फेरारी की पहली इलेक्ट्रिक कार 'लूचे' ने मचाया बवाल, पोप के दर्शन से लेकर शेयरों में गिरावट तक
फेरारी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार लूचे को पोप लियो चौदहवें के सामने पेश किया, लेकिन कड़ी आलोचना, डिज़ाइन पर उपहास और शेयर बाज़ार में भारी गिरावट ने नई बहस छेड़ दी है।

इटली की प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स कार निर्माता फेरारी ने सोमवार को अपनी पहली पूर्णतः इलेक्ट्रिक कार 'लूचे' का अनावरण किया, जिसे मंगलवार को पोप लियो चौदहवें के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कंपनी के अध्यक्ष जॉन एल्कान ने इस चार दरवाज़ों वाली, पाँच सीटों वाली गाड़ी को स्वयं पोप को दिखाया, और उन्हें स्टीयरिंग व्हील भेंट किया। लूचे नाम का अर्थ 'रोशनी और दिशा' है, जो भविष्य की ओर मार्ग प्रशस्त करने का प्रतीक है। इसकी शुरुआती कीमत 6,40,000 अमेरिकी डॉलर रखी गई है, जो फेरारी के लिए एक साहसिक रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है।
हालाँकि, इस ऐतिहासिक क्षण के साथ ही ज़बरदस्त विवाद भी शुरू हो गया। फेरारी के पूर्व प्रमुख लुका दी मोंतेज़ेमोलो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'यह एक किंवदंती का विनाश है, कम से कम चीनी इसकी नकल तो नहीं करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि कार से फेरारी का प्रसिद्ध उछलता घोड़ा हटा देना चाहिए। पूर्व फ़ॉर्मूला वन प्रमुख फ्लावियो ब्रियातोरे और राजनेता कार्लो कालेंदा ने इसे सौंदर्य और तकनीक का अपमान करार दिया, जबकि उप-प्रधानमंत्री मातेओ साल्विनी ने कहा कि यह फेरारी के अलावा कुछ भी दिखती है। इटली के कुछ मीडिया ने इस प्रतिक्रिया को पारंपरिक ऑटोमोटिव मर्दानगी के संकट के रूप में भी देखा।
दुनिया भर की प्रतिक्रियाएँ भी कम कठोर नहीं रहीं। ब्राज़ील और स्विट्ज़रलैंड के बाज़ार विश्लेषकों ने बताया कि लूचे के अनावरण के बाद मिलान स्टॉक एक्सचेंज में फेरारी के शेयर 8 प्रतिशत से अधिक गिर गए। जर्मन और स्विस अख़बारों ने सवाल उठाया कि क्या गरजते इंजनों के बिना लक्ज़री स्पोर्ट्स कारों का कोई भविष्य है, क्योंकि यह आवाज़ फेरारी की पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है। अरबी और पुर्तगाली प्रेस ने पोप को कार दिखाए जाने के प्रतीकवाद पर ज़ोर देते हुए व्यंग्य किया कि अब यह 'केवल आस्था के बल पर बिकेगी'।
इस पूरे विवाद के बीच डिज़ाइन का पहलू सबसे दिलचस्प है। लूचे को एप्पल के पूर्व मुख्य डिज़ाइनर जॉनी आइव के नए स्टूडियो ने तैयार किया है, जो ओपनएआई के साथ रहस्यमयी परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं। फ़ेरारी ने यह स्पष्ट किया है कि उसकी रणनीति बहु-ऊर्जा है—पारंपरिक इंजनों को बदलना नहीं, बल्कि डिज़ाइन, प्रदर्शन और ड्राइविंग अनुभव की नई संभावनाएँ खोलना। पोप के आशीर्वाद के बावजूद, अभी यह तय नहीं है कि पुराने प्रशंसकों और निवेशकों का विश्वास वापस मिलेगा या नहीं, लेकिन इतना तय है कि फेरारी ने इलेक्ट्रिक युग में कूदने का साहस तो दिखा ही दिया है।
एक ही कहानी दूसरी जगहों पर कैसे बताई जाती है।
In Italy, the electric Ferrari is splitting opinion: some see it as an insult to the brand's heritage, while others celebrate it as an inevitable step forward. The papal audience turns the launch into an almost theological matter, with former bosses calling for the removal of the Prancing Horse emblem itself.
Across the Alps, the Ferrari drama is met with mockery: the Luce is portrayed as a soulless gadget, an iPhone on wheels destroying a legend. The Pope's involvement becomes just another sign that this electric car needs divine intervention to be accepted.
In Latin American markets, Ferrari's first electric car is met with skepticism: the stock slump and fierce criticism from former bosses fuel the perception of a misstep. The presentation to the Pope is read as a marketing stunt or an act of faith in an uncertain future.
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