व्हाइट हाउस बॉलरूम निर्माण पर अस्थायी रोक हटी, राष्ट्रपति रिकॉर्ड पारदर्शिता पर भी संकट
एक अमेरिकी अपीलीय अदालत ने 400 मिलियन डॉलर की बॉलरूम परियोजना को 17 अप्रैल तक जारी रखने की अनुमति दी, वहीं न्याय विभाग ने वाटरगेट-युगीन रिकॉर्ड कानून को खत्म करने की कोशिश की है।

एक अमेरिकी अपीलीय अदालत ने शनिवार को व्हाइट हाउस के नए बॉलरूम के निर्माण को 17 अप्रैल तक जारी रखने की अस्थायी अनुमति दे दी। यह फैसला तब आया जब एक निचली अदालत ने 31 मार्च को कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना इस परियोजना को रोकने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार की अपील को ध्यान में रखते हुए उस आदेश को 14 दिनों के लिए निलंबित कर दिया था [A1][A2]। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति, उनके परिवार और व्हाइट हाउस स्टाफ की सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्कों की गंभीरता को देखते हुए निर्माण फिलहाल रोका नहीं जा सकता [A1][A5]।
400 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस विशाल नियोक्लासिकल बॉलरूम की योजना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, जिसे नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिज़र्वेशन ने दिसंबर में अदालत में चुनौती दी थी [A5]। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना यह निर्माण ऐतिहासिक इमारत के स्वरूप को नुकसान पहुँचा सकता है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा कारणों से इस पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए [A1][A4]। अपीलीय अदालत ने निचली अदालत से कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू पर फिर से विचार करे और स्पष्ट करे कि कितना काम रोका जा सकता है [A1]।
इस बीच, ट्रंप प्रशासन की पारदर्शिता को लेकर एक और गंभीर चिंता सामने आई है। न्याय विभाग के कानूनी सलाहकार कार्यालय (ओएलसी) ने एक ज्ञापन में दावा किया है कि राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह तय करें कि कौन से राष्ट्रपति रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएँ, जिससे वाटरगेट कांड के बाद बना राष्ट्रपति रिकॉर्ड अधिनियम कमज़ोर हो सकता है [A3]। यह कदम भविष्य के प्रशासनों के लिए भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड तक पहुँच को सीमित कर सकता है और सत्ता की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है [A3]।
स्पेन की ला वानगार्दिया और जर्मनी की स्यूडडॉयचे त्साइटुंग जैसे यूरोपीय मीडिया ने बॉलरूम मामले को व्यापक अमेरिकी संदर्भ में रखा, जहाँ न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनाव दिखता है [A2][A4]। भारतीय पाठकों के लिए यह प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि किस तरह एक लोकतांत्रिक सरकार भी पारदर्शिता और ऐतिहासिक संरक्षण जैसे मूल्यों के साथ समझौता कर सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करता है, तो निर्माण पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति के पक्ष में जा सकता है, जबकि रिकॉर्ड नियमों में ढील देने का प्रयास प्रशासन के भीतर गोपनीयता की संस्कृति को और मज़बूत करेगा [A5][A3]।
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