसके पास १९० हथियार हैं, जो पाकिस्तान से अधिक हैं, लेकिन चीन के विशाल शस्त्रागार से काफी कम हैं। इस कदम को क्षेत्रीय सामरिक घटनाक्रम के प्रति एक संतुलित प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया गया।
परमाणु-सशस्त्र देशों ने 2025 में अपने शस्त्रागारों पर रिकॉर्ड 119 अरब डॉलर खर्च किए, जो 19% की वृद्धि है और ICAN रिपोर्ट इसे पूर्ण पैमाने की हथियारों की होड़ की आधिकारिक बहाली बताती है। अमेरिका के नेतृत्व में यह उछाल, दशकों के निरस्त्रीकरण प्रयासों को उलट कर वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा देता है। पर्यवेक्षक परमाणु तनाव के खतरनाक सामान्यीकरण पर अलार्म बजा रहे हैं।
ICAN के अनुसार, 2025 में अमेरिका ने अपने परमाणु शस्त्रागार पर 69.2 अरब डॉलर खर्च किए, जो अन्य सभी परमाणु शक्तियों के संयुक्त खर्च से अधिक है। वैश्विक व्यय में उछाल के बीच, वाशिंगटन का विशाल बजट इसमें सबसे बड़ा हिस्सा है, जो इसे नई हथियारों की होड़ का मुख्य चालक उजागर करता है। रूसी मीडिया इस असंतुलन को रेखांकित करते हुए पश्चिमी निरस्त्रीकरण बयानबाजी पर संदेह प्रकट करता है।
परमाणु शक्तियों ने 2025 में अपने सामूहिक खर्च को बढ़ाकर लगभग 119 अरब डॉलर कर दिया, जो 19% की छलांग है और ICAN चेतावनी देता है कि यह एक खतरनाक नई हथियार प्रतिस्पर्धा का संकेत है। आने वाले दशकों में और भी बड़े निवेश की योजनाएँ चल रही हैं, जिससे टकराव का जोखिम बढ़ रहा है। रिपोर्ट नौ परमाणु-सशस्त्र राज्यों की विनाशकारी परिणामों के प्रति गैर-जिम्मेदारी पर ध्यान आकर्षित करती है।
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