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अमेरिका ने रूस-ईरान तेल पर छूट की लाइसेंस अवधि नहीं बढ़ाई, प्रतिबंध पूरी तरह बहाल

होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के बीच मार्च में दी गई एक महीने की अस्थायी रियायत 11 अप्रैल को समाप्त हो गई, जिससे रूसी और ईरानी कच्चे तेल पर प्रतिबंध फिर से सख्त हो गए हैं।

अर्थव्यवस्था7 स्रोत2 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 09:15

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट कर दिया कि रूस और ईरान से तेल की बिक्री की अनुमति देने वाली सामान्य लाइसेंस की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी [A1]। यह लाइसेंस मार्च के मध्य में ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में स्थिरता लाने और बढ़ती क़ीमतों पर लगाम लगाने के इरादे से जारी किया गया था [A6]। इसके तहत 12 मार्च से पहले टैंकरों पर लद चुके रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के सौदों को कानूनी मंज़ूरी दी गई थी [A2]। बेसेंट ने इसे ‘संकीर्ण और अल्पकालिक’ क़दम बताते हुए कहा कि पारगमन में मौजूद वह पूरा तेल अब बिक चुका है, इसलिए लाइसेंस का विस्तार करने का कोई औचित्य नहीं है [A1][A8]।

मॉस्को ने इस फ़ैसले पर सीमित प्रतिक्रिया दी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने 14 अप्रैल को कहा कि उन्हें किसी संभावित विस्तार की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी [A1]। दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने 10 अप्रैल को व्हाइट हाउस से आग्रह किया था कि इस रियायत को जारी न रखा जाए। सीनेट अल्पसंख्यक नेता चक शूमर, जीन शाहीन और एलिज़ाबेथ वॉरेन ने दलील दी कि इस एक महीने की ढील ने रूस और उसके ‘मध्यस्थों’ को चार अरब डॉलर से अधिक की कमाई करा दी [A5][A6]। वाशिंगटन का आकलन भी लगभग इतनी ही रक़म का है [A2]।

रूसी मीडिया ने इस घटनाक्रम को होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से उपजे संकट से जोड़कर देखा, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुज़रता है [A6]। इन रिपोर्टों में ज़ोर दिया गया कि यह ढील पूरी तरह तकनीकी थी—पहले से लदे तेल की निकासी—और इसका रूस के लिए बड़ा राजस्व लाभ केवल इसलिए हुआ क्योंकि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय क़ीमतें युद्ध के कारण आसमान छू रही थीं। फोर्ब्स रूस और कोमर्सांट जैसे प्रकाशनों ने रेखांकित किया कि अमेरिकी वित्त विभाग ने 19 मार्च को दस्तावेज़ को संशोधित कर कुछ परिचालनों पर रोक भी लगा दी थी, लेकिन मुख्य छूट की समयसीमा 11 अप्रैल को समाप्त हुई [A5]।

भारत जैसे बड़े ख़रीदारों पर इसकी सीधी चोट पड़ेगी [A3]। भारतीय रिफ़ाइनर रूसी यूराल क्रूड के सबसे बड़े ग्राहकों में रहे हैं और ईरानी तेल के पारंपरिक आयातक भी। अब जबकि सामान्य लाइसेंस समाप्त हो चुका है, इन देशों को सख्त द्वितीयक प्रतिबंधों के डर से वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेज़ी से बढ़ना होगा, जो तेल बाज़ार में नई अस्थिरता पैदा कर सकता है। भारत टुडे ने इस रुख़ को स्पष्ट करते हुए लिखा कि ट्रंप प्रशासन ने सीमित ख़रीद की इजाज़त देने वाली इस छूट को नवीनीकृत नहीं करने का फैसला किया है [A3]।

आगे की राह संकेत देती है कि अमेरिका रूस और ईरान दोनों पर आर्थिक दबाव एक साथ कड़ा कर रहा है। जहाँ रूस के मामले में यह क़दम अस्थायी बाज़ार स्थिरता के बाद पुरानी सख़्त नीति पर लौटने जैसा है, वहीं ईरान पर यह होर्मुज संकट के बीच तेल निर्यात को शून्य करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा लगता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ जल्दी नहीं सुधरीं तो गर्मियों में कच्चे तेल के दाम फिर उछाल मार सकते हैं।

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