यूरोपीय संघ का आपात ऊर्जा प्लान: अनिवार्य टेलीवर्क, सस्ता सार्वजनिक परिवहन और बिजली पर कर में कटौती
मध्य पूर्व युद्ध से बढ़े ऊर्जा संकट के बीच ब्रसेल्स उद्योगों से हवाई यात्रा घटाने, हीटिंग कम करने और कमज़ोर परिवारों को वाउचर देने की सिफ़ारिश करेगा।

मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से यूरोप की ऊर्जा लागत 22 अरब यूरो से अधिक बढ़ गई है। इस संकट से निपटने के लिए यूरोपीय आयोग 22 अप्रैल को 'एक्सीलरेटईयू' (AccelerateEU) नामक आपात योजना का मसौदा पेश करने जा रहा है, जिसमें स्वैच्छिक मांग में कटौती को केंद्र में रखा गया है। जर्मन पर्यावरण सहायता संस्था ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आयोग 'ग्रीन डील' पर कायम है, जबकि कुछ सदस्य देश पीछे हटते दिख रहे हैं।
स्पेनिश और इतालवी मीडिया में लीक हुए मसौदे के अनुसार, परिवहन क्षेत्र पर सबसे कड़े कदम उठाने की तैयारी है। आयोग कंपनियों से साफ़ कह रहा है कि काम के सिलसिले में हवाई यात्रा से बचें और जहाँ संभव हो, ट्रेन का इस्तेमाल करें। साथ ही सदस्य देशों से ट्रेन किराया घटाने को कहा जाएगा। व्यक्तिगत यात्रा के लिए हर हफ़्ते कम से कम एक दिन अनिवार्य टेलीवर्क (स्मार्ट वर्किंग) की सिफ़ारिश की गई है, ताकि आवागमन का ईंधन खर्च बचाया जा सके। सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी वाले पास, अस्थायी गति सीमाएँ और 'कार-मुक्त दिवस' जैसे उपाय भी प्रस्तावित हैं।
इतालवी पक्ष ने घरेलू हीटिंग और सामाजिक सुरक्षा पर ख़ास ज़ोर दिया है। योजना के तहत परिवारों को हीटिंग और कूलिंग का उपयोग सीमित करने, ख़ाली कमरों में खपत रोकने और कंडेंसिंग बॉयलरों का तापमान 60 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने की सलाह दी गई है। कमज़ोर परिवारों के लिए ऊर्जा वाउचर, बिजली बिलों पर उत्पाद शुल्क में कटौती और संकट से सबसे अधिक प्रभावित आर्थिक क्षेत्रों को सार्वजनिक सहायता देने का प्रावधान भी मसौदे में शामिल है। हालाँकि, ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफ़े पर यूरोपीय कर या स्थिरता संधि के नियमों में ढील का कोई ज़िक्र नहीं है।
जर्मन दृष्टिकोण से सबसे अलग पहलू बिजली पर कर का जीवाश्म ईंधन से सस्ता होना है, जो दीर्घकालिक विद्युतीकरण को गति देगा। आयोग ने यूरोपीय संघ स्तर पर एक नया विद्युतीकरण लक्ष्य तय करने और पारेषण शुल्क में पारदर्शिता लाने की बात भी कही है। ये सब क़दम मिलाकर यह संकेत देते हैं कि ब्रसेल्स संकट का उपयोग हरित बदलाव को पीछे धकेलने के बजाय उसे तेज़ करने में करना चाहता है। अब देखना यह है कि सदस्य देश इन सिफ़ारिशों को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं, क्योंकि अधिकांश उपाय स्वैच्छिक हैं और इनमें राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत होगी।
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