ट्रंप-नेतन्याहू में तनातनी: ईरान पर हमले रोकने पर बवाल, बिबी के 'बालों में लगी आग'
ट्रंप ने ईरान संग कूटनीति के लिए कतर-पाक प्रस्ताव पर हमले टाले, नेतन्याहू नाराज़। वाशिंगटन-तेल अवीव के रिश्तों में दरार के संकेत।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान युद्ध को लेकर एक घंटे की तनावपूर्ण फोन बातचीत ने दोनों सहयोगियों के रणनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। मंगलवार 19 मई को हुई इस कॉल में नेतन्याहू ने ईरान पर हवाई हमले फिर से शुरू करने पर ज़ोर दिया, जबकि ट्रंप ने कूटनीति को और समय देने की बात कही। एक सूत्र ने एक्सियोस को बताया कि 'बिबी के बालों में आग लगी हुई थी'। बाद में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा, 'नेतन्याहू वही करेंगे जो मैं चाहता हूं।'
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, ट्रंप ने 19 मई को प्रस्तावित हमले उन खाड़ी देशों के अनुरोध पर स्थगित कर दिए जो क्षेत्रीय युद्धविराम चाहते हैं। व्हाइट हाउस का मानना है कि कुछ दिन इंतज़ार करने से एक ऐसे समझौते का रास्ता खुल सकता है जो होरमुज़ जलडमरूमध्य से तेल आवाजाही बहाल करे और वैश्विक तेल की कीमतों को नीचे लाए। अमेरिकी सीनेट में भी ट्रंप के युद्ध अधिकार को सीमित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा है, हालांकि राष्ट्रपति ने आने वाले दिनों में नए हमलों की धमकी दी है।
इज़राइली पक्ष की झलक इस्राइली और यूरोपीय मीडिया में तीव्र नाराज़गी के रूप में दिखी। जर्मन अखबार ने लिखा, 'नेतन्याहू बातचीत के बाद गुस्से से पागल थे' और स्वीडिश रिपोर्ट में कहा गया 'सिर में आग लगी हुई थी'। नेतन्याहू का मानना है कि देरी से ईरान को अपनी सैन्य क्षमताएं बहाल करने का मौका मिलेगा और वे ईरान के बुनियादी ढांचे पर ज़ोरदार हमले चाहते हैं। हारेत्ज़ ने अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि दो दिन पहले भी दोनों के बीच एक और तनावपूर्ण बात हुई थी, और संभावना है कि नेतन्याहू जल्द ही वाशिंगटन का दौरा करेंगे।
इस बीच, क्षेत्रीय मध्यस्थों ने तेज़ी दिखाई है। कतर और पाकिस्तान ने सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के सहयोग से एक 14-सूत्रीय योजना तैयार की है जिसमें 30 दिनों की बातचीत अवधि का प्रस्ताव है। फ्रांसीसी रिपोर्ट के अनुसार, यह 'आशय पत्र' युद्ध से बाहर निकलने का खाका खींचता है। एशियाई मीडिया के अनुसार, ईरान ने भी वाशिंगटन को नया शांति प्रस्ताव भेजा है, जिससे ट्रंप को लगता है कि एक 'डील' संभव है।
आगे का रास्ता चट्टानी है। अगर ट्रंप का कूटनीतिक प्रयास विफल हुआ तो नेतन्याहू की सैन्य कार्रवाई की मांग और ज़ोर पकड़ेगी। अभी अमेरिकी-इज़राइली गठबंधन में आई दरार इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय शक्तियां पहले से अधिक सक्रिय हो गई हैं और तेल बाज़ार की अनिश्चितता इस पूरे विवाद को एक नाजुक मोड़ पर खड़ा कर रही है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
Israeli press reports Trump's statement that Netanyahu will do what he wants, but also highlights the domestic Israeli context, with Trump criticizing how Netanyahu is treated. The article emphasizes coordination between the two leaders on Iran, without showing a clear rift.
Latin American media emphasize Trump's statement that Netanyahu 'will do everything I want' regarding Iran, presenting it as a display of dominance. They also report the tensions in the phone call and Netanyahu's push to resume strikes, creating a picture of urgency and conflict.
Arab press focuses on diplomatic efforts and a proposed 'letter of intent' for a ceasefire with Iran. The tense phone call between Trump and Netanyahu is described as a disagreement over strategy, with more cautious tones oriented towards a negotiated solution.
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