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यूनियन बर्लिन ने मैरी-लुईस एटा को बनाया कोच, यूरोप की टॉप-5 लीग में इतिहास रचा

34 वर्षीय पूर्व चैंपियंस लीग विजेता को पुरुष टीम की कमान सौंपी गई, पाँच मैचों में रेलीगेशन से बचाने की चुनौती।

समाज8 स्रोत4 भाषाएँ3 मिनट पढ़नाअपडेट 10:44

जर्मनी के यूनियन बर्लिन ने फुटबॉल इतिहास का एक नया अध्याय लिखते हुए मैरी-लुईस एटा को पुरुष टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। यह पहला अवसर है जब यूरोप की शीर्ष पाँच लीगों में से किसी में किसी महिला ने पुरुष पेशेवर टीम की कमान संभाली है। एटा इससे पहले क्लब की अंडर-19 टीम की कोच थीं और अगले सीज़न से महिला टीम की मुख्य कोच बनने वाली थीं, लेकिन अब उन्हें बुंडेसलीगा में टीम को रेलीगेशन से बचाने की तात्कालिक ज़िम्मेदारी दी गई है।

यह फ़ैसला स्टेफ़ेन बाउमगार्ट को बर्ख़ास्त किए जाने के बाद लिया गया, जिनकी टीम को हाइडेनहाइम जैसी अंतिम पायदान की टीम के ख़िलाफ़ 3-1 से हार का सामना करना पड़ा था। क्लब के सीईओ होर्स्ट हेल्ड्ट ने स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टीम का प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा है—पिछले 14 लीग मैचों में मात्र दो जीत और एक “विनाशकारी” दूसरा हाफ़। इसी निराशाजनक क्रम ने प्रबंधन को एक साहसिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया, जिसे इतालवी मीडिया ने “कैम्बियो डी प्रोस्पेटिवा” यानी नज़रिए का बदलाव करार दिया है।

जर्मन अख़बार बिल्ड की एक रिपोर्टर ने एटा को पहले ही अंडर-19 मैच के दौरान साइडलाइन से चीख़ते हुए देखा था: “हर छोटी चीज़ पर सीटी क्यों बजा रहे हो, एक लाइन तो पकड़ो, हे भगवान!” इस बात पर उन्हें पीला कार्ड भी मिला था। रिपोर्टर का कहना था कि उसी क्षण साफ़ हो गया था कि अगर कोई महिला यह क़दम उठा सकती है तो वह एटा ही हैं। यह वाकया उनके तीखे और स्पष्टवादी व्यक्तित्व को उजागर करता है, जो अब बुंडेसलीगा के दबाव में काम आ सकता है।

फ़्रांसीसी अख़बार ल तां ने इसे बुंडेसलीगा के इतिहास का एक पन्ना बताया, जबकि ब्रिटिश द इंडिपेंडेंट ने लिखा कि एटा ऐसी टीम को संभाल रही हैं जो पिछले 14 मैचों में सिर्फ़ दो बार जीती है। इतालवी अख़बार इल फ़ातो कोतिदियानो ने इस नियुक्ति को एक “युगांतरकारी मोड़” कहा, जो महज़ तकनीकी फ़ैसला न होकर सोच में आए बदलाव का प्रतीक है। सभी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एटा 2023 में ही शीर्ष यूरोपीय लीगों में पहली सहायक कोच बनकर इतिहास रच चुकी थीं।

एटा के सामने अब पाँच मैचों में टीम को रेलीगेशन से बचाने की चुनौती है। 2010 में टर्बाइन पॉट्सडैम के साथ महिला चैंपियंस लीग जीत चुकीं यह कोच अपने अनुभव और जुझारू रवैये के दम पर क्लब को सुरक्षित रखने की कोशिश करेंगी। यह नियुक्ति यूरोपीय फुटबॉल में महिला कोचों के लिए एक नया दरवाज़ा खोल सकती है, और अगर एटा सफ़ल होती हैं तो यह कदम स्थायी बदलाव का आधार बन सकता है।

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